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टैक्स रिटर्न में हेराफेरी पर दो हजार लोगों को नोटिस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jan 2020 11:54 PM IST
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टैक्स चोरी पर दो हजार लोगों व संस्थाओं को आयकर क ा नोटिस
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गाजियाबाद। कागजों में हेराफेरी कर खरीदी-बिक्री को कम दिखाने व टीडीएस जमा न करने वालों पर आयकर विभाग शिकंजा कसने जा रहा है। पश्चिमी यूपी के 16 जिलों में दो हजार लोगों के साथ सरकारी व गैरसरकारी संस्थाओं को नोटिस जारी किया गया है। उन्हें 15 दिन में टीडीएस जमा करने व जांच के लिए कागज मुहैया कराने को कहा गया है। उधर, चार हजार से अधिक नए नोटिस भी जारी किए जाने की तैयारी है। आयकर विभाग की टीडीएस इकाई कुछ नए मामलों की भी जांच तक रही है। ये सभी वह संस्थाएं व विभाग हैं जिन्होंने बीते वर्ष के मुकाबले अपना टर्नओवर कम दिखाया है। या फिर कागजों में हेराफेरी की है। कार्रवाई के बीच आयकर विभाग ने टीडीएस में हेराफेरी करने वाले अधिकारियों पर फौजदारी तक का मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। उधर, अब कलक्ट्रेट की ट्रेजरी, एसएसपी व नगर निकाय समेत अथॉरिटी भी आयकर विभाग के निशाने पर हैं।
चालू वित्तीय वर्ष में आयकर विभाग का टीडीएस के तौर पर 16 जिलों से 5438 करोड़ रुपया जमा करने का लक्ष्य है, जिसमें से अभी तक करीब 3800 करोड़ रुपया जमा हुआ है। अब विभाग को लगता है कि मौजूदा रिकवरी के हिसाब से लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं है। जब मामले की विस्तृत से जांच की गई तो पता चलता कि बीते वर्ष जिन संस्थाओं, फर्म व कंपनियों का 50 करोड़ तक का टर्नओवर था उन्होंने इस वर्ष अभी तक आधा भी टर्नओवर नहीं दिखाया है। जबकि उन कंपनियों व संस्थाओं की न ही श्रमशक्ति कम हुई है और नहीं उत्पादन क्षमता। पहले चरण में जांच के बाद दो हजार लोगों, संस्थाएं व विभाग निकाले गए हैं, जिन्होंने अपना टर्नओवर कम दिखाकर सीमित भुगतान किया। अब विभाग ने नोटिस जारी कर उनसे पूछा कि उन्होंने कब कितनी सामान व सेवा खरीदी और उसके बदले कितना भुगतान किया गया। हर महीने वार उसका ब्यौरा मांगा गया है। संयुक्त आयुक्त आयुक्त स्मिता सिंह ने बताया है कि प्रारंभिक जांच में देखा गया है कि संस्थाओं की किसी भी स्तर पर क्षमता कम नहीं हुई है लेकिन उसके बाद भी टीडीएस का भुगतान सीमित कर दिया गया है। नियम कहता है कि हर भुगतान पर टीडीएस काटे जाने के बाद आयकर विभाग के पास जमा होना चाहिए लेकिन विभाग काट कर अपने पास रोके बैठे रहते हैं।
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आहरण वितरण अधिकारी होंगे जिम्मेदार
आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विभागों में बैठे आहरण वितरण अधिकारी खेल कर रहे हैं। प्रति माह हर भुगतान पर टीडीएस काटा जा रहा है और उस किसी निजी बैंक खाते में जमा कराया जाता है। फिर साल के अंत में हमारे पास जमा कराया जाता है। अब 11 महीने निजी बैंक में टीडीएस का काटा गया पैसा जमा रहता है। सूत्र बताते हैं कि आयकर विभाग को आशंका है कि निजी बैंक 11 महीने के ब्याज के अतिरिक्त भी अधिकारियों को दो नंबर में कुछ पैसा देते हैं, ताकि बैंक के पास पैसा रुका रहे। इस मामले में भी आयकर विभाग जांच कर रहा है और संबंधित विभाग के आहरण वितरण अधिकारियों को जवाबदेही तय कर कार्रवाई की तैयारी में है विभाग ने स्पष्ट किया है कि आहरण वितरण अधिकारियों का मोटा खेल है, जिस पर अब फौजदारी का मुकदमा दर्ज करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
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ग्राम पंचायत तक पर अब आयकर की नजर
निकायों के साथ अब आयकर की नजर ग्राम पंचायतों तक पर भी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों में करोड़ों रुपये की खरीदी हो रही है लेकिन वहां पर टीडीएस काट कर जमा नहीं कराया जा रहा। नियम के तहत 281 का चालान ग्राम पंचायत को खर्च पर भरना चाहिए जो नहीं भरा जा रहा है।
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