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Ghaziabad News: बयान से पलटने पर अदालत से बरी हो रहे दुष्कर्म के आरोपी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 10 Dec 2022 07:00 AM IST
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बयान से पलटने पर अदालत से बरी हो रहे दुष्कर्म के आरोपी
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गाजियाबाद। दुष्कर्म के मुकदमों में गवाह के मुकरने (पक्षद्रोही) से आरोपियों को सजा नहीं मिल पा रही है। इस वर्ष जनवरी से अब तक निस्तारित हुए 169 मामलों में सिर्फ 17.75 फीसदी (30 केस) दोषियों को ही सजा मिल पाई है। 82.25 फीसदी मामलों में गवाह के बयान से मुकरने का लाभ आरोपियों को मिला और 139 आरोपी सजा से बच गए। बरी हुए नौ अलग-अलग मामलों में आरोपी और किशोरी की शादी हो चुकी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि अलग-अलग थाना क्षेत्रों में नौ ऐसे भी मामले आए थे, जिसमें पहले मां-बाप ने किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए निवास क्षेत्र के संबंधित थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन मुकदमे के दौरान किशोरी के बालिग होेने पर आरोपी से शादी कर दी गई। इसके बाद अभियोजन पक्ष के सभी गवाह मुकर गए। इस कारण से साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिए गए।
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पाक्सो कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक उत्कर्ष वत्स का कहना है कि पक्षकारों के अदालत के बाहर समझौता करने या सुनवाई के दौरान गवाहों के पलट जाने के कारण अदालत आरोपी को बरी कर देती है। अधिकांश ऐसे मामलों में गवाह मुकर जाते हैं, अदालत ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के तहत कार्यवाही का आदेश देती है।
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बयान पर अडिग रहने पर दोषी को मिलती है सजा
वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार चौहान का कहना है कि किसी भी मामले में पुलिस चार्जशीट पेश करती है। इस दौरान पुलिस अभियोजन से बयान दर्ज करती है लेकिन अदालत में न्यायाधीश के सामने जो बयान दर्ज होता है, उसे ही प्रमुख माना जाता है। जिस मामले में अभियोजन अपने पूर्व के बयान पर अडिग रह कर न्यायाधीश के सामने वही बयान दर्ज कराती है, उस पर आरोपी को 100 फीसदी सजा मिलती है।

अदालत के लिए बयान और साक्ष्य अहम
संयुक्त निदेशक (अभियोजन) अनिल कुमार उपाध्याय का कहना है कि अदालत के चार पाक्सो कोर्ट में इस समय 1932 केसों पर सुनवाई चल रही है। चारों अदालतों में शासन की तरफ से विशेष लोक अभियोजक नियुक्त हैं लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष के बयान से मुकर जाते हैं।
पाक्सो कोर्ट में विचाराधीन कुल मामले - 1932
जनवरी से दिसंबर तक निस्तारित - 169
सजा हुई - 30
रिहा हुए - 139
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