धरनास्थल पर किसानों ने मनाया पगड़ी संभाल दिवस

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Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2021 12:17 AM IST
पगड़ी संभाल दिवस मनाते किसान।
पगड़ी संभाल दिवस मनाते किसान। - फोटो : GHAZIABAD City

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धरनास्थल पर किसानों ने मनाया पगड़ी संभाल दिवस
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साहिबाबाद। यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन में मंगलवार को पगड़ी संभाल दिवस मनाया गया। इस दौरान मंच पर युवाओं ने किसान संगठन और समिति के पदाधिकारियों के सिर पर पगड़ी बांधी। किसान अलग-अलग रंग की पगड़ी में नजर आए। इस दौरान भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि किसानों को अपनी पगड़ी और आत्मसम्मान की रक्षा करने के लिए दिल्ली बॉर्डरों पर बैठना पड़ रहा है। हिंदुस्तान का किसान पगड़ी के सम्मान के लिए लड़ रहा है।
यूपी गेट पर कृषि कानूनों के विरोध और एमएसपी पर गारंटी की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। रेल रोको आंदोलन के बाद मंगलवार को यूपी गेट पर किसानों ने पगड़ी संभाल दिवस मनाया। दोपहर करीब एक बजे से दो बजे तक युवा किसानों ने किसान संगठन और समिति के पदाधिकारियों व अन्य किसानों के सिर पर पगड़ी बांधी। सबसे पहले भाकियू उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन को पगड़ी पहनाई गई। जिसके बाद सभी पदाधिकारियों ने पगड़ी बंधवाई। इस दौरान राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह और सहजानंद सरस्वती की जयंती पर उन्हें याद किया गया है। उन्होंने कहा कि सरदार अजीत सिंह ने कहा था पगड़ी संभाल जट्टा। वह उस समय की बात थी लेकिन आज जिस दौर में यह किसान आंदोलन है उस दौर में वह यह समझते हैं कि अकेला पगड़ी संभाल जट्टा नहीं बल्कि पगड़ी संभाल किसान। आज सारे किसानों को अपने पगड़ी और सम्मान की रक्षा के लिए दिल्ली के चारों तरफ बॉर्डरों पर बैठना पड़ रहा है। सरकार के द्वारा जो हठधर्मिता और एक दमनकारी तरीके से किसानों में ऐसा संदेश गया कि पूरे हिंदुस्तान का किसान चाहे वह जिस धर्म-जाति का हो, सभी एक झंडे के नीचे एकत्रित हो गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में किसानों की संख्या को कम बताया जा रहा है ऐसा नहीं है।

आंदोलनस्थल में एसी लगना कोई बड़ी बात नहीं
राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि आंदोलन में बन रहे पंडाल में एसी लगाना कोई बड़ी बात नहीं है। एग्रीक्लचर सेक्टर हिंदुस्तान की जीडीपी को बचा सकता है। एग्रीक्लचर सेक्टर पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकता है तो आंदोलन में एसी लगना बहुत छोटी बात है। गर्मी, जाड़ा या बरसात हो सब मौसम को सहने की क्षमता किसान ही रखता है। अगर संसाधन भी नहीं होंगे फिर भी यह आंदोलन मजबूती से चलेगा।
मंच के सामने पंडाल लगना हुआ शुरू
लगातार गर्मी बढ़ने और तेज धूप के चलते मंच के सामने खुले आसमान के नीचे बैठने में किसानों को परेशानी हो रही थी। यह देखते हुए कमेटी ने पंडाल लगाने का निर्णय लिया था। मंगलवार से पंडाल लगाने का काम शुरू हो गया है। लोहे के फ्रेम तैयार कर मंच के सामने लगाए जा रहे हैं। जल्द ही इसके ऊपर चिंक लगाई जाएंगी। उसको टेंट से कवर किया जाएगा। इसके साथ ही पंडाल में पंखे और कूलर की व्यवस्था की जाएगी। इस दौरान जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए संसाधनों को जुटाने के लिए कमेटी किसी प्रकार से पीछे नहीं हटेगी। आंदोलन स्थल पर जो कैंप है उन्हें घास और छप्पर से तैयार किया जा रहा है। तराई क्षेत्र में मिलने वाली घास से यह टेंट तैयार हो रहे हैं। यह व्यवस्थाएं मजबूती से करना है। वॉटर प्रूफ टेंट यहां बनेगा। यह आंदोलन लंबे समय तक चलने वाला है। व्यवस्थाएं भी उसी प्रकार सोच करके लंबे समय के लिए बनाई जा रही हैं।
समर्थन देने पहुंचीं महिलाएं
आंदोलन स्थल पर किसानों को समर्थन देने वाले लोगों का लगातार आना जारी है। मंगलवार दोपहर को काफी संख्या में महिलाएं अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के बैनर तले पहुंचीं। यहां पर महिलाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। महिलाओं का कहना है कि वह आंदोलन को अपना समर्थन देती हैं। जब तक किसानों का आंदोलन चलेगा वह यहां आकर आंदोलन को मजबूत बनाने में अपना सहयोग देती रहेंगी।

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