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दर्द से छटपटाती रही बच्ची...नहीं मिला इलाज
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दर्द से छटपटाती रही बच्ची...नहीं मिला इलाज
गाजियाबाद। विजयनगर में कुत्ते के काटने से गंभीर रूप से घायल एक साल की बच्ची रिया को चाइल्ड पीजीआई नोएडा में भी इलाज नहीं मिला। दर्द से छटपटाती बच्ची को परिजन गाजियाबाद से नोएडा लेकर पहुंचे तो वहां चिकित्सक नहीं होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया। रविवार को मीडिया में खबर आने के बाद उसका इलाज एमएमएच में शुरू हुआ।
शनिवार दोपहर विजयनगर के सिद्धार्थ विहार निवासी सतपाल की एक साल की बेटी घर के बाहर मां के पास खेल रही थी तभी आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया और उसके चेहरे से मांस नोच लिया। सतपाल लहूलुहान हालत में बच्ची को लेकर जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उसे नोएडा चाइल्ड पीजीआई रेफर कर दिया। सतपाल ने बताया कि एंबुलेंस से वह नोएडा पहुंचा, यहां भी बच्ची एडमिट करने से मना कर दिया गया। वह गिड़गिड़ाता रहा लेकिन डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। सतपाल ने बताया कि पीजीआई में डॉक्टरों बच्ची को देखने से इनकार कर दिया और कहा कि न दवाई है न डॉक्टर हैं, इसलिए सोमवार को लेकर आओ। उसने बच्ची को दिल्ली के जीटीबी या किसी और अस्पताल में रेफ र किए जाने के लिए कहा लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इससे भी इनकार कर दिया। लगभग दो घंटे तक सतपाल चाइल्ड पीजीआई में डॉक्टरों से बच्ची का उपचार करने की गुहार लगाता रहा लेकिन इलाज नहीं मिला। मजबूरी में वह बच्ची को लेकर बहरामपुर में निजी डॉक्टर के पास पहुंचा, जहां निजी डॉक्टर ने बच्ची को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया और कुछ दवाएं देकर घर भेज दिया।
रेफर करने के बाद भर्ती करने का नियम
डॉ. नितिन प्रियदर्शी ने प्राथमिक उपचार के बाद एएलएस एंबुलेंस से चाइल्ड पीजीआई के लिए रेफर कर दिया था। एएलएस से भेजने के बावजूद पीजीआई में भर्ती नहीं किया, जबकि नियमत: एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस से मरीज रेफर होने पर उसे भर्ती करना पड़ता है।
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प्लास्टिक सर्जरी में बताया चार लाख का खर्च
सतपाल ने बताया कि बहरामपुर में निजी चिकित्सक के पास इलाज कराने ले गए, वहां पर प्लास्टि सर्जरी और इलाज का खर्च चार से पांच लाख बताया गया। इसके बाद रविवार को उसे दोबारा एमएमजी अस्पताल ले आए। डॉ. नितिन का कहना है कि बच्ची को दिल्ली या मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाएगा। टांके लगाने से बच्ची का चेहरे पर दाग आ जाएगा इसलिए सर्जरी जरूरी है। सतपाल का कहना है कि वह मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन पोषण कर रहा है उसके लिए इतने पैसे का इंतजाम करना मुश्किल है।
बयान
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन नहीं है। दिल्ली के जीटीबी और मेरठ के एलएलआरएम अस्पताल में संपर्क किया जा रहा है। यदि वहां के प्लास्टिक सर्जन बच्ची को भेजने के लिए कहते हैं तो बच्ची को रेफ र कर दिया जाएगा, जिससे बच्ची को उचित उपचार मिल सके। तब तक बच्ची को अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज किया जाएगा।
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गाजियाबाद। विजयनगर में कुत्ते के काटने से गंभीर रूप से घायल एक साल की बच्ची रिया को चाइल्ड पीजीआई नोएडा में भी इलाज नहीं मिला। दर्द से छटपटाती बच्ची को परिजन गाजियाबाद से नोएडा लेकर पहुंचे तो वहां चिकित्सक नहीं होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया। रविवार को मीडिया में खबर आने के बाद उसका इलाज एमएमएच में शुरू हुआ।
शनिवार दोपहर विजयनगर के सिद्धार्थ विहार निवासी सतपाल की एक साल की बेटी घर के बाहर मां के पास खेल रही थी तभी आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया और उसके चेहरे से मांस नोच लिया। सतपाल लहूलुहान हालत में बच्ची को लेकर जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उसे नोएडा चाइल्ड पीजीआई रेफर कर दिया। सतपाल ने बताया कि एंबुलेंस से वह नोएडा पहुंचा, यहां भी बच्ची एडमिट करने से मना कर दिया गया। वह गिड़गिड़ाता रहा लेकिन डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। सतपाल ने बताया कि पीजीआई में डॉक्टरों बच्ची को देखने से इनकार कर दिया और कहा कि न दवाई है न डॉक्टर हैं, इसलिए सोमवार को लेकर आओ। उसने बच्ची को दिल्ली के जीटीबी या किसी और अस्पताल में रेफ र किए जाने के लिए कहा लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इससे भी इनकार कर दिया। लगभग दो घंटे तक सतपाल चाइल्ड पीजीआई में डॉक्टरों से बच्ची का उपचार करने की गुहार लगाता रहा लेकिन इलाज नहीं मिला। मजबूरी में वह बच्ची को लेकर बहरामपुर में निजी डॉक्टर के पास पहुंचा, जहां निजी डॉक्टर ने बच्ची को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया और कुछ दवाएं देकर घर भेज दिया।
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रेफर करने के बाद भर्ती करने का नियम
डॉ. नितिन प्रियदर्शी ने प्राथमिक उपचार के बाद एएलएस एंबुलेंस से चाइल्ड पीजीआई के लिए रेफर कर दिया था। एएलएस से भेजने के बावजूद पीजीआई में भर्ती नहीं किया, जबकि नियमत: एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस से मरीज रेफर होने पर उसे भर्ती करना पड़ता है।
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प्लास्टिक सर्जरी में बताया चार लाख का खर्च
सतपाल ने बताया कि बहरामपुर में निजी चिकित्सक के पास इलाज कराने ले गए, वहां पर प्लास्टि सर्जरी और इलाज का खर्च चार से पांच लाख बताया गया। इसके बाद रविवार को उसे दोबारा एमएमजी अस्पताल ले आए। डॉ. नितिन का कहना है कि बच्ची को दिल्ली या मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाएगा। टांके लगाने से बच्ची का चेहरे पर दाग आ जाएगा इसलिए सर्जरी जरूरी है। सतपाल का कहना है कि वह मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन पोषण कर रहा है उसके लिए इतने पैसे का इंतजाम करना मुश्किल है।
बयान
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन नहीं है। दिल्ली के जीटीबी और मेरठ के एलएलआरएम अस्पताल में संपर्क किया जा रहा है। यदि वहां के प्लास्टिक सर्जन बच्ची को भेजने के लिए कहते हैं तो बच्ची को रेफ र कर दिया जाएगा, जिससे बच्ची को उचित उपचार मिल सके। तब तक बच्ची को अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज किया जाएगा।