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किसान नहीं मानने वाले कानून स्थगन का प्रस्ताव : राकेश टिकैत
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यूपी गेट पर किसान आन्दोलन मे भोजन करते राकैश टिकैट।
- फोटो : SHAHIBABAD
किसान नहीं मानने वाले कानून स्थगन का प्रस्ताव : राकेश टिकैत
साहिबाबाद। कृषि कानूनों को स्थगित करने के सरकार के प्रस्ताव पर बृहस्पतिवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी। लेकिन इससे पहले देर रात भाकियू नेता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं होंगे। 56 दिनों से सड़क पर आंदोलनरत किसान कृषि कानूनों की वापसी होने पर ही घर वापसी को तैयार बैठे हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली पर भी बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस से वार्ता होगी लेकिन यह तय माना जाए कि बाहरी रिंग रोड पर यह रैली होगी ही। उधर, किसानों ने कहा कि उन्हें यह प्रस्ताव मंजूर नहीं, जब तक कानून वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अमर उजाला से बातचीत में देर रात भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार से आज सकारात्मक बातचीत हुई। सरकार ने कानून स्थगन की बात कही है। इस प्रस्ताव पर बृहस्पतिवार को संयुक्त संयुक्त मोर्चा की बैठक में कोई निर्णय लिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा कि उन्हें यह कतई नहीं लगता कि किसान सरकार के इस प्रस्ताव पर सहमत होंगे। किसान इस बात पर अडिग हैं कि जब तक कानून वापसी नहीं, घर वापसी नहीं। बता दें कि राकेश टिकैत ने वार्ता में जाने से पहले कहा था कि वह सरकार की हर चाल को समझते हैं, सरकार आंदोलन को तोड़ने की कोशिश कर रही है। इस संबंध में पूछे जाने पर टिकैत ने कहा कि सरकार चाल चलती ही रहती है लेकिन फिलहाल वह यह नहीं कह सकते कि आगामी चुनावों को लेकर ही सरकार ने कानून स्थगन की बात कही है। उन्होंने कहा कि कल ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस से वार्ता होगी। वार्ता में जो भी हो, लेकिन यह तय कर लिया गया है कि 26 जनवरी को रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी जिसमें हजारों ट्रैक्टर होंगे।
कानून स्थगन पर किसानों का कहना
- जब तक सरकार तीनों कानून वापस नहीं लेती। तब तक हमारी घर वापसी नहीं होगी। सरकार बार-बार ऐसे प्रस्ताव क्यों देती है, उसे यह कानून वापस लेने में क्या दिक्कत है। किसान के पास खेती के अलावा कुछ नहीं है। किसान एक-दो और तीन साल तक भी आंदोलन करने को बैठा है। कालीचरण, बुलंदशहर
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- किसान पिछले 56 दिनों से सड़क पर बैठे हैं। अभी भी सरकार कानून स्थगन की बात कर रही है। किसानों ने थोड़ी इन कानूनों को मांगा था। बिना कानून वापसी के किसान घर नहीं जाएंगे। कड़ाके की सर्दी में किसान कैसे सड़क पर बैठा है। इसका दर्द सरकार सही से समझे। सुधीर कुमार, सिसौली
- किसान मोर्चा की बैठक में सरकार के प्रस्ताव पर निर्णय होगा। इसमें हमारे चौ. राकेश टिकैत भी मौजूद रहेंगे। उन्हें किसानों का दर्द अच्छी तरह पता है। हमारी मांगें कानून वापसी की हैं। इसके बाद जैसे भी चौधरी तय करेंगे हम सभी उनके पीछे हैं। मैं सरकार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हूं। सुखबीर
- सरकार ने अभी तक जो बात कही उनमें अधिकांश पूरी नहीं हुई। सरकार के कानूनों में झोल है, इसीलिए कंडीशन रख रही है। पहले इन कानूनों को वापस लिया जाए, उसके बाद कमेटी नया ड्राफ्ट तैयार करेगी। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किया जाए। इससे पहले आंदोलन खत्म होने का सवाल नहीं है। अरविंद, शामली
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साहिबाबाद। कृषि कानूनों को स्थगित करने के सरकार के प्रस्ताव पर बृहस्पतिवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी। लेकिन इससे पहले देर रात भाकियू नेता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं होंगे। 56 दिनों से सड़क पर आंदोलनरत किसान कृषि कानूनों की वापसी होने पर ही घर वापसी को तैयार बैठे हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली पर भी बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस से वार्ता होगी लेकिन यह तय माना जाए कि बाहरी रिंग रोड पर यह रैली होगी ही। उधर, किसानों ने कहा कि उन्हें यह प्रस्ताव मंजूर नहीं, जब तक कानून वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अमर उजाला से बातचीत में देर रात भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार से आज सकारात्मक बातचीत हुई। सरकार ने कानून स्थगन की बात कही है। इस प्रस्ताव पर बृहस्पतिवार को संयुक्त संयुक्त मोर्चा की बैठक में कोई निर्णय लिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा कि उन्हें यह कतई नहीं लगता कि किसान सरकार के इस प्रस्ताव पर सहमत होंगे। किसान इस बात पर अडिग हैं कि जब तक कानून वापसी नहीं, घर वापसी नहीं। बता दें कि राकेश टिकैत ने वार्ता में जाने से पहले कहा था कि वह सरकार की हर चाल को समझते हैं, सरकार आंदोलन को तोड़ने की कोशिश कर रही है। इस संबंध में पूछे जाने पर टिकैत ने कहा कि सरकार चाल चलती ही रहती है लेकिन फिलहाल वह यह नहीं कह सकते कि आगामी चुनावों को लेकर ही सरकार ने कानून स्थगन की बात कही है। उन्होंने कहा कि कल ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस से वार्ता होगी। वार्ता में जो भी हो, लेकिन यह तय कर लिया गया है कि 26 जनवरी को रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी जिसमें हजारों ट्रैक्टर होंगे।
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कानून स्थगन पर किसानों का कहना
- जब तक सरकार तीनों कानून वापस नहीं लेती। तब तक हमारी घर वापसी नहीं होगी। सरकार बार-बार ऐसे प्रस्ताव क्यों देती है, उसे यह कानून वापस लेने में क्या दिक्कत है। किसान के पास खेती के अलावा कुछ नहीं है। किसान एक-दो और तीन साल तक भी आंदोलन करने को बैठा है। कालीचरण, बुलंदशहर
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- किसान पिछले 56 दिनों से सड़क पर बैठे हैं। अभी भी सरकार कानून स्थगन की बात कर रही है। किसानों ने थोड़ी इन कानूनों को मांगा था। बिना कानून वापसी के किसान घर नहीं जाएंगे। कड़ाके की सर्दी में किसान कैसे सड़क पर बैठा है। इसका दर्द सरकार सही से समझे। सुधीर कुमार, सिसौली
- किसान मोर्चा की बैठक में सरकार के प्रस्ताव पर निर्णय होगा। इसमें हमारे चौ. राकेश टिकैत भी मौजूद रहेंगे। उन्हें किसानों का दर्द अच्छी तरह पता है। हमारी मांगें कानून वापसी की हैं। इसके बाद जैसे भी चौधरी तय करेंगे हम सभी उनके पीछे हैं। मैं सरकार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हूं। सुखबीर
- सरकार ने अभी तक जो बात कही उनमें अधिकांश पूरी नहीं हुई। सरकार के कानूनों में झोल है, इसीलिए कंडीशन रख रही है। पहले इन कानूनों को वापस लिया जाए, उसके बाद कमेटी नया ड्राफ्ट तैयार करेगी। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किया जाए। इससे पहले आंदोलन खत्म होने का सवाल नहीं है। अरविंद, शामली