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वार्ड बना आशियाना, सफाई कर्मी पालनहार
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कमलेश - वार्ड बना आशियाना संबंधित खबर के साथ
- फोटो : GHAZIABAD City
वार्ड बना आशियाना, सफाई कर्मी पालनहार
गाजियाबाद। मीनू, राजवती, कमलेश और मंदोगा। ये चार नाम हैं। इसके अलावा इनकी कोई पहचान नहीं है। पता एमएमजी अस्पताल का महिला वार्ड है। मरीज के तौर पर भर्ती ये चारों महिलाओं के लिए एमएमजी अस्पताल ही आशियाना है। याददाश्त के नाम पर सिर्फ अपना नाम बता पाती हैं। खाना खिलाने से लेकर कपड़े बदलने तक का काम स्टाफ करता है। सफाई कर्मचारी ही इनके पालनहार हैं। करीब 10 महीने से अस्पताल में भर्ती इन मरीजों को अब इलाज की नहीं सहारे की जरूरत है।
बेड नंबर एक पर भर्ती मीनू (38) को पुलिस ने आठ नवंबर 2020 को भर्ती कराया था। उस समय कमजोरी और बुखार की परेेशानी थी। इलाज कई महीने पहले बंद हो चुका है। मीनू कहां की है, कौन है, शहर में कैसे आई इसके बारे में उसे कुछ नहीं पता। सिर्फ अपना नाम बताती है। कोई कुछ भी पूछे तो वह छत निहारने लगती है। कभी-कभी वह अपने कपडे़ उतारकर फेंक देती और चादर लपेट लेती है।
बेड नंबर दो पर भर्ती कमलेश (45) आठ फरवरी से भर्ती है। जांच के दौरान मधुमेह और यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन (यूटीआई) की परेशानी पता चली। इलाज के बाद वह ठीक हो चुकी है। डायबिटीज का इलाज चल रहा है। कुछ भी पूछने पर कमलेश शांत रहती है। अपनी ही धुन में रहती है। किसी की कोई खबर नहीं।
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बेड नंबर तीन पर भर्ती मंदोगा (50) को पुलिस ने 31 जुलाई को दुर्घटना में घायल होने पर भर्ती कराया था। वह हर समय बड़बड़ाती रहती है। कोई खाने-पीने की चीजें दे दे तो खा लेती है। सुबह शाम खाना मिलने के दौरान अगर कम दिया जाए तो और भी मांग लेती है। नाम पूछने पर सिर्फ मंदोगा बोलती है। पता पूछने पर बड़बड़ाने लगती है। रात में कई बार चिल्लाती है।
सीएमएस = इन बुजुर्ग मरीजों को अब इलाज की नहीं सहारे की जरूरत है। समाज कल्याण अधिकारी को पत्र लिखा गया है। जिससे कि इन्हें किसी वृद्ध आश्रम में शिफ्ट किया जा सके।
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गाजियाबाद। मीनू, राजवती, कमलेश और मंदोगा। ये चार नाम हैं। इसके अलावा इनकी कोई पहचान नहीं है। पता एमएमजी अस्पताल का महिला वार्ड है। मरीज के तौर पर भर्ती ये चारों महिलाओं के लिए एमएमजी अस्पताल ही आशियाना है। याददाश्त के नाम पर सिर्फ अपना नाम बता पाती हैं। खाना खिलाने से लेकर कपड़े बदलने तक का काम स्टाफ करता है। सफाई कर्मचारी ही इनके पालनहार हैं। करीब 10 महीने से अस्पताल में भर्ती इन मरीजों को अब इलाज की नहीं सहारे की जरूरत है।
बेड नंबर एक पर भर्ती मीनू (38) को पुलिस ने आठ नवंबर 2020 को भर्ती कराया था। उस समय कमजोरी और बुखार की परेेशानी थी। इलाज कई महीने पहले बंद हो चुका है। मीनू कहां की है, कौन है, शहर में कैसे आई इसके बारे में उसे कुछ नहीं पता। सिर्फ अपना नाम बताती है। कोई कुछ भी पूछे तो वह छत निहारने लगती है। कभी-कभी वह अपने कपडे़ उतारकर फेंक देती और चादर लपेट लेती है।
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बेड नंबर दो पर भर्ती कमलेश (45) आठ फरवरी से भर्ती है। जांच के दौरान मधुमेह और यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन (यूटीआई) की परेशानी पता चली। इलाज के बाद वह ठीक हो चुकी है। डायबिटीज का इलाज चल रहा है। कुछ भी पूछने पर कमलेश शांत रहती है। अपनी ही धुन में रहती है। किसी की कोई खबर नहीं।
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बेड नंबर तीन पर भर्ती मंदोगा (50) को पुलिस ने 31 जुलाई को दुर्घटना में घायल होने पर भर्ती कराया था। वह हर समय बड़बड़ाती रहती है। कोई खाने-पीने की चीजें दे दे तो खा लेती है। सुबह शाम खाना मिलने के दौरान अगर कम दिया जाए तो और भी मांग लेती है। नाम पूछने पर सिर्फ मंदोगा बोलती है। पता पूछने पर बड़बड़ाने लगती है। रात में कई बार चिल्लाती है।
सीएमएस = इन बुजुर्ग मरीजों को अब इलाज की नहीं सहारे की जरूरत है। समाज कल्याण अधिकारी को पत्र लिखा गया है। जिससे कि इन्हें किसी वृद्ध आश्रम में शिफ्ट किया जा सके।