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Ghaziabad News: करोड़ों की मशीनें प्रिंटर, किट ना होने से पड़ी बेकार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 02 Mar 2023 07:30 AM IST
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ghaziabad
प्रिंटर और किट ना होने से करोड़ों की मशीनें बेकार
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गाजियाबाद। कोरोना महामारी के दौरान संयुक्त जिला अस्पताल में दो पोर्टेबल एक्सरे मशीन आई थीं। जो महज प्रिंटर ना होने के कारण धूल फांक रही हैं। ऐसे ही कोरोना के दौरान टीबी और कोरोना की जांच करने के लिए शासन ने नौ ट्रू नेट मशीनें भेजी थी, जिसकी किट सप्लाई ना होने के कारण वह बंद पड़ी है। लाखों की लिफ्ट एक टेक्नीशियन की तैनाती ना होने की वजह से आज तक संचालित नहीं हो सकी है।
32 लाख के पोर्टेबल एक्सरे मशीनें फांक रहीं धूल
शासन ने कोरोना महामारी के दौरान मरीजों की जांच के लिए दो पोर्टेबल एक्सरे मशीन संयुक्त जिला अस्पताल के लिए भेजी थी, लेकिन शासन की तरफ से उसके लिए प्रिंटर नहीं भेजा गया। दोनों मशीनों की कीमत लगभग 32 हजार है। प्रिंटर ना होने की वजह से रिपोर्ट नहीं दी जा पाती इसलिए यह मशीन धूल फांक रही है। प्रदेश भर में अन्य आठ अस्पतालों में भी यह एक्सरे मशीनें भेजी गई हैं, लेकिन कहीं प्रिंटर नहीं मिला है। सीएमएस ने बताया कि अस्पताल में दो बड़ी एक्सरे मशीनें हैं। प्रिंटर ना होने की वजह से इन मशीनों का इस्तेमाल नहीं होता।
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12 लाख की लिफ्ट, टेक्नीशियन की तैनाती के इंतजार में
संयुक्त जिला अस्पताल में ही वर्ष 2016 में लगाई गई लिफ्ट छह वर्ष बाद भी नहीं चल पाई। नेशनल हेल्थ मिशन के बजट से लगे इस लिफ्ट के लिए टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो पाई इसलिए आज तक यह लिफ्ट एक दिन के लिए भी संचालित नहीं हो सकी। जबकि संयुक्त जिला अस्पताल में दूसरे तल पर फिजियोथेरेपी, पैथोलॉजी, नेत्र रोग और दंत रोग विभाग के अलावा ऑपरेशन के बाद भर्ती होने वाले मरीजों सहित गंभीर बीमारियों के मरीज भर्ती होते हैं। गर्भवती महिलाओं को खून के सैंपल देने के लिए भी सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडे ने बताया कि लिफ्ट में अगर कोई फंस गया या कोई हादसा होे गया तो बिना टेक्नीशियन के संभालना मुश्किल हो जाएगा।
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साढ़े चार करोड़ की मशीनें 750 रुपये की किट ना होने से बेकार
50-50 लाख की लागत से नौ केंद्रों पर लगी साढ़े चार करोड़ की ट्रूनेट मशीनें 750 रुपये की किट ना होने की वजह से बंद पड़ी हैं। जिन केंद्रों पर ट्रूनेट मशीनें आईं थी उन केंद्रों से पोस्ट के जरिये सैंपल भेज कर टीबी की जांच कराई जा रही है, जिसमें प्रति सैंपल 40 से लेकर 60 रुपये तक का खर्च आता है। नौ केंद्रों पर 2021 में यह मशीनें लगाई गईं थीं। इससे टीबी और कोरोना की जांच दोनों हो जाती है। बम्हैटा, डासना, खोड़ा, विजयनगर, पसौंडा, साहिबाबाद, भोजपुर, फरीदनगर, मोदीनगर, एमएमजी स्थित टीबी क्लीनिक पर यह मशीनें बंद पड़ी हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. डीएम सक्सेना ने बताया कि शासन से किट सप्लाई नहीं हो पा रही है।
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