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कम दरों पर ठेकेदारों ने डाले टेंडर तो नगर आयुक्त करेंगे निर्माण कार्यों की जांच
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कम दरों पर ठेकेदारों ने डाले टेंडर तो नगर आयुक्त करेंगे निर्माण कार्यों की जांच
गाजियाबाद। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर आयुक्त ने निगम के सभी विभागों को निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि एस्टीमेट के 75 फीसदी से कम दरों पर काम करने वाले ठेकेदारों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच वह खुद करेंगे। ऐसे कार्यों पर अवर अभियंता, सहायक अभियंता और चीफ इंजीनियर भी नजर रखेंगे।
नगर निगम में जब से ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू हुई है तब से ठेकेदारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। हाल यह है कि किसी भी निर्माण कार्य के एस्टीमेट से 30 से 35 फीसदी कम दर पर भी ठेकेदार काम करने के लिए टेंडर डाल देते हैं। यानी एक लाख की लागत वाले काम को ठेकेदार 70 हजार में करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बाद विभागों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कमीशन में भी करीब 30 फीसदी रकम चली जाती है। ऐसे में महज 30 से 40 फीसदी पैसा ही निर्माण कार्य में लग पाता है और गुणवत्ता खराब रहती है। नगर निगम में अब ऐसे कार्यों की गुणवत्ता बढ़ा दी गई है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन खान और जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए हैं कि जिन भी निर्माण कार्यों के लिए 25 फीसदी से न्यूनतम दरों पर टेंडर डाले जाएं, उनकी सूची अलग से तैयार की जाएगी। उन कार्यों की मॉनिटरिंग वह खुद करेंगे। इन कार्यों की गुणवत्ता में खामियां पाई गईं तो क्षेत्रीय अवर अभियंता और सहायक अभियंता की जवाबदेही भी तय की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि अधिशासी अभियंता और चीफ इंजीनियर भी ऐसे कार्यों की सख्त निगरानी करेंगे। गुणवत्ता खराब पाए जाने पर ठेकेदारों की फर्मों को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
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गाजियाबाद। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए नगर आयुक्त ने निगम के सभी विभागों को निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि एस्टीमेट के 75 फीसदी से कम दरों पर काम करने वाले ठेकेदारों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच वह खुद करेंगे। ऐसे कार्यों पर अवर अभियंता, सहायक अभियंता और चीफ इंजीनियर भी नजर रखेंगे।
नगर निगम में जब से ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू हुई है तब से ठेकेदारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। हाल यह है कि किसी भी निर्माण कार्य के एस्टीमेट से 30 से 35 फीसदी कम दर पर भी ठेकेदार काम करने के लिए टेंडर डाल देते हैं। यानी एक लाख की लागत वाले काम को ठेकेदार 70 हजार में करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बाद विभागों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कमीशन में भी करीब 30 फीसदी रकम चली जाती है। ऐसे में महज 30 से 40 फीसदी पैसा ही निर्माण कार्य में लग पाता है और गुणवत्ता खराब रहती है। नगर निगम में अब ऐसे कार्यों की गुणवत्ता बढ़ा दी गई है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन खान और जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए हैं कि जिन भी निर्माण कार्यों के लिए 25 फीसदी से न्यूनतम दरों पर टेंडर डाले जाएं, उनकी सूची अलग से तैयार की जाएगी। उन कार्यों की मॉनिटरिंग वह खुद करेंगे। इन कार्यों की गुणवत्ता में खामियां पाई गईं तो क्षेत्रीय अवर अभियंता और सहायक अभियंता की जवाबदेही भी तय की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि अधिशासी अभियंता और चीफ इंजीनियर भी ऐसे कार्यों की सख्त निगरानी करेंगे। गुणवत्ता खराब पाए जाने पर ठेकेदारों की फर्मों को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
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