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किसान महापंचायत से गूंजा युवा और भ्रष्टाचार का मुद्दाकिसान महापंचायत के मंच से गूंजा युवा और भ्रष्टाचार का मुद्दा
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मोदीनगर के भोजपुर किसान महापंचायत को संबोधित करते रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी
किसान महापंचायत के मंच से गूंजा युवा और भ्रष्टाचार का मुद्दा
गाजियाबाद। तीन कृषि कानूनों और एमएसपी पर गारंटी की मांग को लेकर राष्ट्रीय लोकदल की तरफ से महापंचायतें की जा रही है। 28 जनवरी को यूपी गेट पर राकेश टिकैत के आंसुओं और भावुक अपील के बाद रालोद अब अपना गढ़ मजबूत करने में जुटी है। अचानक से बदलते माहौल के बीच रालोद किसानों को केंद्र में रखकर युवाओं को भी साधने की कोशिशों में लगी है। यही कारण है कि खेती किसानी के साथ भ्रष्टाचार और रोजगार के मुद्दे पर भी रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लगातार खुलकर बोल रहे हैं। उनके भाषण की शुरुआत खेती से जुड़े मुद्दों से होती है लेकिन संबोधन का अंत युवाओं से जुड़े मुद्दों पर होता है।
अभी तक रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष 34 किसान मजदूर महापंचायत कर चुके हैं। इसमें से तीन महापंचायतें पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुई हैं। रालोद की वर्ष 2020 तक हुई रैलियों और अब की महापंचायतों में कई बड़े अंतर दिखाई देते हैं। बदले समीकरणों के बीच अब युवाओं को पार्टी से जोड़ने की पूरी कवायद हो रही है। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद बड़ी संख्या में जाट व युवा किसान मतदाता रालोद को छोड़कर भाजपा में चला गया था। इसी का नतीजा रहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए बड़ा गढ़ बना। 2014 के लोकसभा और 2017 के विधान सभा चुनाव में युवाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा को वोट दिया। यही भरोसा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में युवाओं ने भाजपा के प्रति जताया। नतीजा दोनों लोकसभा चुनावों में बड़े चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी को पराजय झेलनी पड़ी। अब कृषि कानूनों के विरोध में बड़ी संख्या में युवाओं की भीड़ पंचायतों में पहुंच रही है। ऐसे में रालोद की कोशिश युवाओं को साधने की है। यही कारण है कि महापंचायत में भ्रष्टाचार और रोजगार के मुद्दे पर जयंत चौधरी खुलकर केंद्र और प्रदेश की सरकार पर हल्ला बोल रहे हैं।
बृहस्पतिवार को भोजपुर की पंचायत में भी वह रोजगार के मुद्दे पर खुलकर बोले। यूपी पुलिस में भर्ती का मुद्दा भी उठाया और चुटकी लेते हुए कहा कि झूठ बोलने वाले कैसे ईमानदार हो सकते हैं। जयंत ने कहा कि यूपी पुलिस में वर्ष 2018 में 50 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई। दो साल बाद 14 हजार को नियुक्ति मिली है। बाकी को सब कुछ करने के बाद नौकरी नहीं मिली। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में 70 लाख नौकरियां पांच साल में देने का वादा किया और बीते वर्ष लॉकडाउन में कह दिया कि हमने करोड़ लोगों को रोजगार दे दिया, जिनमें कुछ श्रमिक भी है।
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स्थानीय मुद्दों से जोड़ा अपना संबोधन
रालोद उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में निजी मुद्दों को भी पुरजोर तरीके से उठाकर स्थानीय लोगों को साधने का प्रयास किया। मोदी मिल का 300 करोड़ का गन्ना बकाया गिनाया। भ्रष्टाचार का हवाला दिया तो मुरादनगर श्मशान घाट की छत गिरने, राजनगर एक्सटेंशन में बिजली विभाग के कैशियर द्वारा तीन करोड़ की चपत लगाने, दो एसएचओ पर 25-25 हजार का इनाम घोषित होने का हवाला दिया। बात यहीं तक नहीं रही, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर सभा को संबोधित करते हुुए कहा कि आठ साल पहले मोदीनगर-हापुड़ मार्ग के लिए पदयात्रा की थी, उसके बाद रोड बनी। अब सड़कें बन रही हैं लेकिन टोल कितना वसूला जा रहा है वह भी समझने की जरूरत है। साथ में इशारा भी किया कि टोल देने में स्थानीय कुछ नहीं चलेगा। आपकी जेब काटी जाएगी। जयंत ने उन सभी मुद्दों को उठाकर केंद्र और प्रदेश की सरकार को घेरा जो स्थानीय जनता से जुड़े थे। ब्यूरो
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गाजियाबाद। तीन कृषि कानूनों और एमएसपी पर गारंटी की मांग को लेकर राष्ट्रीय लोकदल की तरफ से महापंचायतें की जा रही है। 28 जनवरी को यूपी गेट पर राकेश टिकैत के आंसुओं और भावुक अपील के बाद रालोद अब अपना गढ़ मजबूत करने में जुटी है। अचानक से बदलते माहौल के बीच रालोद किसानों को केंद्र में रखकर युवाओं को भी साधने की कोशिशों में लगी है। यही कारण है कि खेती किसानी के साथ भ्रष्टाचार और रोजगार के मुद्दे पर भी रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लगातार खुलकर बोल रहे हैं। उनके भाषण की शुरुआत खेती से जुड़े मुद्दों से होती है लेकिन संबोधन का अंत युवाओं से जुड़े मुद्दों पर होता है।
अभी तक रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष 34 किसान मजदूर महापंचायत कर चुके हैं। इसमें से तीन महापंचायतें पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुई हैं। रालोद की वर्ष 2020 तक हुई रैलियों और अब की महापंचायतों में कई बड़े अंतर दिखाई देते हैं। बदले समीकरणों के बीच अब युवाओं को पार्टी से जोड़ने की पूरी कवायद हो रही है। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद बड़ी संख्या में जाट व युवा किसान मतदाता रालोद को छोड़कर भाजपा में चला गया था। इसी का नतीजा रहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए बड़ा गढ़ बना। 2014 के लोकसभा और 2017 के विधान सभा चुनाव में युवाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा को वोट दिया। यही भरोसा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में युवाओं ने भाजपा के प्रति जताया। नतीजा दोनों लोकसभा चुनावों में बड़े चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी को पराजय झेलनी पड़ी। अब कृषि कानूनों के विरोध में बड़ी संख्या में युवाओं की भीड़ पंचायतों में पहुंच रही है। ऐसे में रालोद की कोशिश युवाओं को साधने की है। यही कारण है कि महापंचायत में भ्रष्टाचार और रोजगार के मुद्दे पर जयंत चौधरी खुलकर केंद्र और प्रदेश की सरकार पर हल्ला बोल रहे हैं।
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बृहस्पतिवार को भोजपुर की पंचायत में भी वह रोजगार के मुद्दे पर खुलकर बोले। यूपी पुलिस में भर्ती का मुद्दा भी उठाया और चुटकी लेते हुए कहा कि झूठ बोलने वाले कैसे ईमानदार हो सकते हैं। जयंत ने कहा कि यूपी पुलिस में वर्ष 2018 में 50 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई। दो साल बाद 14 हजार को नियुक्ति मिली है। बाकी को सब कुछ करने के बाद नौकरी नहीं मिली। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में 70 लाख नौकरियां पांच साल में देने का वादा किया और बीते वर्ष लॉकडाउन में कह दिया कि हमने करोड़ लोगों को रोजगार दे दिया, जिनमें कुछ श्रमिक भी है।
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स्थानीय मुद्दों से जोड़ा अपना संबोधन
रालोद उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में निजी मुद्दों को भी पुरजोर तरीके से उठाकर स्थानीय लोगों को साधने का प्रयास किया। मोदी मिल का 300 करोड़ का गन्ना बकाया गिनाया। भ्रष्टाचार का हवाला दिया तो मुरादनगर श्मशान घाट की छत गिरने, राजनगर एक्सटेंशन में बिजली विभाग के कैशियर द्वारा तीन करोड़ की चपत लगाने, दो एसएचओ पर 25-25 हजार का इनाम घोषित होने का हवाला दिया। बात यहीं तक नहीं रही, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर सभा को संबोधित करते हुुए कहा कि आठ साल पहले मोदीनगर-हापुड़ मार्ग के लिए पदयात्रा की थी, उसके बाद रोड बनी। अब सड़कें बन रही हैं लेकिन टोल कितना वसूला जा रहा है वह भी समझने की जरूरत है। साथ में इशारा भी किया कि टोल देने में स्थानीय कुछ नहीं चलेगा। आपकी जेब काटी जाएगी। जयंत ने उन सभी मुद्दों को उठाकर केंद्र और प्रदेश की सरकार को घेरा जो स्थानीय जनता से जुड़े थे। ब्यूरो