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अब साइबर ठगों के निशाने पर फास्टैग
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अब साइबर ठगों के निशाने पर फास्टैग
गाजियाबाद। वक्त बदलने के साथ-साथ साइबर ठगी का तरीका बदलता जा रहा है। ठग अब वाहनों के लिए अनिवार्य किए गए फास्टैग को निशाना बना रहे हैं। क्रेडिट और डेबिट कार्ड से रकम उड़ने के बाद अब फास्टैग वॉलेट से रुपये गायब हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी का नया तरीका सामने आने के बाद पुलिस के माथे पर बल पड़ गए है। गाजियाबाद में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
मधुबन बापूधाम थानाक्षेत्र के सूरजमल एंक्लेव संजय नगर निवासी सौरभ सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि वह अपनी गाड़ी के लिए एयरटेल पेमेंट बैंक का फास्टैग इस्तेमाल करते हैं। गत 15 मार्च की दोपहर करीब 12 बजे उनके मोबाइल पर नोटिफिकेशन आया कि उनके एयरटेल पेमेंट बैंक के वालेट से 595 रुपये कट गए हैं। ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक करने पर पता चला कि उनके वॉलेट से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल पर यह राशि काटी गई है। जबकि उनकी गाड़ी गाजियाबाद में उनके घर में मौजूद थी। इसी तरह की करीब 20 से अधिक शिकायतें पुलिस को हाल ही में प्राप्त हुई हैं।
एक ही समय पर कई फास्टैग से उड़ी रकम
हाल ही में सामने आए मामलों की जांच के दौरान सामने आया है कि कई लोगों के फास्टैग से एक ही समय पर रकम उड़ी है। ट्रांजक्शन में समय का अंतर कुछ ही मिनट का है। उनका कहना है कि यह अपने आप में हैरत की बात है जो गाड़ियां गाजियाबाद में मौजूद थीं और उनके फास्टैग से प्रदेश के दूर-दराज स्थानों से रकम कट गयी। साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि इससे साफ जाहिर है कि फास्टैग से रकम उड़ाने वाले जालसाज तकनीकी रूप से एक्सपर्ट हैं । उनके बुने जाल को भेदने के लिए कई टीमें लगी हुई हैं।
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पुलिस के पास कम आ रहे मामले
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फास्टैग से रकम कटने के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। लेकिन, अधिकांश मामलों में पीड़ित व्यक्ति उस कंपनी से संपर्क करता है, जिसका उसने फास्टैग खरीदा हुआ है। पूर्व में टोल प्लाजा पर निर्धारित शुल्क से अधिक रकम कटने के मामले सामने आए थे, जो कि वास्तविक कंपनी की कमी से होता था। लेकिन साइबर जालसाजों के इस नए ट्रेंड को भी लोग फास्टैग कंपनी की कमी के रूप में देख रहे हैं। जिसके चलते पुलिस के पास फिलहाल कम शिकायतकर्ता पहुंच रहे हैं।
वाईफाई एटीएम की तकनीक अपनाने का अंदेशा
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह से वाईफाई एटीएम के जरिए दूर से ही ट्रांजेक्शन हो जाती है। संभवत: साइबर जालसाजों ने फास्टैग वॉलेट से पैसे उड़ाने का भी कोई ऐसा ही सिस्टम तैयार कर लिया है। गाजियाबाद साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ कविनगर अभय कुमार मिश्र का कहना है कि फास्टैग से रकम कटने के मामले सामने आए हैं। इन पर काम किया जा रहा है। उच्च स्तरीय साइबर एक्सपर्ट्स की भी मदद भी ली जा रही है। व्हाट्सएप के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का जल्द पर्दाफाश किया जाएगा।
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गाजियाबाद। वक्त बदलने के साथ-साथ साइबर ठगी का तरीका बदलता जा रहा है। ठग अब वाहनों के लिए अनिवार्य किए गए फास्टैग को निशाना बना रहे हैं। क्रेडिट और डेबिट कार्ड से रकम उड़ने के बाद अब फास्टैग वॉलेट से रुपये गायब हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी का नया तरीका सामने आने के बाद पुलिस के माथे पर बल पड़ गए है। गाजियाबाद में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
मधुबन बापूधाम थानाक्षेत्र के सूरजमल एंक्लेव संजय नगर निवासी सौरभ सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि वह अपनी गाड़ी के लिए एयरटेल पेमेंट बैंक का फास्टैग इस्तेमाल करते हैं। गत 15 मार्च की दोपहर करीब 12 बजे उनके मोबाइल पर नोटिफिकेशन आया कि उनके एयरटेल पेमेंट बैंक के वालेट से 595 रुपये कट गए हैं। ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक करने पर पता चला कि उनके वॉलेट से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल पर यह राशि काटी गई है। जबकि उनकी गाड़ी गाजियाबाद में उनके घर में मौजूद थी। इसी तरह की करीब 20 से अधिक शिकायतें पुलिस को हाल ही में प्राप्त हुई हैं।
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एक ही समय पर कई फास्टैग से उड़ी रकम
हाल ही में सामने आए मामलों की जांच के दौरान सामने आया है कि कई लोगों के फास्टैग से एक ही समय पर रकम उड़ी है। ट्रांजक्शन में समय का अंतर कुछ ही मिनट का है। उनका कहना है कि यह अपने आप में हैरत की बात है जो गाड़ियां गाजियाबाद में मौजूद थीं और उनके फास्टैग से प्रदेश के दूर-दराज स्थानों से रकम कट गयी। साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि इससे साफ जाहिर है कि फास्टैग से रकम उड़ाने वाले जालसाज तकनीकी रूप से एक्सपर्ट हैं । उनके बुने जाल को भेदने के लिए कई टीमें लगी हुई हैं।
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पुलिस के पास कम आ रहे मामले
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फास्टैग से रकम कटने के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। लेकिन, अधिकांश मामलों में पीड़ित व्यक्ति उस कंपनी से संपर्क करता है, जिसका उसने फास्टैग खरीदा हुआ है। पूर्व में टोल प्लाजा पर निर्धारित शुल्क से अधिक रकम कटने के मामले सामने आए थे, जो कि वास्तविक कंपनी की कमी से होता था। लेकिन साइबर जालसाजों के इस नए ट्रेंड को भी लोग फास्टैग कंपनी की कमी के रूप में देख रहे हैं। जिसके चलते पुलिस के पास फिलहाल कम शिकायतकर्ता पहुंच रहे हैं।
वाईफाई एटीएम की तकनीक अपनाने का अंदेशा
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह से वाईफाई एटीएम के जरिए दूर से ही ट्रांजेक्शन हो जाती है। संभवत: साइबर जालसाजों ने फास्टैग वॉलेट से पैसे उड़ाने का भी कोई ऐसा ही सिस्टम तैयार कर लिया है। गाजियाबाद साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ कविनगर अभय कुमार मिश्र का कहना है कि फास्टैग से रकम कटने के मामले सामने आए हैं। इन पर काम किया जा रहा है। उच्च स्तरीय साइबर एक्सपर्ट्स की भी मदद भी ली जा रही है। व्हाट्सएप के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का जल्द पर्दाफाश किया जाएगा।