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खुलासा: 12 साल में 250 एटीएम हैक कर 30 करोड़ चुराने वाला गैंग बेनकाब, पांच सदस्य गिरफ्तार

Wed, 01 Dec 2021 12:07 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 01 Dec 2021 12:07 AM IST
सार

गाजियाबाद के इंदिरापुरम और साइबर सेल टीम ने एटीएम हैकर पैसे चोरी करने वाले गिरोह के पांच शातिरों को पकड़ा है। साइबर सेल के नोडल अधिकारी अभय मिश्रा का कहना है कि गिरोह का सरगना शाहनवाज निवासी बिहार, सगीर निवासी मंडोली दिल्ली, मेहराज निवासी मुस्तफाबाद दिल्ली, मोहम्मद उमर निवासी गोकुल पुरी दिल्ली, और जमीर शेख निवासी प्रेम नगर मुंबई को गिरफ्तार किया है

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Ghaziabad Police ATM hacking gang caught 250 ATMs were hacked and 30 crores stolen In 12 years
एटीएम हैक कर 30 करोड़ चुराने वाला गैंग बेनकाब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में साइबर सेल ने सॉफ्टवेयर से एटीएम हैक कर कैश चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर पांच आरोपियों को मंगल बाजार चौक से गिरफ्तार कर लिया। गिरोह 12 साल में 8 राज्यों के 250 एटीएम हैक कर करीब 30 करोड़ रुपये चोरी कर चुका है। 
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हैदराबाद में बैठा कमल गैंग का सरगना है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए वहां की पुलिस से संपर्क किया। कमल के अलावा गैंग में शामिल शहजाद, जैद व वाजिद अभी फरार हैं। 13 जुलाई को न्यायखंड-1 में गौर ग्रीन विस्टा के पास एक्सिस बैंक के एटीएम को हैक करके करीब सात लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इस मामले की जांच के दौरान आरोपियों का सुराग लगा।
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गिरफ्तार आरोपी व उनकी भूमिका
शाहनवाज : किशनगंज बिहार निवासी बीसीए पास शाहनवाज सरगना कमल के साथ मिलकर एटीएम हैक करने के लिए कोडिंग उपलब्ध कराता था। वह उत्तराखंड रुड़की से 2009 में जेल जा चुका है। 
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सगीर : दिल्ली के मंडोली निवासी पांचवीं पास सगीर वारदात के लिए चोरी की गाड़ियां उपलब्ध कराता है। गाड़ी की फर्जी आरसी बनाता है। 

मेहराज : दिल्ली के मुस्तफाबाद निवासी बीसीए पास मेहराज का काम एटीएम में घुसकर सॉफ्टवेयर अपलोड कर मशीन से पैसे निकालना। 
मोहम्मद उमर : दिल्ली के गोकलपुरी निवासी 10वीं पास मोहम्मद उमर वारदात के दौरान गाड़ी चलाता था। एटीएम हैकिंग के दौरान बाहर खड़ा होकर निगरानी करता था। 

जमीर शेख : प्रेमनगर वर्ली मुंबई निवासी 11वीं पास जमीर शेख साइबर ठग है। 2009  से ऑनलाइन हैकिंग सीखकर कमल के साथ मिलकर एटीएम हैकिंग के लिए सॉफ्टवेयर व कोड उपलब्ध कराता था।

यह सामान बरामद

10 मोबाइल, एक सिम कार्ड, टाटा सफारी, फोर्ड इको स्पोर्ट, बुलेट, 16 एटीएम कार्ड, लैपटॉप-चार्जर, मुहर, पैनड्राइव, मैमोरी कार्ड, चार कार्ड रीडर, दो एनआरएफ, दो हार्ड डिस्क, दो रैम, वाईफाई की-बोर्ड, एटीएम स्कीमर, दो यूएसबी हब, दो यूएसबी, एक पी-1 डिस्प्ले सीडी ड्राइवर और एक हार्डडिस्क केबल बरामद हुई है।

2016 में जेल से छूटकर फिर सक्रिय हो गया गिरोह
साइबर सेल के नोडल अधिकारी और सीओ इंदिरापुरम अभय मिश्र ने बताया कि 2009 से सक्रिय गैंग दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, आगरा, कानपुर और मथुरा में करीब 250 वारदात कर चुका है। गाजियाबाद के नंदग्राम, इंदिरापुरम, विजयनगर, मोदीनगर और टीला मोड़ में हुई वारदातें इसी गैंग ने की थीं।

2015 में आरोपी रुड़की से जेल गए। 2016 में जेल से छूटकर फिर से वारदात शुरू कर दीं। घटना के दौरान आरोपी पुलिस की लोकेशन में न आएं, इसके लिए वह अपने फोन को ऑफलाइन मोड पर लगा देते थे। एटीएम की सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों का सुराग लगा।

ऐसे करते थे मशीन हैक

- एटीएम हैक करने के लिए आरोपी एक डिवाइस इस्तेमाल करते थे, जिसमें सॉफ्टवेयर और एंटी वायरस से लैस पैनड्राइव, ब्लूटूथ की-बोर्ड और एटीएम खोलने की चाबी रहती थी।
- आमतौर पर फ्रिज वाली चाबी से एटीएम का लॉक खुल जाता था, लेकिन जहां लॉक नहीं खुल पाता था, वहां आरोपी लॉक तोड़ देते थे।
- लॉक खुलने पर एटीएम में पैनड्राइव लगाकर उसकी विंडो करप्ट करते थे। उसके बाद उसमें अपना सॉफ्टवेयर अपलोड करते थे। ऐसा करते ही मशीन का नियंत्रण उनके हाथ में आ जाता था।
- यहां ब्लूटूथ की-बोर्ड का इस्तेमाल कर आरोपी क्यू आर कोड जनरेट करते थे। उसे हैदराबाद में बैठे सरगना कमल को भेजते थे। इसके बाद सरगना कमल क्यूआर कोर्ड के हिसाब से कुछ अंक बताया था, जिससे मशीन ऑपरेट होने लगती थी।
- एक कमांड देने पर एटीएम से 40 नोट निकलते थे। यह नोट 100, 500 और 2000 में से कोई भी हो सकते हैं।

नाइजीरियन गैंग से खरीदते थे सिम, ब्लॉक एटीएम कार्ड
गैंग के सदस्य साइबर ठगी करने वाले नाइजीरियन गैंग के संपर्क में भी थे। वह उनसे 2000 रुपये में फर्जी आईडी पर सिम और 1000 रुपये में ब्लॉक एटीएम खरीदते थे। एटीएम मशीन हैक करने के दौरान पुलिस के आने पर आरोपी ब्लॉक एटीएम दिखा देते थे कि मशीन काम नहीं कर रही है।
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