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1200 मुकदमे दर्ज होने के बाद भी हर रोज दो करोड़ की बिजली चोरी
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महाराणा प्रताप नगर में बिजली चोरी के लिए डाली हुई हैं कट्टिया। संवाद
1200 मुकदमे दर्ज होने के बाद भी हर रोज दो करोड़ की बिजली चोरी
गाजियाबाद। पावर कारपोरेशन ने बिजली चोरी रोकने के लिए न केवल 130 करोड़ रुपये खर्च किए बल्कि बिजली चोरों पर इस साल अक्तूबर तक 10 महीने में 1200 केस भी दर्ज करा दिए, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला। सख्ती के बावजूद स्थिति यह है कि हर महीने 60 करोड़ रुपये की बिजली चोरी की जा रही है। आलम यह है कि 10 से ज्यादा इलाकों में कटिया कनेक्शन धड़ल्ले से चल रहे हैं और विरोध के डर से अफसर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे । अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को पड़ताल की तो कटिया का जाल फैला नजर आया।
लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर, कैला भट्टा, सिहानी गांव, नंदग्राम, विजयनगर बिजली चोरी का जा रही है। यहां बाजार से लेकर गली-मोहल्लो तक में बिजली की लाइन पर कटिया डाली हुई हैं। लोनी में तो मुख्य बाजार में ही कटिया कनेक्शन के तारों का जाल बिछा है। कैला भट्टा में छह महीने पहले चेकिंग हुई थी। लोगों ने बताया कि उस समय कटिया हटा ली गई थी लेकिन थोड़े दिन बाद फिर से डाल लीं।
शास्त्रीनगर के एमपी नगर में एक ही तार पर 20 से ज्यादा कटिया पड़ी हैं। यह हाल तब है जबकि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा पिछले तीन महीने में दो बार वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए पॉवर कारपोरेशन के अफसरों को हिदायत दे चुके हैं कि गाजियाबाद में बिजली चोरी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
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लोनी, मुरादनगर के सबसे अधिक मामले दर्जं
इस साल कटिया से बिजली चोरी के मामले में दर्ज मुकदमों में लोनी और मुरादनगर में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। इसके अलावा कैला भट्टा, डासना, नंदग्राम, विजयनगर से एंटी पावर थेफ्ट थाने ने मुकदमे दर्ज किए हैं।
साल भर में दर्ज मुकदमे और लाइनलॉस
क्षेत्र दर्ज मुकदमे लाइनलॉस
लोनी 432 29 फीसदी
मुरादनगर 222 7 फीसदी
मोदीनगर 135 6 फीसदी
कैलाभट्टा 155 4 फीसदी
डासना 90 4 फीसदी
सिहानी गांव 66 3 फीसदी
अन्य शहरी क्षेत्र 100 10 से 11 फीसदी
कई क्षेत्रों में विरोध के चलते कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई नहीं हो पाती। इसके लिए जिला प्रशासन के सहयोग से अभियान चलाया जाता है। संवेदनशील क्षेत्रों में विजिलेंस की टीमों के साथ कार्रवाई की जाती है।
एसके पुरवार, मुख्य अभियंता
विद्युत निगम
वीडियो वायरल के बाद भी कटिया नहीं रुकी
छह महीने पहले मुरादनगर में कटिया कनेक्शन का वीडियो विभाग की टीम ने बनाया था, जो पूरे देश में वायरल हुआ था। इसमें कटिया हटाने के लिए उपभोक्ता छत पर लेटकर तार तक पहुंचता है। उपभोक्ता द्वारा तार हटाने से पहले उसका वीडियो बनाकर रंगे हाथ कर्मियों ने पकड़ा था। इसके बाद भी मुरादनगर में कटिया कनेक्शन नहीं हट पाए।
डीटी मीटर से नहीं रुकी चोरी
बिजली चोरी रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (डीटी) मीटर लगाए हैं। इससे ट्रांसफार्मर से सप्लाई होने वाली आपूर्ति का सटीक डाटा अधिकारियों के पास रहता है। इस तकनीक की मदद से ट्रांसफार्मर से जुडे़ कनेक्शन की बिजली खपत का पता चल जाता है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति की ऑनलाइन निगरानी के लिए भी सभी उपकेंद्रों पर रियल टाइम डाटा एक्विजेशन सिस्टम (आरटीडास) लगाए गए हैं। इन उपकेंद्रों को विद्युत निगम के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है, जहां से बिजलीघरों से होने वाली आपूर्ति की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। आरटीडास लगाने का कार्य जिले में पूरा हो गया है। इन दोनों ही तकनीक पर निगम ने लगभग 130 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके पीछे मकसद बिजली चोरी रोकना भी था, लेकिन यह सफल न हुआ।
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गाजियाबाद। पावर कारपोरेशन ने बिजली चोरी रोकने के लिए न केवल 130 करोड़ रुपये खर्च किए बल्कि बिजली चोरों पर इस साल अक्तूबर तक 10 महीने में 1200 केस भी दर्ज करा दिए, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला। सख्ती के बावजूद स्थिति यह है कि हर महीने 60 करोड़ रुपये की बिजली चोरी की जा रही है। आलम यह है कि 10 से ज्यादा इलाकों में कटिया कनेक्शन धड़ल्ले से चल रहे हैं और विरोध के डर से अफसर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे । अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को पड़ताल की तो कटिया का जाल फैला नजर आया।
लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर, कैला भट्टा, सिहानी गांव, नंदग्राम, विजयनगर बिजली चोरी का जा रही है। यहां बाजार से लेकर गली-मोहल्लो तक में बिजली की लाइन पर कटिया डाली हुई हैं। लोनी में तो मुख्य बाजार में ही कटिया कनेक्शन के तारों का जाल बिछा है। कैला भट्टा में छह महीने पहले चेकिंग हुई थी। लोगों ने बताया कि उस समय कटिया हटा ली गई थी लेकिन थोड़े दिन बाद फिर से डाल लीं।
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शास्त्रीनगर के एमपी नगर में एक ही तार पर 20 से ज्यादा कटिया पड़ी हैं। यह हाल तब है जबकि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा पिछले तीन महीने में दो बार वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए पॉवर कारपोरेशन के अफसरों को हिदायत दे चुके हैं कि गाजियाबाद में बिजली चोरी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
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लोनी, मुरादनगर के सबसे अधिक मामले दर्जं
इस साल कटिया से बिजली चोरी के मामले में दर्ज मुकदमों में लोनी और मुरादनगर में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। इसके अलावा कैला भट्टा, डासना, नंदग्राम, विजयनगर से एंटी पावर थेफ्ट थाने ने मुकदमे दर्ज किए हैं।
साल भर में दर्ज मुकदमे और लाइनलॉस
क्षेत्र दर्ज मुकदमे लाइनलॉस
लोनी 432 29 फीसदी
मुरादनगर 222 7 फीसदी
मोदीनगर 135 6 फीसदी
कैलाभट्टा 155 4 फीसदी
डासना 90 4 फीसदी
सिहानी गांव 66 3 फीसदी
अन्य शहरी क्षेत्र 100 10 से 11 फीसदी
कई क्षेत्रों में विरोध के चलते कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई नहीं हो पाती। इसके लिए जिला प्रशासन के सहयोग से अभियान चलाया जाता है। संवेदनशील क्षेत्रों में विजिलेंस की टीमों के साथ कार्रवाई की जाती है।
एसके पुरवार, मुख्य अभियंता
विद्युत निगम
वीडियो वायरल के बाद भी कटिया नहीं रुकी
छह महीने पहले मुरादनगर में कटिया कनेक्शन का वीडियो विभाग की टीम ने बनाया था, जो पूरे देश में वायरल हुआ था। इसमें कटिया हटाने के लिए उपभोक्ता छत पर लेटकर तार तक पहुंचता है। उपभोक्ता द्वारा तार हटाने से पहले उसका वीडियो बनाकर रंगे हाथ कर्मियों ने पकड़ा था। इसके बाद भी मुरादनगर में कटिया कनेक्शन नहीं हट पाए।
डीटी मीटर से नहीं रुकी चोरी
बिजली चोरी रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (डीटी) मीटर लगाए हैं। इससे ट्रांसफार्मर से सप्लाई होने वाली आपूर्ति का सटीक डाटा अधिकारियों के पास रहता है। इस तकनीक की मदद से ट्रांसफार्मर से जुडे़ कनेक्शन की बिजली खपत का पता चल जाता है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति की ऑनलाइन निगरानी के लिए भी सभी उपकेंद्रों पर रियल टाइम डाटा एक्विजेशन सिस्टम (आरटीडास) लगाए गए हैं। इन उपकेंद्रों को विद्युत निगम के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है, जहां से बिजलीघरों से होने वाली आपूर्ति की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। आरटीडास लगाने का कार्य जिले में पूरा हो गया है। इन दोनों ही तकनीक पर निगम ने लगभग 130 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके पीछे मकसद बिजली चोरी रोकना भी था, लेकिन यह सफल न हुआ।