{"_id":"613facfa8ebc3ebd897eee26","slug":"ghaziabad-news-ghaziabad-news-gbd225844070","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक सरकारी स्कूल ऐसा भी... प्रोजेक्टर से पढ़ाई, हर क्लासरूम में एसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक सरकारी स्कूल ऐसा भी... प्रोजेक्टर से पढ़ाई, हर क्लासरूम में एसी
विज्ञापन
गाजियाबाद। मुरादनगर के कंपोसिट स्कूल बसंतपुर सैंथली में कंप्यूटर पर पढ़ाई करते बच्चे। फोटो: कु?
- फोटो : GHAZIABAD City
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक सरकारी स्कूल ऐसा भी... प्रोजेक्टर से पढ़ाई, हर क्लासरूम में एसी
गाजियाबाद। मुरादनगर के वसंतपुर सेंथली गांव के सरकारी स्कूल को जो भी शख्स पहली मर्तबा देखता है, देखता रह जाता है और कह उठता है, अरे वाह...गजब... सरकारी स्कूल ऐसे भी होते हैं। सुखद आश्चचर्य इसलिए होता है क्योंकि यहां के स्मार्ट क्लासरूम वातानुकूलित हैं जिनमें पढ़ाई के लिए प्रोजेक्टर लगे हैं और हर शिक्षक के पास लैपटॉप है। इतना ही नहीं, किताबें पढ़ने के लिए लाइब्रेरी है और कंप्यूटर सीखने के लिए कंप्यूटर लैब। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इन खूबियों का नतीजा है कि गांव के लोग बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर उनका यहां दाखिला करा रहे हैं।
बच्चों के पसंदीदा कार्टूनों की तस्वीरों से चमकती-दमकती रंग-बिरंगी दीवारों वाले स्कूल की तस्वीर पिछले दो साल में बदली है। यह कमाल किसी अफसर या सरकारी योजना का नहीं, बल्कि इसी स्कूल के पूर्व छात्रों का है। गांव के प्रधान अनुज त्यागी ने बताया, स्कूल को चमकाने में मुख्य भूमिका उनके छोटे भाई की पत्नी अर्णिमा की रही। एमए-बीएड अर्णिमा 2015 से अप्रैल 2021 तक प्रधान रहीं। उन्होंने स्कूल से शिक्षा पाकर ऊंचे पदों पर पहुंच चुके और कामयाब उद्यमी या कारोबारी बन चुके लोगों से संपर्क कर स्कूल को चमकाने में मदद मांगी। बस फिर क्या था, तस्वीर बदल गई। कंप्यूटर लैब में दस कंप्यूटर लगे हैं। स्कूल में दस एसी हैं। पुस्तकालय में 500 से ज्यादा किताबे हैं। बिजली का बिल ग्राम पंचायत? निधि से चुकाया जाता है। स्कूल में 360 बच्चे और 12 शिक्षक हैं। चालू सत्र में 100 बच्चे निजी स्कूल छोड़कर यहां आए हैं।
- शानदार मैदान, हर खेल की किट मौजूद
शिक्षा केसाथ खेल को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय में प्रत्येक खेल की किट है। बच्चों को क्त्रिस्केट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, रस्सी कूद व अन्य खेल खिलाए जाते हैं। विद्यालय के बच्चे जिलास्तर एवं प्रदेश स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग करते हैं।
विज्ञापन
- दाखिला मिलना मुश्किल
अधिकतर सरकारी स्कूलों में बच्चों की कमी रहती है, लेकिन बसंतपुर सेंथली के कंपोजिट विद्यालय में दाखिला मिलना मुश्किल है। खाली सीटों से कई गुना आवेदन यहां आते हैं। आसपास के गांव असालतनगर, शोभापुर, जलालपुर रघुनाथपुर, दुहाई, भिक्कनपुर तक के बच्चे आते हैं।
हर सुविधा स्कूल में मौजूद
हमने स्कूल को संवारने में काफी मेहनत की है। विद्यालय में किचन गार्डन से लेकर इन्वर्टर, फर्नीचर, पार्क में झूले, आरओ के पानी तक की व्यवस्था है। स्मार्ट स्कूल के बच्चे पढ़ाई में भी स्मार्ट हैं। काफी संख्या में निजी स्कूलों के बच्चे यहां प्रवेश लेते हैं।
सीमा सिंह, प्रधानाध्यापिका कंपोजिट विद्यालय बसंतपुर सेंथली
विज्ञापन
गाजियाबाद। मुरादनगर के वसंतपुर सेंथली गांव के सरकारी स्कूल को जो भी शख्स पहली मर्तबा देखता है, देखता रह जाता है और कह उठता है, अरे वाह...गजब... सरकारी स्कूल ऐसे भी होते हैं। सुखद आश्चचर्य इसलिए होता है क्योंकि यहां के स्मार्ट क्लासरूम वातानुकूलित हैं जिनमें पढ़ाई के लिए प्रोजेक्टर लगे हैं और हर शिक्षक के पास लैपटॉप है। इतना ही नहीं, किताबें पढ़ने के लिए लाइब्रेरी है और कंप्यूटर सीखने के लिए कंप्यूटर लैब। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इन खूबियों का नतीजा है कि गांव के लोग बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर उनका यहां दाखिला करा रहे हैं।
बच्चों के पसंदीदा कार्टूनों की तस्वीरों से चमकती-दमकती रंग-बिरंगी दीवारों वाले स्कूल की तस्वीर पिछले दो साल में बदली है। यह कमाल किसी अफसर या सरकारी योजना का नहीं, बल्कि इसी स्कूल के पूर्व छात्रों का है। गांव के प्रधान अनुज त्यागी ने बताया, स्कूल को चमकाने में मुख्य भूमिका उनके छोटे भाई की पत्नी अर्णिमा की रही। एमए-बीएड अर्णिमा 2015 से अप्रैल 2021 तक प्रधान रहीं। उन्होंने स्कूल से शिक्षा पाकर ऊंचे पदों पर पहुंच चुके और कामयाब उद्यमी या कारोबारी बन चुके लोगों से संपर्क कर स्कूल को चमकाने में मदद मांगी। बस फिर क्या था, तस्वीर बदल गई। कंप्यूटर लैब में दस कंप्यूटर लगे हैं। स्कूल में दस एसी हैं। पुस्तकालय में 500 से ज्यादा किताबे हैं। बिजली का बिल ग्राम पंचायत? निधि से चुकाया जाता है। स्कूल में 360 बच्चे और 12 शिक्षक हैं। चालू सत्र में 100 बच्चे निजी स्कूल छोड़कर यहां आए हैं।
विज्ञापन
- शानदार मैदान, हर खेल की किट मौजूद
शिक्षा केसाथ खेल को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय में प्रत्येक खेल की किट है। बच्चों को क्त्रिस्केट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, रस्सी कूद व अन्य खेल खिलाए जाते हैं। विद्यालय के बच्चे जिलास्तर एवं प्रदेश स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग करते हैं।
विज्ञापन
- दाखिला मिलना मुश्किल
अधिकतर सरकारी स्कूलों में बच्चों की कमी रहती है, लेकिन बसंतपुर सेंथली के कंपोजिट विद्यालय में दाखिला मिलना मुश्किल है। खाली सीटों से कई गुना आवेदन यहां आते हैं। आसपास के गांव असालतनगर, शोभापुर, जलालपुर रघुनाथपुर, दुहाई, भिक्कनपुर तक के बच्चे आते हैं।
हर सुविधा स्कूल में मौजूद
हमने स्कूल को संवारने में काफी मेहनत की है। विद्यालय में किचन गार्डन से लेकर इन्वर्टर, फर्नीचर, पार्क में झूले, आरओ के पानी तक की व्यवस्था है। स्मार्ट स्कूल के बच्चे पढ़ाई में भी स्मार्ट हैं। काफी संख्या में निजी स्कूलों के बच्चे यहां प्रवेश लेते हैं।
सीमा सिंह, प्रधानाध्यापिका कंपोजिट विद्यालय बसंतपुर सेंथली