गाजियाबाद: हीमोफिलीया के मरीजों को नहीं मिल रहा फैक्टर, काटने पड़ते हैं अस्पतालों के कई चक्कर
हीमोफीलिया के 35 से चालीस मरीजों में किसी को पंद्रह तो किसी को बीस दिन में जरूरत पड़ती है।
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कोरोना संक्रमण काल में हीमोफीलिया के मरीजों के लिए कष्टकारी साबित हो रहा है। क्योंकि पिछले पंद्रह दिन से अस्पताल में मरीजों को चढ़ाया जाने वाला फैक्टर मौजूद नहीं है। इससे मरीजों को नोएडा और दिल्ली के अस्पतालों में चक्कर काटना पड़ता है। वहीं जिले में यहां के अलावा हापुड़, बुलंदशहर, नोएडा, बागपत, दिल्ली और हरियाणा से भी मरीज आते थे। जिले में 35 से चालीस मरीजों को फैक्टर चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
क्या होती है हीमोफीलिया की बीमार
ब्लड में फैक्टर-8 की कमी होने पर हीमोफीलिया ए व फैक्टर-9 की कमी होने पर हीमोफीलिया बी बीमारी होती है। इस वजह से मरीज के शरीर के किसी हिस्से में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव होने लगता है। आंतरिक रक्तस्राव होने पर यह जमकर ट्यूमर का रूप ले लेता है। रक्तस्राव को रोकने के लिए हीमोफीलिया ए से पीड़ित मरीज को हर सप्ताह फैक्टर-8 के तीन इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। वहीं हीमोफीलिया बी होने पर हर सप्ताह फैक्टर-9 के दो इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। इस बीमारी का मुख्य इलाज फैक्टर-8 व नौ का इंजेक्शन ही है। लंबे समय तक इलाज चलने से कई मरीजों में इस इंजेक्शन का असर बंद हो जाता है।
लड़कों को ज्यादा होती है बीमारी
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र आनंद ने बताया कि हीमोफीलिया बीमारी लड़कों में ज्यादा पाई जाती है। हर 10 हजार में एक पुरुष को यह बीमारी होती है। चोट लगने पर स्थिति गंभीर हो जाती है, क्योंकि चोट लगने पर खून का बहना बंद नहीं होता है। इससे मरीज की मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि हीमोफीलिया अनुवांशिक बीमारी है। रक्त में विशेष प्रोटीन की कमी होती है, जिसे क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है। यह रक्त को जमाकर उसका बहना रोकता है। इससे मरीज में खून का थक्का जमाने वाला प्रोटीन फैक्टर नहीं बनता। इसकी वजह से चोट लगने पर लगातार खून बहता रहता है।
हीमोफीलिया के लक्षण
चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना, शरीर के किसी भी भाग पर बार-बार नीले चकते पड़ना, सूजन के स्थान पर गर्माहट और चिनचिनाहट होना, मसूड़ों या जीभ में चोट लगने पर लंबे समय तक खून रिसना, शरीर के जोड़ों, घुटनों, एड़ी, पेशाब के साथ खून आना आदि लक्षण हैं।
दिल्ली व नोएडा का चक्कर लगाने को मजबूर मरीज
हीमोफीलिया मरीजों के लिए काम करने वाले वकील सागर शर्मा ने कहा कि जरूरतमंद मरीजों को हर 15 दिन पर फैक्टर-7 का इंजेक्शन लगाना जरूरी होता है। इस इंजेक्शन के उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को नोएडा व दिल्ली का चक्कर काटना पड़ता है। गाजियाबाद में ऐसे करीब 35 मरीज हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं।
मेरा 12 साल का बेटा हीमोफीलिया से ग्रसित है। उसे फैक्टर चढ़ाने की अचानक किसी भी समय जरूरत पड़ती है। पंद्रह दिन पहले रात में बेटे को जरूरत पड़ी तो एमएमजी अस्पताल में मना कर दिया गया। इसके बाद नोएडा अस्पताल में गया, वहां भी नहीं मिला तो दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में रात ढाई बजे पहुंचा, वहां पर फैक्टर चढ़ाया गया। इस मामले में कई बार शिकायत भी कर चुका हूं। इसके बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होता है।- किशन लाल, नंदग्राम
मैं स्वयं हीमोफीलिया से ग्रसित हूं। मुझे हमेशा फैक्टर आठ की जरूरत पड़ती है। पिछले बीस साल से जरूरत पड़ रही है लेकिन एमएमजी अस्पताल में जब भी जाओ यह कहकर मना कर दिया जाता है कि फैक्टर नहीं है। वापस दिल्ली या नोएडा जाना पड़ता है। कई बार स्टाफ फैक्टर होने के बावजूद नहीं लगाता है। सबसे अधिक परेशानी इस लॉकडाउन में मुझे हुई। क्योंकि दो बार रात में सवारी ढूंढने में भी परेशानी आई।- सौरभ, खोड़ा
अस्पताल में फैक्टर देने में बहुत अनियमितता की जाती है। नोएडा में एक एनजीओ संचालिका के माध्यम से ब्लड बैंक का स्टाफ फैक्टर देने में लापरवाही करता है। इसकी विस्तृत शिकायत मुख्यमंत्री से की गई है।- सागर शर्मा, अधिवक्ता
जब तक फैक्टर मौजूद रहता है, जो भी मरीज चढ़वाने के लिए आता है उसे चढ़ाया जाता है। अस्पताल में फैक्टर देने में कोई अनियमितता नहीं हुई है। इस समय फैक्टर समाप्त है। शासन में डिमांड भेज दी गई। फैक्टर आते ही चढ़ना शुरू हो जाएगा।- डॉ. अनुराग भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक