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हिंदी मीडियम फिल्म की तरह गाजियाबाद में घोटाला : गरीब बच्चों के एडमिशन कोटे पर अमीरों का डाका
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हिंदी मीडियम फिल्म की तरह गाजियाबाद में घोटाला : गरीब बच्चों के एडमिशन कोटे पर अमीरों का डाका
गाजियाबाद। जिले में आरटीई (राइट टू एजूकेशन) के तहत एडमिशन में फर्जीवाड़ा सामने आया है। आर्थिक रूप से संपन्न अभिभावकों ने फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर अपने बच्चों का आवेदन करा दिया। गरीबों की सीट पर लॉटरी के आधार पर 200 बच्चों का प्रवेश भी हो गया। स्कूलों ने एडमिशन लेने के बाद अभिभावकों के दिए पते पर जाकर सत्यापन किया तो वह फर्जी निकले। कुछ अभिभावकों केपास महंगी गाड़ियां हैं तो कुछ अभिभावक ईंट-भट्ठे के मालिक मिले हैं। 38 स्कूलों ने फर्जीवाड़ा करने वाले अभिभावकों की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपी है। विभागीय स्तर पर भी इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी निजी स्कूलों को 25 फीसदी गरीब बच्चों का निशुल्क प्रवेश लेना होता है। इसमें प्रवेश लेने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया होती है। प्रमाणपत्रों के आधार पर बच्चों का चयन किया जाता है। उसके बाद लॉटरी प्रक्रिया से बच्चों का प्रवेश होता है। स्कूल प्रवेश लेने के दौरान प्रमाणपत्र जमा करने वाले अभिभावकों के पते, आय और अन्य बिंदुओं पर जांच करते हैं, जिससे पात्र बच्चों को प्रवेश मिल सके। इस बार जिले में 5500 से अधिक अभिभावकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अपने बच्चों के एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें 4000 बच्चों को प्रवेश के लिए पात्र माना गया। उसके बाद तीन बार लॉटरी सिस्टम के माध्यम से 3109 बच्चों का एडमिशन की सूची बनाकर जिले के 175 स्कूलों को भेजी गई।
अभिभावकों ने बच्चों के एडमिशन के लिए स्कूलों में संबंधित प्रमाणपत्र जमा किए। उनके आधार पर स्कूलों ने सत्यापन कराया तो 200 अभिभावक ऐसे मिले, जिनके पते व आय प्रमाणपत्र फर्जी थे। जो मकान नंबर बताए गए, वह फर्जी थे। अभिभावकों को कॉल किया गया तो वह स्कूलों को सही जानकारी नहीं दे पाए। उसके बाद स्कूलों से संपर्क भी नहीं किया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुछ स्कूलों ने रिपोर्ट सौंपी हैं। उसमें कई अभिभावक ऐसे मिले हैं, जिनके बड़े व्यापार हैं, कुछ ईंट भट्ठा चलाते हैं तो कुछ महंगी कार में चलते हैं। जो आरटीई की पात्रता से बाहर हैं। उन्हाेंने फर्जी प्रमाण पत्र लगाए हैं।
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एडमिशन मैनेजर, जीडी गोयनका स्कूल : शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत जो एडमिशन विद्यालय को करने के लिए मिले हैं। उनकी जांच कराई गई। उसमें सात बच्चों के प्रमाणपत्र फर्जी मिले हैं। वह संबंधित स्थान पर नहीं रहते हैं। संपर्क करने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है। रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को सौंप दी है।
बीएसए : कई स्कूलों से फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर बच्चों के एडमिशन की शिकायतें मिली हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं, जो भी एडमिशन अपात्र होंगे उनको निरस्त कराया जाएगा और अभिभावकों से रिकवरी की जाएगी।
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गाजियाबाद। जिले में आरटीई (राइट टू एजूकेशन) के तहत एडमिशन में फर्जीवाड़ा सामने आया है। आर्थिक रूप से संपन्न अभिभावकों ने फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर अपने बच्चों का आवेदन करा दिया। गरीबों की सीट पर लॉटरी के आधार पर 200 बच्चों का प्रवेश भी हो गया। स्कूलों ने एडमिशन लेने के बाद अभिभावकों के दिए पते पर जाकर सत्यापन किया तो वह फर्जी निकले। कुछ अभिभावकों केपास महंगी गाड़ियां हैं तो कुछ अभिभावक ईंट-भट्ठे के मालिक मिले हैं। 38 स्कूलों ने फर्जीवाड़ा करने वाले अभिभावकों की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपी है। विभागीय स्तर पर भी इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी निजी स्कूलों को 25 फीसदी गरीब बच्चों का निशुल्क प्रवेश लेना होता है। इसमें प्रवेश लेने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया होती है। प्रमाणपत्रों के आधार पर बच्चों का चयन किया जाता है। उसके बाद लॉटरी प्रक्रिया से बच्चों का प्रवेश होता है। स्कूल प्रवेश लेने के दौरान प्रमाणपत्र जमा करने वाले अभिभावकों के पते, आय और अन्य बिंदुओं पर जांच करते हैं, जिससे पात्र बच्चों को प्रवेश मिल सके। इस बार जिले में 5500 से अधिक अभिभावकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अपने बच्चों के एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें 4000 बच्चों को प्रवेश के लिए पात्र माना गया। उसके बाद तीन बार लॉटरी सिस्टम के माध्यम से 3109 बच्चों का एडमिशन की सूची बनाकर जिले के 175 स्कूलों को भेजी गई।
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अभिभावकों ने बच्चों के एडमिशन के लिए स्कूलों में संबंधित प्रमाणपत्र जमा किए। उनके आधार पर स्कूलों ने सत्यापन कराया तो 200 अभिभावक ऐसे मिले, जिनके पते व आय प्रमाणपत्र फर्जी थे। जो मकान नंबर बताए गए, वह फर्जी थे। अभिभावकों को कॉल किया गया तो वह स्कूलों को सही जानकारी नहीं दे पाए। उसके बाद स्कूलों से संपर्क भी नहीं किया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुछ स्कूलों ने रिपोर्ट सौंपी हैं। उसमें कई अभिभावक ऐसे मिले हैं, जिनके बड़े व्यापार हैं, कुछ ईंट भट्ठा चलाते हैं तो कुछ महंगी कार में चलते हैं। जो आरटीई की पात्रता से बाहर हैं। उन्हाेंने फर्जी प्रमाण पत्र लगाए हैं।
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एडमिशन मैनेजर, जीडी गोयनका स्कूल : शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत जो एडमिशन विद्यालय को करने के लिए मिले हैं। उनकी जांच कराई गई। उसमें सात बच्चों के प्रमाणपत्र फर्जी मिले हैं। वह संबंधित स्थान पर नहीं रहते हैं। संपर्क करने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है। रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को सौंप दी है।
बीएसए : कई स्कूलों से फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर बच्चों के एडमिशन की शिकायतें मिली हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं, जो भी एडमिशन अपात्र होंगे उनको निरस्त कराया जाएगा और अभिभावकों से रिकवरी की जाएगी।