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बिना वकील किसान न दें गिरफ्तारी, जांच में भी न हों शामिल : बाजवा
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पत्रकारों को संबोधित करते किसान नेता बाजवा।
- फोटो : GHAZIABAD City
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बिना वकील किसान न दें गिरफ्तारी, जांच में भी न हों शामिल : बाजवा
साहिबाबाद। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनकारी किसानों को मिल रही नोटिस पर गाजीपुर किसान कमेटी ने सभी किसानों से अपील की है कि वह बिना वकील न तो अपनी गिरफ्तारी दें न ही जांच में शामिल हों। कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि सरकार अब दिल्ली पुलिस के जरिये तानाशाही कर रही है। किसानों के साथ-साथ वकीलों को भी नोटिस पहुंच रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि घर पर गिरफ्तारी के लिए पुलिस पहुंचे तो बिना कोई अभद्रता किए स्थानीय प्रशासन के आने तक पुलिस का घेराव कर वहीं रोके रखें। कमेटी ने रास्तों को बंद करने पर भी अधिकारियों की नीति की निंदा की।
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर बने मंच के पीछे मीडिया गैलरी में गाजीपुर किसान कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा, डीपी सिंह, बलजिंदर सिंह मान, अधिवक्ता वासु कुकरेजा और गुरदयाल सिंह ने प्रेस वार्ता की। जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि पिछले 90 दिनों से किसान एक सड़क पर बैठकर अपना आंदोलन कर रहे हैं। जबकि हाईवे की अन्य सड़कें चालू थी, लोग आसानी से आ-जा रहे थे, किसानों का कोई उद्देश्य नहीं था कि स्थानीय लोगों को परेशानी आए। मगर ढाई महीने बाद ऐसी क्या स्थिति हो गई कि अधिकारियों ने ऊपर और नीचे के सभी रास्ते बंद कर दिए। उन्होंने इसे स्थानीय लोगों को परेशान करने की अधिकारियों की नीति बताया और इसकी निंदा भी की। जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि स्थानीय लोग बंद रास्तों का विरोध करते हैं तो किसान आंदोलन से जुड़े लोग उनके समर्थन में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दिल्ली पुलिस के जरिए तानाशाही कर रही है। किसानों को डराने और धमकाने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं, उन पर झूठे मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि सरकार लोकतांत्रिक आंदोलनों में विश्वास नहीं रखती है।
उन्होंने सरकार से भी अपील की कि आंदोलन में शामिल होने वाले और किसानों का समर्थन करने वालों को परेशान करना बंद किया जाए। कमेटी के सदस्य डीपी सिंह ने आरोप लगाया कि जो सैनिक ड्यूटी से छुट्टी लेकर वापस घर आ रहे हैं उन्हें भी नोटिस में चेतावनी दी जा रही है वह किसी बॉर्डर पर आंदोलन स्थल में नहीं जाएंगे। अधिवक्ता वासु कुकरेजा ने बताया कि पंजाब से दस वकीलों की टीम गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की लड़ाई के लिए पहुंच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों पर 307, कोरोना महामारी एक्ट, आपदा प्रबंधन एक्ट समेत अन्य प्रकार धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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अब तक 1700 किसानों को नोटिस
जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि जिन भी किसानों को नोटिस आ रहे हैं वो जांच में शामिल होने या नोटिस का जवाब देने के लिए कहीं नहीं जाएंगे। सबसे पहले वह संयुक्त किसान मोर्चा के द्वारा बनाए गए वकीलों के पैनल से संपर्क करेंगे। फिर इसके बाद वकील के साथ ही किसी कार्रवाई में शामिल हो पाएंगे और संयुक्त किसान मोर्चा उनकी लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न एजेंसियों से 1700 किसानों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से 100 नोटिस गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों को पहुंच चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों से ऐसे भी लोगों को नोटिस पहुंच रहे हैं, जिनका फोन, गाड़ी या कोई सामान गाजीपुर बॉर्डर की रेंज में था।
आज यूपी गेट पर मनाएंगे युवा किसान दिवस :
गाजीपुर किसान आंदोलन कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा के मुताबिक शुक्रवार को सभी बॉर्डर पर युवा किसान दिवस मनाया जाएगा। जिसमें मंच संचालन और आंदोलन की पूरी व्यवस्था युवाओं के हाथ में होगी। साथ ही 27 फरवरी को संत रविदास जयंती व चंद्रशेखर आजाद की शहादत दिवस को मजदूर किसान एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन तमाम जगहों से मजदूर संगठनों का समर्थन आंदोलन को मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आंदोलन को गांव के घरों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
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साहिबाबाद। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनकारी किसानों को मिल रही नोटिस पर गाजीपुर किसान कमेटी ने सभी किसानों से अपील की है कि वह बिना वकील न तो अपनी गिरफ्तारी दें न ही जांच में शामिल हों। कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि सरकार अब दिल्ली पुलिस के जरिये तानाशाही कर रही है। किसानों के साथ-साथ वकीलों को भी नोटिस पहुंच रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि घर पर गिरफ्तारी के लिए पुलिस पहुंचे तो बिना कोई अभद्रता किए स्थानीय प्रशासन के आने तक पुलिस का घेराव कर वहीं रोके रखें। कमेटी ने रास्तों को बंद करने पर भी अधिकारियों की नीति की निंदा की।
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर बने मंच के पीछे मीडिया गैलरी में गाजीपुर किसान कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा, डीपी सिंह, बलजिंदर सिंह मान, अधिवक्ता वासु कुकरेजा और गुरदयाल सिंह ने प्रेस वार्ता की। जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि पिछले 90 दिनों से किसान एक सड़क पर बैठकर अपना आंदोलन कर रहे हैं। जबकि हाईवे की अन्य सड़कें चालू थी, लोग आसानी से आ-जा रहे थे, किसानों का कोई उद्देश्य नहीं था कि स्थानीय लोगों को परेशानी आए। मगर ढाई महीने बाद ऐसी क्या स्थिति हो गई कि अधिकारियों ने ऊपर और नीचे के सभी रास्ते बंद कर दिए। उन्होंने इसे स्थानीय लोगों को परेशान करने की अधिकारियों की नीति बताया और इसकी निंदा भी की। जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि स्थानीय लोग बंद रास्तों का विरोध करते हैं तो किसान आंदोलन से जुड़े लोग उनके समर्थन में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दिल्ली पुलिस के जरिए तानाशाही कर रही है। किसानों को डराने और धमकाने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं, उन पर झूठे मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि सरकार लोकतांत्रिक आंदोलनों में विश्वास नहीं रखती है।
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उन्होंने सरकार से भी अपील की कि आंदोलन में शामिल होने वाले और किसानों का समर्थन करने वालों को परेशान करना बंद किया जाए। कमेटी के सदस्य डीपी सिंह ने आरोप लगाया कि जो सैनिक ड्यूटी से छुट्टी लेकर वापस घर आ रहे हैं उन्हें भी नोटिस में चेतावनी दी जा रही है वह किसी बॉर्डर पर आंदोलन स्थल में नहीं जाएंगे। अधिवक्ता वासु कुकरेजा ने बताया कि पंजाब से दस वकीलों की टीम गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की लड़ाई के लिए पहुंच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों पर 307, कोरोना महामारी एक्ट, आपदा प्रबंधन एक्ट समेत अन्य प्रकार धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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अब तक 1700 किसानों को नोटिस
जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि जिन भी किसानों को नोटिस आ रहे हैं वो जांच में शामिल होने या नोटिस का जवाब देने के लिए कहीं नहीं जाएंगे। सबसे पहले वह संयुक्त किसान मोर्चा के द्वारा बनाए गए वकीलों के पैनल से संपर्क करेंगे। फिर इसके बाद वकील के साथ ही किसी कार्रवाई में शामिल हो पाएंगे और संयुक्त किसान मोर्चा उनकी लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न एजेंसियों से 1700 किसानों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से 100 नोटिस गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों को पहुंच चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों से ऐसे भी लोगों को नोटिस पहुंच रहे हैं, जिनका फोन, गाड़ी या कोई सामान गाजीपुर बॉर्डर की रेंज में था।
आज यूपी गेट पर मनाएंगे युवा किसान दिवस :
गाजीपुर किसान आंदोलन कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा के मुताबिक शुक्रवार को सभी बॉर्डर पर युवा किसान दिवस मनाया जाएगा। जिसमें मंच संचालन और आंदोलन की पूरी व्यवस्था युवाओं के हाथ में होगी। साथ ही 27 फरवरी को संत रविदास जयंती व चंद्रशेखर आजाद की शहादत दिवस को मजदूर किसान एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन तमाम जगहों से मजदूर संगठनों का समर्थन आंदोलन को मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आंदोलन को गांव के घरों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।