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वक्फ की 400 करोड़ की जमीन बेची, 20 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं
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वक्फ की 400 करोड़ की जमीन बेची, 20 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं
गाजियाबाद। 2015 से सात साल के भीतर वक्फ की करीब 400 करोड़ की संपत्ति को कानून ताक पर रखकर बेच दिया गया। मामला खुला तो डीएम स्तर से जांच हुई और संयुक्त निदेशक अभियोजन ने विधिक राय देते हुए एफआईआर की विधिक राय भी दी गई, लेकिन एक महीने बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इस मामले में शिकायतकर्ता ने एक अधिकारी पर एफआईआर के आदेश वाली फाइल अपने पास अटकाने का आरोप लगाया है।
रेलवे रोड बजरिया निवासी अधिवक्ता नदीमउद्दीन और रमतेराम रोड निवासी आफाक खान ने अक्तूबर माह में डीएम कार्यालय में शिकायत दी थी। उनका कहना था कि शासनादेश के मुताबिक वक्फ की संपत्ति को पट्टे पर देने, बंधक रखने, बेचे जाने या किसी भी तरह से हस्तांतरित करना गैरकानूनी है। इसके बावजूद रेलवे रेड बजरिया, रमतेराम रोड आदि स्थानों पर वक्फ की करीब 20 बीघा जमीन को बेच दिया गया। जिसकी कीमत 400 करोड़ रुपये से भी अधिक है। नदीमउद्दीन का कहना है कि वक्फ केपूर्व व वर्तमान मुतवल्ली ने वक्फ बोर्ड के नियमों को दरकिनार कर जमीन बेची है। इन जमीनों के करीब 60 रजिस्ट्री हुई हैं। उन्होंने डीएम से मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
एक फोन आ गया और रुक गई एफआईआर
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि करीब 20 दिन पहले उन्हें नगर कोतवाली में एफआईआर की कॉपी मिलने ही वाली थी। उन्हें एक घंटा इंतजार करने को कहा गया था। लेकिन इसी बीच एक कॉल आ गई और एफआईआर रोक दी गई। इसके बाद उनसे कह दिया गया कि एफआईआर होने पर सूचित कर दिया जाएगा।
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जांच रिपोर्ट की समीक्षा होनी है
इस मामले एफआईआर के निर्देश दिए गए थे। एसपी सिटी को सभी जांच रिपोर्ट की समीक्षा करनी थी। किन्ही कारणों से वह फाइल नहीं देख सके। जल्द ही एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए गए हैं। - पवन कुमार, एसएसपी
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गाजियाबाद। 2015 से सात साल के भीतर वक्फ की करीब 400 करोड़ की संपत्ति को कानून ताक पर रखकर बेच दिया गया। मामला खुला तो डीएम स्तर से जांच हुई और संयुक्त निदेशक अभियोजन ने विधिक राय देते हुए एफआईआर की विधिक राय भी दी गई, लेकिन एक महीने बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इस मामले में शिकायतकर्ता ने एक अधिकारी पर एफआईआर के आदेश वाली फाइल अपने पास अटकाने का आरोप लगाया है।
रेलवे रोड बजरिया निवासी अधिवक्ता नदीमउद्दीन और रमतेराम रोड निवासी आफाक खान ने अक्तूबर माह में डीएम कार्यालय में शिकायत दी थी। उनका कहना था कि शासनादेश के मुताबिक वक्फ की संपत्ति को पट्टे पर देने, बंधक रखने, बेचे जाने या किसी भी तरह से हस्तांतरित करना गैरकानूनी है। इसके बावजूद रेलवे रेड बजरिया, रमतेराम रोड आदि स्थानों पर वक्फ की करीब 20 बीघा जमीन को बेच दिया गया। जिसकी कीमत 400 करोड़ रुपये से भी अधिक है। नदीमउद्दीन का कहना है कि वक्फ केपूर्व व वर्तमान मुतवल्ली ने वक्फ बोर्ड के नियमों को दरकिनार कर जमीन बेची है। इन जमीनों के करीब 60 रजिस्ट्री हुई हैं। उन्होंने डीएम से मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
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एक फोन आ गया और रुक गई एफआईआर
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि करीब 20 दिन पहले उन्हें नगर कोतवाली में एफआईआर की कॉपी मिलने ही वाली थी। उन्हें एक घंटा इंतजार करने को कहा गया था। लेकिन इसी बीच एक कॉल आ गई और एफआईआर रोक दी गई। इसके बाद उनसे कह दिया गया कि एफआईआर होने पर सूचित कर दिया जाएगा।
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जांच रिपोर्ट की समीक्षा होनी है
इस मामले एफआईआर के निर्देश दिए गए थे। एसपी सिटी को सभी जांच रिपोर्ट की समीक्षा करनी थी। किन्ही कारणों से वह फाइल नहीं देख सके। जल्द ही एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए गए हैं। - पवन कुमार, एसएसपी