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लोनी के पानी में मिला शीशा और क्रोमियम
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लोनी के पानी में मिला शीशा और क्रोमियम
गाजियाबाद। हिंडन पार क्षेत्र के बाद अब लोनी क्षेत्र का भूजल दूषित हो गया है। जल निगम को अब लोनी में नलकूप लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता का पानी नहीं मिल पा रहा है। जल निगम ने आठ स्थानों पर बोरिंग किया, लेकिन हर जगह भूजल में शीश, क्रोमियम और अन्य हैवी मेटल्स मिले। इसकी वजह से अब जल निगम को केंद्र सरकार के फंड से चल रही वाटर सप्लाई स्कीम बंद करनी पड़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि भूजल प्रदूषित होने का कारण लोनी क्षेत्र में चल रही डाइंग फैक्टरियां और अन्य उद्योग हैं।
जल निगम की यमुना एक्शन प्लान इकाई ने लोनी में 16 नलकूपों की एक परियोजना पर काम शुरू किया था। इसमें से 14 नलकूप लगाने के लिए जगह मिल पाई है। इसके बाद अमृत योजना के तहत केंद्र सरकार से मिले फंड से 29 नलकूप लगाने, 200 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने और 3 ओवरहेड टैंक बनाने की योजना पर काम शुरू किया था। 72 करोड़ की इस परियोजना में जल निगम महज 5 नलकूप लगा पाया है। बाकी नलकूपों को लगाने के लिए बोरिंग किया गया, लेकिन हर जगह पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। इसमें न सिर्फ टीडीएस की मात्रा बेहद ज्यादा मिली, बल्कि मानव जीवन के लिए खतरनाक लेड, क्रोम जैसे कई हैवी मेटल्स मिले। जगह-जगह बोरिंग करने पर भी पानी की गुणवत्ता ठीक न मिलने पर अब जल निगम ने घर-घर पानी आपूर्ति की इस योजना को बीच में ही बंद करने का निर्णय लिया है।
गंदा पानी सीधे भूजल में मिला रहे उद्योग, कार्रवाई शून्य
औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास की कॉलोनियों के भूजल की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। फैक्टरियों से निकलने वाला गंदा केमिकल युक्त पानी ईटीपी (एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिए शोधित नहीं किया जा रहा है, बल्कि बोरिंग कर सीधे भूजल में मिलाया जा रहा है। साहिबाबाद साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र के आसपास का ग्राउंड वाटर खराब हो चुका है। करीब दो साल पहले मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र से सटे राजनगर क्षेत्र के भूजल में खतरनाक क्रोम मिला था। इसकी वजह से यहां पानी का रंग हरा हो गया है। अब लोनी क्षेत्र में भी पानी दूषित हो गया है।
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सरफेस वाटर स्कीम पर काम करेगा जल निगम
ग्राउंड वाटर प्रदूषित हो जाने के बाद अब जल निगम सरफेस वाटर (नदी, नहर का पानी) लाकर लोनी क्षेत्र में आपूर्ति करने की योजना पर काम कर रहा है। जल निगम के इंजीनियर इस क्षेत्र में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जमीन का सर्वे कर रहे हैं। जल्द ही परियोजना की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
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कोट
दूसरों विकल्पों पर होगा काम
लोनी में नलकूप लगाने के लिए बोरिंग किए गए थे, लेकिन पानी की गुणवत्ता खराब मिल रही है। नलकूप लगाने के लिए पानी न मिल पाने की वजह से वाटर सप्लाई स्कीम बीच में बंद करनी पड़ रही है। अब पानी आपूर्ति के अन्य विकल्पों पर काम किया जाएगा। - अमित कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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गाजियाबाद। हिंडन पार क्षेत्र के बाद अब लोनी क्षेत्र का भूजल दूषित हो गया है। जल निगम को अब लोनी में नलकूप लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता का पानी नहीं मिल पा रहा है। जल निगम ने आठ स्थानों पर बोरिंग किया, लेकिन हर जगह भूजल में शीश, क्रोमियम और अन्य हैवी मेटल्स मिले। इसकी वजह से अब जल निगम को केंद्र सरकार के फंड से चल रही वाटर सप्लाई स्कीम बंद करनी पड़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि भूजल प्रदूषित होने का कारण लोनी क्षेत्र में चल रही डाइंग फैक्टरियां और अन्य उद्योग हैं।
जल निगम की यमुना एक्शन प्लान इकाई ने लोनी में 16 नलकूपों की एक परियोजना पर काम शुरू किया था। इसमें से 14 नलकूप लगाने के लिए जगह मिल पाई है। इसके बाद अमृत योजना के तहत केंद्र सरकार से मिले फंड से 29 नलकूप लगाने, 200 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने और 3 ओवरहेड टैंक बनाने की योजना पर काम शुरू किया था। 72 करोड़ की इस परियोजना में जल निगम महज 5 नलकूप लगा पाया है। बाकी नलकूपों को लगाने के लिए बोरिंग किया गया, लेकिन हर जगह पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। इसमें न सिर्फ टीडीएस की मात्रा बेहद ज्यादा मिली, बल्कि मानव जीवन के लिए खतरनाक लेड, क्रोम जैसे कई हैवी मेटल्स मिले। जगह-जगह बोरिंग करने पर भी पानी की गुणवत्ता ठीक न मिलने पर अब जल निगम ने घर-घर पानी आपूर्ति की इस योजना को बीच में ही बंद करने का निर्णय लिया है।
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गंदा पानी सीधे भूजल में मिला रहे उद्योग, कार्रवाई शून्य
औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास की कॉलोनियों के भूजल की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। फैक्टरियों से निकलने वाला गंदा केमिकल युक्त पानी ईटीपी (एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिए शोधित नहीं किया जा रहा है, बल्कि बोरिंग कर सीधे भूजल में मिलाया जा रहा है। साहिबाबाद साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र के आसपास का ग्राउंड वाटर खराब हो चुका है। करीब दो साल पहले मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र से सटे राजनगर क्षेत्र के भूजल में खतरनाक क्रोम मिला था। इसकी वजह से यहां पानी का रंग हरा हो गया है। अब लोनी क्षेत्र में भी पानी दूषित हो गया है।
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सरफेस वाटर स्कीम पर काम करेगा जल निगम
ग्राउंड वाटर प्रदूषित हो जाने के बाद अब जल निगम सरफेस वाटर (नदी, नहर का पानी) लाकर लोनी क्षेत्र में आपूर्ति करने की योजना पर काम कर रहा है। जल निगम के इंजीनियर इस क्षेत्र में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जमीन का सर्वे कर रहे हैं। जल्द ही परियोजना की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
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कोट
दूसरों विकल्पों पर होगा काम
लोनी में नलकूप लगाने के लिए बोरिंग किए गए थे, लेकिन पानी की गुणवत्ता खराब मिल रही है। नलकूप लगाने के लिए पानी न मिल पाने की वजह से वाटर सप्लाई स्कीम बीच में बंद करनी पड़ रही है। अब पानी आपूर्ति के अन्य विकल्पों पर काम किया जाएगा। - अमित कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम