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Ghaziabad News: असम व मेघालय के सिम से ठगी कर रहे जालसाज
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असम व मेघालय के सिम से ठगी कर रहे जालसाज
राहुल सिंघल
गाजियाबाद। साइबर अपराधी ठगी के लिए नार्थ ईस्ट (पूर्वोत्तर) क्षेत्र के सिम का इस्तेमाल कर एनसीआर के लोगों से ठगी कर रहे हैं। इस साल हुई ठगी के मामलों में साइबर सेल ने जांच की तो पता चला करीब 40 फीसदी मामलों में असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड के सिम कार्ड से ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया है। शातिर लोगों को रुपये का लालच देकर उनकी आईडी खरीद रहे हैं।
साइबर अपराधी नार्थ ईस्ट के सिम से अधिकांश चाइनीज एप के जरिये ऋण देने और सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बनाकर युवाओं को शादी करने झांसा देकर ठगी कर रहे हैं। ये गिरोह दिल्ली व आसपास के अलग-अलग इलाकों में बैठकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा केवाईसी और परिचित बनकर ठगी करने के मामलों में राजस्थान के अलवर व झुनझूनु, मथुरा, दिल्ली के सिम का इस्तेमाल हो रहा है।
एसीपी क्राइम भास्कर वर्मा का कहना है कि साइबर सेल में आईं शिकायतों की जांच में यह बात सामने आई है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों के सिम का इस्तेमाल करीब 40 फीसदी मामलों में किया गया है। शेष मामले अलग-अलग क्षेत्रों के हैं। ये सिम लोगों को लालच देकर खरीदे गए हैं या अन्य किसी कार्यों में इस्तेमाल करने के नाम पर लिए गए हैं।
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पश्चिम बंगाल और बिहार के लोगों के खाते किराये पर ले रहे
ठगी की रकम पश्चिम बंगाल और बिहार के लोगों के नाम पर खुले अलग-अलग बैंक के खातों में डलवाई जा रही है। साइबर सेल को जांच में पता चला कि साइबर अपराधी लोगों को रुपये का लालच देकर उनके दस्तावेज लेकर खाते खुलवा रहे हैं या उनसे ही खाते खुलवाकर 15 से 20 हजार रुपये में बैंक खातों को किराये पर ले रहे हैं।
केवाईसी की जरूरत नहीं होने का उठा रहे फायदा
कई निजी बैंकों में बचत खातों में दो लाख तक के लेनदेन में केवाईसी कराने की जरूरत नहीं होती। इसकी जानकारी साइबर अपराधियों को भी है जो इसका फायदा उठा रहे हैं। शातिर गरीब लोगों को रुपये का लालच देकर खाते ले रहे हैं जिसमें लेनदेन करते हैं अगर पुलिस या बैंक की ओर से खाते को बंद करा दिया जाता है तो शातिर दूसरा खाता इस्तेमाल करने लगते हैं।
साइबर अपराध
(अब तक)
क्रेडिट/डेबिट कार्ड 1490
ऋण व पॉलिसी 620
केवाईसी 1090
ओएलएक्स 205
नौकरी 235
लकी विनर 130
फेसबुक 425
इंस्टाग्राम 296
व्हाट्सएप 406
ट्विटर 51
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राहुल सिंघल
गाजियाबाद। साइबर अपराधी ठगी के लिए नार्थ ईस्ट (पूर्वोत्तर) क्षेत्र के सिम का इस्तेमाल कर एनसीआर के लोगों से ठगी कर रहे हैं। इस साल हुई ठगी के मामलों में साइबर सेल ने जांच की तो पता चला करीब 40 फीसदी मामलों में असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड के सिम कार्ड से ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया है। शातिर लोगों को रुपये का लालच देकर उनकी आईडी खरीद रहे हैं।
साइबर अपराधी नार्थ ईस्ट के सिम से अधिकांश चाइनीज एप के जरिये ऋण देने और सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बनाकर युवाओं को शादी करने झांसा देकर ठगी कर रहे हैं। ये गिरोह दिल्ली व आसपास के अलग-अलग इलाकों में बैठकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा केवाईसी और परिचित बनकर ठगी करने के मामलों में राजस्थान के अलवर व झुनझूनु, मथुरा, दिल्ली के सिम का इस्तेमाल हो रहा है।
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एसीपी क्राइम भास्कर वर्मा का कहना है कि साइबर सेल में आईं शिकायतों की जांच में यह बात सामने आई है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों के सिम का इस्तेमाल करीब 40 फीसदी मामलों में किया गया है। शेष मामले अलग-अलग क्षेत्रों के हैं। ये सिम लोगों को लालच देकर खरीदे गए हैं या अन्य किसी कार्यों में इस्तेमाल करने के नाम पर लिए गए हैं।
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पश्चिम बंगाल और बिहार के लोगों के खाते किराये पर ले रहे
ठगी की रकम पश्चिम बंगाल और बिहार के लोगों के नाम पर खुले अलग-अलग बैंक के खातों में डलवाई जा रही है। साइबर सेल को जांच में पता चला कि साइबर अपराधी लोगों को रुपये का लालच देकर उनके दस्तावेज लेकर खाते खुलवा रहे हैं या उनसे ही खाते खुलवाकर 15 से 20 हजार रुपये में बैंक खातों को किराये पर ले रहे हैं।
केवाईसी की जरूरत नहीं होने का उठा रहे फायदा
कई निजी बैंकों में बचत खातों में दो लाख तक के लेनदेन में केवाईसी कराने की जरूरत नहीं होती। इसकी जानकारी साइबर अपराधियों को भी है जो इसका फायदा उठा रहे हैं। शातिर गरीब लोगों को रुपये का लालच देकर खाते ले रहे हैं जिसमें लेनदेन करते हैं अगर पुलिस या बैंक की ओर से खाते को बंद करा दिया जाता है तो शातिर दूसरा खाता इस्तेमाल करने लगते हैं।
साइबर अपराध
(अब तक)
क्रेडिट/डेबिट कार्ड 1490
ऋण व पॉलिसी 620
केवाईसी 1090
ओएलएक्स 205
नौकरी 235
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