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हर चौथे पुरुष और पांचवीं महिला को उच्च रक्तचाप
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हर चौथे पुरुष और पांचवीं महिला को उच्च रक्तचाप
गाजियाबाद। कोरोना काल में बढ़ रहे तनाव से लोग उच्च रक्तचाप के शिकार हो रहे हैं। गाजियाबाद की स्थिति यह है कि हर चौथा पुरुष और पांचवी महिला इसके मरीज बन चुके हैं। 20 फीसदी बालिग आबादी मधुमेह से भी परेशान है। हर पांचवा पुरुष और हर पांचवी महिला में यह बीमारी मिली है। इसका खुलासा किया है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ( एनएफएचएस-5) की हाल ही में जारी रिपोर्ट ने। इसमें 93124 महिलाओं और 12043 पुरुषों पर किए गए सर्वे के आधार पर बताया गया है कि पिछले पांच साल में दोनों बीमारी का ग्राफ बहुत तेजी से चढ़ा है।
2015-16 में 0.7 फीसदी महिलाओं को उच्च रक्तचाप था। 2020-21 में 19.3 फीसदी को हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 10.7 से बढ़कर 24.5 फीसदी हो गया है। मधुमेह की चपेट में 17.9 फीसदी महिलाएं और 20.2 फीसदी पुरुष हैं। मधुमेह के विशेषज्ञ डॉ. हितेष सराओगी का कहना है कि काम का ट्रेंड बदल गया है। अधिकांश लोग मानसिक मेहनत तो अधिक करते हैं, लेकिन शारीरिक श्रम में कमी हो गई है। खानपान का संतुलन न होने से अधिक कैलोरी वाली चीजों का प्रयोग लोग कर रहे हैं। बीस फीसदी मामलों में वंशानुगत के कारण यह बीमारी होती है।
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा माहेश्वरी का कहना है कि जब महिलाओं की उम्र 45 से 55 के बीच होती हैं तो उनके शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन तेजी से घटने लगते हैं। एस्ट्रोजन हार्मोन के कम हो जाने से शरीर में इंसुलिन अच्छे से प्रयोग नहीं कर पाता है। इससे उच्च रक्तचाप की परेशानी बढ़ती है।
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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कात्याल का कहना है कि जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं और पुरुषों की धमनियां अलग तरह के पैटर्न से काम करना शुरू कर देती हैं। इससे उच्च रक्तचाप हो जाता है। बड़ी धमनी का संकीर्ण होना महिलाओं में देर से देखने को मिलता है। पुरुषों की धमनी महिलाओं के मुकाबले 10 साल पहले संकीर्ण हो जाती हैं।
उच्च रक्तचाप
आयु मरीज ( महिला-पुरुष मिलाकर)
15 से 18 - सात फीसदी
19 से 21 - 12 फीसदी
22 से 25 - 22 फीसदी
26 से 32 - 32 फीसदी
33 से 40 - 40 फीसदी
41 से 44 - 45 फीसदी
45 से 50 - 70 फीसदी
50 से 60 - 30 फीसदी
( ये आंकड़े निजी चिकित्सकों के अनुसार )
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गाजियाबाद। कोरोना काल में बढ़ रहे तनाव से लोग उच्च रक्तचाप के शिकार हो रहे हैं। गाजियाबाद की स्थिति यह है कि हर चौथा पुरुष और पांचवी महिला इसके मरीज बन चुके हैं। 20 फीसदी बालिग आबादी मधुमेह से भी परेशान है। हर पांचवा पुरुष और हर पांचवी महिला में यह बीमारी मिली है। इसका खुलासा किया है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ( एनएफएचएस-5) की हाल ही में जारी रिपोर्ट ने। इसमें 93124 महिलाओं और 12043 पुरुषों पर किए गए सर्वे के आधार पर बताया गया है कि पिछले पांच साल में दोनों बीमारी का ग्राफ बहुत तेजी से चढ़ा है।
2015-16 में 0.7 फीसदी महिलाओं को उच्च रक्तचाप था। 2020-21 में 19.3 फीसदी को हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 10.7 से बढ़कर 24.5 फीसदी हो गया है। मधुमेह की चपेट में 17.9 फीसदी महिलाएं और 20.2 फीसदी पुरुष हैं। मधुमेह के विशेषज्ञ डॉ. हितेष सराओगी का कहना है कि काम का ट्रेंड बदल गया है। अधिकांश लोग मानसिक मेहनत तो अधिक करते हैं, लेकिन शारीरिक श्रम में कमी हो गई है। खानपान का संतुलन न होने से अधिक कैलोरी वाली चीजों का प्रयोग लोग कर रहे हैं। बीस फीसदी मामलों में वंशानुगत के कारण यह बीमारी होती है।
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महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा माहेश्वरी का कहना है कि जब महिलाओं की उम्र 45 से 55 के बीच होती हैं तो उनके शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन तेजी से घटने लगते हैं। एस्ट्रोजन हार्मोन के कम हो जाने से शरीर में इंसुलिन अच्छे से प्रयोग नहीं कर पाता है। इससे उच्च रक्तचाप की परेशानी बढ़ती है।
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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कात्याल का कहना है कि जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं और पुरुषों की धमनियां अलग तरह के पैटर्न से काम करना शुरू कर देती हैं। इससे उच्च रक्तचाप हो जाता है। बड़ी धमनी का संकीर्ण होना महिलाओं में देर से देखने को मिलता है। पुरुषों की धमनी महिलाओं के मुकाबले 10 साल पहले संकीर्ण हो जाती हैं।
उच्च रक्तचाप
आयु मरीज ( महिला-पुरुष मिलाकर)
15 से 18 - सात फीसदी
19 से 21 - 12 फीसदी
22 से 25 - 22 फीसदी
26 से 32 - 32 फीसदी
33 से 40 - 40 फीसदी
41 से 44 - 45 फीसदी
45 से 50 - 70 फीसदी
50 से 60 - 30 फीसदी
( ये आंकड़े निजी चिकित्सकों के अनुसार )