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नगरायुक्त व जीडीए वीसी समिति 15 अफसरों पर भ्रष्टाचार का वादा दायर
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नगरायुक्त व जीडीए वीसी समेत 15 अफसरों पर भ्रष्टाचार का वाद दायर
गाजियाबाद। नगरायुक्त व जीडीए वीसी समेत 15 पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप में विशेष जज ( भ्रष्टाचार निवारण) द्वितीय मेरठ की अदालत में वाद दायर किया है। अदालत ने गाजियाबाद पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। आरोप कि अवैध निर्माण कराकर करोड़ों रुपए की बंदरबांट की गई। अब अदालत में 20 जुलाई को सुनवाई होगी।
राजनगर एक्सटेंशन की एससीसी हाइट्स सोसायटी निवासी पूजा रंजन अखिल भारतीय उपभोक्ता परिषद की कार्यकारिणी सदस्य हैं। अदालत में दायर वाद में उनका कहना है कि प्रदेश सरकार (यूनाइटेड प्रोविंएंसिस) ने 20 मार्च 1941 को मैसर्स मॉलको लिमिटेड दिल्ली को साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास 64 एकड़ भूमि आवंटित की थी। इस जमीन में कंपनी ने ग्लास वूल व सिरेमिक उत्पाद की इकाई लगाई। गांव पसौंडा, झंडापुर और जगौला की जमीन अधिग्रहण करने के बाद यूनाइटेड प्रोविएंसिस व कंपनी के बीच हुए एग्रीमेंट में शर्त थी कि कंपनी उक्त भूमि का प्रयोग केवल औद्योगिक प्रयोजन में ही करेगी।
एक के बाद एक नई कंपनी को बेची जमीन
12 दिसंबर 1944 में मैसर्स मॉल्को लिमिटेड का नाम बदल कर मैसर्स कैपिटल ग्लास वर्क्स लिमिटेड कर दिया।
एक जून 1949 को कैपिटल ग्लास वर्क्स लिमिटेड ने उक्त भूमि निर्मित बिल्डिंग सहित मैसर्स दिल्ली ग्लास वर्क्स लिमिटेड को बेच दी। बिक्री का अनुबन्ध एक नवंबर 1950 को यूपी सरकार व कम्पनी के बीच हुआ और ग्लास प्रोडक्ट का उत्पादन शुरू कर दिया गया। 13 जून 1956 को दिल्ली ग्लास वर्क्स लिमिटेड ने कंपनी की जमीन और बिल्डिंग दो अलग-अलग सेल डीड के अतंर्गत मैसर्स भगवती ग्लास वर्क्स लिमिटेड को बेच दी। 22 जून 1968 को मैसर्स भगवती ग्लास वर्क्स लिमिटेड का नाम बदलकर मैसर्स दुर्गा एंटरप्राइजेज प्रालि. कर दिया गया और तत्कालीन तहसीलदार ने अभियुक्त दुर्गा एंटरप्राइजेज लिमिटेड का नाम दस्तावेजों में भी दर्ज कर दिया गया। सात सितंबर 1991 को उक्त भूमि सरकारी सम्पत्ति घोषित कर दी गई। जिसके विरुद्ध कंपनी प्रबंधकों ने हाइकोर्ट में रिट डाली, जिस पर कोर्ट ने जिला प्रशासन को जमीन में कोई दखलंदाजी न करने का आदेश दिया।
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कोर्ट की अवमानना कर उपयोग में ली जमीन
पूजा रंजन का आरोप है कि मैसर्स दुर्गा एन्टरप्राईजेज ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और जमीन के 50 हजार वर्ग मीटर भू-भाग को रिहायशी उपयोग के लिए अनाधिकृत रूप से बेचना शुरू कर दिया। जमीन पर अपार्टमेंट और रिहायशी भवन बनाकर मोटा लाभ कमाया जाने लगा, जबकि नियम अनुसार जमीन का प्रयोग औद्योगिक ही रहना था।
जीडीए ने निर्माण नहीं रुकवाया
जीडीए के अधिकारियों ने 29 जून 2017 को जेई के माध्यम से साहिबाबाद थाने में धारा 188 के तहत एक एफआईआर दर्ज करा दी, लेकिन जमीन पर खरीद-फरोख्त और अवैध निर्माण को बंद नहीं कराया। वर्तमान में भी वहां अवैध भवनों का निर्माण तेजी से हो रहा है। जमीन पर दो टावर बन चुके हैं। इनमें बने फ्लैटों को लगभग 40 लाख रुपये प्रति फ्लैट तथा प्लाट 60 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है।
इन 15 अफसरों के खिलाफ वाद
कोर्ट में दायर किए वाद में नगरायुक्त दिनेश चंद्र, जीडीए वीसी कंचन वर्मा, औद्योगिक विकास प्राधिकरण की सहायक महाप्रबंधक स्मिता सिंह, नगर नियोजक जीडीए आशीष शिवपुरी, जीडीए सचिव संतोष कुमार राय, जीडीए बोर्ड सदस्य सचिन डागर, आसिफ खान, हिमांशु मित्तल, नगर अभियंता जोन-7 राजेश शर्मा व सीपी शर्मा, तत्कालीन सीओ साहिबाबाद डा. राकेश कुमार, एसएचओ साहिबाबाद अनिल कुमार शाही, राजेंद्र नगर चौकी इंचार्ज राजेंद्र कुमार, दुर्गा एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अंकुर अग्रवाल, औद्योगिक विकास विभाग के सचिव, प्रमुख सचिव व अनुसचिव को नामजद आरोपी बनाया है।
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गाजियाबाद। नगरायुक्त व जीडीए वीसी समेत 15 पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप में विशेष जज ( भ्रष्टाचार निवारण) द्वितीय मेरठ की अदालत में वाद दायर किया है। अदालत ने गाजियाबाद पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। आरोप कि अवैध निर्माण कराकर करोड़ों रुपए की बंदरबांट की गई। अब अदालत में 20 जुलाई को सुनवाई होगी।
राजनगर एक्सटेंशन की एससीसी हाइट्स सोसायटी निवासी पूजा रंजन अखिल भारतीय उपभोक्ता परिषद की कार्यकारिणी सदस्य हैं। अदालत में दायर वाद में उनका कहना है कि प्रदेश सरकार (यूनाइटेड प्रोविंएंसिस) ने 20 मार्च 1941 को मैसर्स मॉलको लिमिटेड दिल्ली को साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास 64 एकड़ भूमि आवंटित की थी। इस जमीन में कंपनी ने ग्लास वूल व सिरेमिक उत्पाद की इकाई लगाई। गांव पसौंडा, झंडापुर और जगौला की जमीन अधिग्रहण करने के बाद यूनाइटेड प्रोविएंसिस व कंपनी के बीच हुए एग्रीमेंट में शर्त थी कि कंपनी उक्त भूमि का प्रयोग केवल औद्योगिक प्रयोजन में ही करेगी।
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एक के बाद एक नई कंपनी को बेची जमीन
12 दिसंबर 1944 में मैसर्स मॉल्को लिमिटेड का नाम बदल कर मैसर्स कैपिटल ग्लास वर्क्स लिमिटेड कर दिया।
एक जून 1949 को कैपिटल ग्लास वर्क्स लिमिटेड ने उक्त भूमि निर्मित बिल्डिंग सहित मैसर्स दिल्ली ग्लास वर्क्स लिमिटेड को बेच दी। बिक्री का अनुबन्ध एक नवंबर 1950 को यूपी सरकार व कम्पनी के बीच हुआ और ग्लास प्रोडक्ट का उत्पादन शुरू कर दिया गया। 13 जून 1956 को दिल्ली ग्लास वर्क्स लिमिटेड ने कंपनी की जमीन और बिल्डिंग दो अलग-अलग सेल डीड के अतंर्गत मैसर्स भगवती ग्लास वर्क्स लिमिटेड को बेच दी। 22 जून 1968 को मैसर्स भगवती ग्लास वर्क्स लिमिटेड का नाम बदलकर मैसर्स दुर्गा एंटरप्राइजेज प्रालि. कर दिया गया और तत्कालीन तहसीलदार ने अभियुक्त दुर्गा एंटरप्राइजेज लिमिटेड का नाम दस्तावेजों में भी दर्ज कर दिया गया। सात सितंबर 1991 को उक्त भूमि सरकारी सम्पत्ति घोषित कर दी गई। जिसके विरुद्ध कंपनी प्रबंधकों ने हाइकोर्ट में रिट डाली, जिस पर कोर्ट ने जिला प्रशासन को जमीन में कोई दखलंदाजी न करने का आदेश दिया।
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कोर्ट की अवमानना कर उपयोग में ली जमीन
पूजा रंजन का आरोप है कि मैसर्स दुर्गा एन्टरप्राईजेज ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और जमीन के 50 हजार वर्ग मीटर भू-भाग को रिहायशी उपयोग के लिए अनाधिकृत रूप से बेचना शुरू कर दिया। जमीन पर अपार्टमेंट और रिहायशी भवन बनाकर मोटा लाभ कमाया जाने लगा, जबकि नियम अनुसार जमीन का प्रयोग औद्योगिक ही रहना था।
जीडीए ने निर्माण नहीं रुकवाया
जीडीए के अधिकारियों ने 29 जून 2017 को जेई के माध्यम से साहिबाबाद थाने में धारा 188 के तहत एक एफआईआर दर्ज करा दी, लेकिन जमीन पर खरीद-फरोख्त और अवैध निर्माण को बंद नहीं कराया। वर्तमान में भी वहां अवैध भवनों का निर्माण तेजी से हो रहा है। जमीन पर दो टावर बन चुके हैं। इनमें बने फ्लैटों को लगभग 40 लाख रुपये प्रति फ्लैट तथा प्लाट 60 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से बेचा जा रहा है।
इन 15 अफसरों के खिलाफ वाद
कोर्ट में दायर किए वाद में नगरायुक्त दिनेश चंद्र, जीडीए वीसी कंचन वर्मा, औद्योगिक विकास प्राधिकरण की सहायक महाप्रबंधक स्मिता सिंह, नगर नियोजक जीडीए आशीष शिवपुरी, जीडीए सचिव संतोष कुमार राय, जीडीए बोर्ड सदस्य सचिन डागर, आसिफ खान, हिमांशु मित्तल, नगर अभियंता जोन-7 राजेश शर्मा व सीपी शर्मा, तत्कालीन सीओ साहिबाबाद डा. राकेश कुमार, एसएचओ साहिबाबाद अनिल कुमार शाही, राजेंद्र नगर चौकी इंचार्ज राजेंद्र कुमार, दुर्गा एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अंकुर अग्रवाल, औद्योगिक विकास विभाग के सचिव, प्रमुख सचिव व अनुसचिव को नामजद आरोपी बनाया है।