बुजुर्ग की दाढ़ी काटने का मामला: पुलिस ने ट्विटर को भेजे 26 मेल, एक का भी नहीं मिला जवाब, नहीं हटाया भड़काऊ वीडियो
ट्विटर की तरह ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप भी पुलिस के ई-मेल को नजरअंदाज करते हैं। 15 जून 2020 से 15 जून 2021 तक एक साल में इन तीनों सोशल साइट्स से जुड़े 401 मामले सामने आए हैं, लेकिन इनमें से 246 मामलों में ही पुलिस को जानकारी भेजी गई है।
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गाजियाबाद के लोनी में बुजुर्ग अब्दुल समद की दाढ़ी काटे जाने के मामले में ट्विटर पर केस दर्ज हो जाने और पुलिस की तरफ से नोटिस जारी कर दिए जाने के बावजूद भड़काऊ वीडियो को इस सोशल साइट से नहीं हटाया गया है।
यह मनमानी ट्विटर ने पहली बार नहीं की है। पिछले 12 महीनों में साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी लेने के लिए पुलिस ने ट्विटर को 26 ई-मेल किए, लेकिन जवाब एक का भी नहीं मिला। सोशल मीडिया के फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्स एप जैसे दूसरे प्लेटफार्म से जानकारी हासिल करना भी पुलिस के लिए मुश्किल ही रहा है। लेकिन देरी से ही सही इनकी ओर से ई-मेल के जवाब मिलते रहे हैं।
ट्विटर से जवाब न मिल पाने के कारण साइबर सेल अपराधी तक नहीं पहुंच पाती है। ये मामले फर्जी अकाउंट बनाकर अश्लील बातें ट्वीट करने, भड़काऊ वीडियो या फोटो ट्वीट करने के रहे। इनमें से एक भी हल नहीं हो पाया। कारण यह रहा कि पुलिस को उस शख्स की जानकारी चाहिए जिसने सबसे पहले ट्वीट किया। मांगे जाने पर भी इसकी जानकारी ट्विटर ने नहीं दी। ये 26 मामले 15 जून 2020 से 15 जून 2021 तक के हैं।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप से भी जवाब मिलना मुश्किल
ट्विटर की तरह ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप भी पुलिस के ई-मेल को नजरअंदाज करते हैं। 15 जून 2020 से 15 जून 2021 तक एक साल में इन तीनों सोशल साइट्स से जुड़े 401 मामले सामने आए हैं, लेकिन इनमें से 246 मामलों में ही पुलिस को जानकारी भेजी गई है। शेष बचे 155 मामलों में फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप ने जवाब नहीं दिया। इनकी विवेचना भी लंबित है।
रिमाइंडर देने की कोई व्यवस्था नहीं
साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ कविनगर अभय कुमार मिश्र ने बताया कि फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप से जुड़े मामलों की विवेचना में पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स को रिमाइंडर भेजने की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर किसी मामले में जवाब नहीं मिलता है तो नए सिरे से मेल भेजनी पड़ती है। उसमें यह हवाला देने का प्रावधान भी नहीं है कि संबंधित प्रकरण में पहले भी जानकारी मांगी जा चुकी है।
दो से तीन महीने लगाते हैं जवाब देने में
साइबर सेल के नोडल अधिकारी का कहना है कि एक साल में ट्विटर से 26 मामले में अकाउंट होल्डर की डिटेल व अन्य जानकारी मांगी गई, लेकिन एक भी मेल का जवाब नहीं मिला। फेसबुक, व्हॉट्सएप व इंस्टाग्राम द्वारा लगभग आधे मामलों में जवाब मिलता है, लेकिन इसके लिए भी जद्दोजहद की जाती है। फेसबुक व इंस्टाग्राम जवाब देने में 45 से 60 दिन लगाते हैं जबकि व्हॉट्सएप 60 से 90 दिन में जानकारी देता है।
कानूनी कार्रवाई पर ही तलब हो सके एमडी
भड़काऊ ट्वीट व निरंकुशता पर संज्ञान लेते हुए भारत सरकार ने ट्विटर को मिला कानूनी संरक्षण वापस ले लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून संरक्षण हटने के बाद ही ट्विटर कार्रवाई के दायरे में आया है। इसी के चलते बुजुर्ग तांत्रिक की दाढ़ी काटने के मामले में भड़काऊ वीडियो ट्रेंड होने पर ट्विटर इंडिया के एमडी को लोनी बॉर्डर थाने पर तलब किया जा सका है।
सोशल साइट भेजे गए मेल प्राप्त जवाब
फेसबुक 255 177
इंस्टाग्राम 62 41
व्हॉट्सएप 58 28
ट्विटर 26 00