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गाजियाबाद : ब्रेन ट्यूमर की नवीनतम सर्जरी ने 40 वर्षीय रोगी को दिया नया जीवन

Fri, 24 Dec 2021 01:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 24 Dec 2021 01:44 AM IST
सार

यह सर्जरी बालाजी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ अभिनव गुप्ता ने की।

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Ghaziabad: Latest brain tumor surgery gives new life to 40 year old patient
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

चिकित्सा इतिहास में अपनी तरह की पहली घटना में, बालाजी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल राजेंद्र नगर ग़ाज़ियाबाद के ब्रेन स्टूडियो में अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रही 40 वर्षीय महिला की अत्यधिक जटिल मस्तिष्क सर्जरी की गई। यह सर्जरी बालाजी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ अभिनव गुप्ता ने की।

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ऑपरेशन पर अधिक प्रकाश डालते हुए, डॉ अभिनव गुप्ता ने कहा कि ब्रेन स्टूडियो अपनी तरह का एक, अत्यधिक उन्नत ऑपरेशन थियेटर है जिसमें कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन और इमेज गाइडेड सर्जिकल नेविगेशन दोनों की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे हमें मस्तिष्क का स्पष्ट विंव मिलता है और हम वास्तव में देख सकते हैं कि सर्जरी के दौरान हम मस्तिष्क के किस हिस्से में हैं। इसके अलावा, सर्जरी के दौरान किसी भी समय सीटी स्कैन किया जा सकता है ताकि बचे हुए ट्यूमर की स्पष्ट तस्वीर मिल सके। सर्जन तब प्रभावित क्षेत्र में फिर से जा सकता है और सर्जरी जारी रख सकता है।”
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प्रारंभ में, एक स्टीरियोटैक्टिक बायोप्सी, जिसे स्टीरियोटैक्टिक कोर बायोप्सी के रूप में भी जाना जाता है, मस्तिष्क के क्षतिग्रस्त भाग को उस स्थान तक सीमित रखने के लिए किया गया था। इसे ब्रेन स्टूडियो में ही डॉ गुप्ता ने किया था। 40 वर्षीय श्रीमति नीलम गर्ग* ने बताया, “मेरा परिवार मुझे बायोप्सी कराने के लिए अखिल भारतीय चिकित्सा संस्थान (एम्स) ले गया, लेकिन वहां बायप्सी न हो सकी। यह हमारे लिए एक मुश्किल दौर था, क्यंकि मेरी हालत बिगड़ती जा रही थी। तब हमें बलाजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के ब्रेन स्टुडियो के बारे में पता चला, जहां मेरे जैसी जानलेवा मस्तिष्क स्थितियों के उपचार के लिए अत्याधुनिक और उन्नत उपकरण उपलब्ध हैं। हमने उनसे संपर्क किया और डॉ गुप्ता और उनकी टीम के विशेषज्ञों ने तुरंत मेराउपचार शुरू कर दिया।”
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चूंकि श्रीमती नीलम की छाती की रिपोर्ट खराब थी, इसलिए जनरल एनेस्थीसिया दैकर उनका ऑपरेशन करना असंभव था। डॉ. गुप्ता ने उन्हें बिना बेहोश करे ही ब्रेन स्टुडियो में उनका उपचार करने का निर्णय लिया, सचेत अवस्था में ही उनकी स्टीरियोटैक्टिक बायोप्सी करने का निर्णय लिया गया। स्टीरियोटैक्टिक फ्रेम को सिर पर लगाया गया और ऑपरेशन थिएटर में इंट्राऑपरेटिव सीटी स्कैन किया गया था। एक्स वाई जेड अक्ष में सीटी निर्देशांक के साथ क्षतिग्रस्त भाग को तीन आयामों में स्थानीयकृत किया गया था। खोपड़ी में एक छोटा सा छेद किया गया और मरीज के होश में रहते हुए ही बायोप्सी की गई। फिर उस स्थान को साफ कर के मरहम पट्टी कर दी गई।

डॉ. अभिनव गुप्ता आगे विस्तार से बताते हुए कहा, "चिकित्सा विज्ञान का चमत्कार देखिए  कि मरीज पूरे समय हमसे बात कर रही थी, जब हम उसके मस्तिष्क को ऑपरेट कर रहे थे। मस्तिष्क की एक बड़ी सर्जरी के तुरंत बाद भी वह अपने कमरे में वापस जाने के लिए फिट थी और सर्जरी के ठीक एक घंटे बाद हल्का खाना खा रही थी।”


श्रीमती नीलम को सर्जरी के अगले ही दिन छुट्टी दे दी गई। बायोप्सी रिपोर्ट की प्रतीक्षा है जिसके आधार पर ही आगे के उपचार की दिशा तय की जाएगी।

श्रीमती नीलम की आंखों में खुशी के आंसु थे, उन्होंने बताया, "इस उपचार ने मुझे एक नया जीवन दिया है और अब मैं काम और घर पर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए स्वस्थ तरीके से अपना जीवन जीने की आशा कर सकती हूं।"

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