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वारदातों में प्रयुक्त कारों को खपाती थी दिल्ली पुलिस, चोरी में लेती थी बड़ा हिस्सा
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वारदातों में प्रयुक्त कारों को खपाती थी दिल्ली पुलिस, चोरी में लेती थी बड़ा हिस्सा
गाजियाबाद। एटीएम हैक करने वाले गिरोह के बदमाशों से पूछताछ में नोएडा पुलिस के बाद अब दिल्ली पुलिस भी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गई है। आरोपियों ने बताया कि वारदात में इस्तेमाल होने वाली चोरी की कारों को दिल्ली पुलिस खपाती थी। साथ ही बड़ा वारदातों में दिल्ली पुलिस को हिस्सा भी देना पड़ता था। गाजियाबाद पुलिस ने दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों को मामले में सूचित किया है।
पुलिस के मुताबिक, मंडोली के दिल्ली निवासी सगीर वाहन चोरी करता था। कई बार जेल जाने के बाद उसका भय खुल गया और पुलिस की मिलीभगत से गाड़ियों को चोरी करनी शुरू कर दीं। एटीएम हैक करने वाले गिरोह के संपर्क में आने के बाद वह गिरोह के लिए गाड़ी चोरी करने लगा। एक ही गाड़ी कई वारदातों में प्रयुक्त होने के बाद दिल्ली के दयालपुरी थाने की पुलिस सगीर को बुलाती थी और अपना हिस्सा मांगती थी। इसके अलावा कई वारदात करने के बाद वह गाड़ी को पुलिस के हवाले कर देता था। पुलिस उस गाड़ी को किसी अन्य आरोपी से बरामद दिखा देती थी।
500 से अधिक कारें चुरा चुका है सगीर
पुलिस का कहना है कि पांचवीं पास सगीर ने विभिन्न प्रदेशों में एटीएम हैकिंग की घटनाओं के दिल्ली से चोरी की कार मुहैया कराने का जिम्मा संभाल लिया। सगीर अब तक 500 से अधिक कारें चोरी कर चुका है। कारों को चुराने के लिए भी सगीर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था। उसके खिलाफ दिल्ली में 28 केस भी दर्ज हैं।
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विदेशी एप के जरिये सरगना के संपर्क में आया था जमीर
साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि एटीएम हैक करने वाले गिरोह का सरगना हैदराबाद में बैठा कमल है। विदेशी एप केजरिये मुंबई निवासी जमीर का कमल से संपर्क हुआ। 10वीं पास कमल हैंकिंग में एक्सपर्ट था। लिहाजा एटीएम हैकिंग के काम में कमल ने जमीर को आगे कर दिया। 2012 में जमीर अपने रिश्तेदार शाहनवाज के यहां आया तो उसकी मुलाकात सगीर से हुई।
कमल, जमीर व शाहनवाज का 75 फीसदी हिस्सा
पुलिस का कहना है कि एटीएम में घुसकर लॉक तोड़ने, सॉफ्टवेयर अपलोड करने से लेकर कैश निकलने तक की प्रक्रिया में करीब एक घंटा लगता है। एटीएम में घुसकर इस काम को अंजाम देने वाले आरोपियों का हिस्सा 25 फीसदी रहता था, जबकि 75 फीसदी रकम सरगना कमल, सगीर और शाहनवाज को मिलती थी।
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गाजियाबाद। एटीएम हैक करने वाले गिरोह के बदमाशों से पूछताछ में नोएडा पुलिस के बाद अब दिल्ली पुलिस भी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गई है। आरोपियों ने बताया कि वारदात में इस्तेमाल होने वाली चोरी की कारों को दिल्ली पुलिस खपाती थी। साथ ही बड़ा वारदातों में दिल्ली पुलिस को हिस्सा भी देना पड़ता था। गाजियाबाद पुलिस ने दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों को मामले में सूचित किया है।
पुलिस के मुताबिक, मंडोली के दिल्ली निवासी सगीर वाहन चोरी करता था। कई बार जेल जाने के बाद उसका भय खुल गया और पुलिस की मिलीभगत से गाड़ियों को चोरी करनी शुरू कर दीं। एटीएम हैक करने वाले गिरोह के संपर्क में आने के बाद वह गिरोह के लिए गाड़ी चोरी करने लगा। एक ही गाड़ी कई वारदातों में प्रयुक्त होने के बाद दिल्ली के दयालपुरी थाने की पुलिस सगीर को बुलाती थी और अपना हिस्सा मांगती थी। इसके अलावा कई वारदात करने के बाद वह गाड़ी को पुलिस के हवाले कर देता था। पुलिस उस गाड़ी को किसी अन्य आरोपी से बरामद दिखा देती थी।
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500 से अधिक कारें चुरा चुका है सगीर
पुलिस का कहना है कि पांचवीं पास सगीर ने विभिन्न प्रदेशों में एटीएम हैकिंग की घटनाओं के दिल्ली से चोरी की कार मुहैया कराने का जिम्मा संभाल लिया। सगीर अब तक 500 से अधिक कारें चोरी कर चुका है। कारों को चुराने के लिए भी सगीर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था। उसके खिलाफ दिल्ली में 28 केस भी दर्ज हैं।
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विदेशी एप के जरिये सरगना के संपर्क में आया था जमीर
साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि एटीएम हैक करने वाले गिरोह का सरगना हैदराबाद में बैठा कमल है। विदेशी एप केजरिये मुंबई निवासी जमीर का कमल से संपर्क हुआ। 10वीं पास कमल हैंकिंग में एक्सपर्ट था। लिहाजा एटीएम हैकिंग के काम में कमल ने जमीर को आगे कर दिया। 2012 में जमीर अपने रिश्तेदार शाहनवाज के यहां आया तो उसकी मुलाकात सगीर से हुई।
कमल, जमीर व शाहनवाज का 75 फीसदी हिस्सा
पुलिस का कहना है कि एटीएम में घुसकर लॉक तोड़ने, सॉफ्टवेयर अपलोड करने से लेकर कैश निकलने तक की प्रक्रिया में करीब एक घंटा लगता है। एटीएम में घुसकर इस काम को अंजाम देने वाले आरोपियों का हिस्सा 25 फीसदी रहता था, जबकि 75 फीसदी रकम सरगना कमल, सगीर और शाहनवाज को मिलती थी।