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मिठाई के लिए वनस्पति घी और पाउडर से बनाया जा रहा मावा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 21 Oct 2022 01:06 AM IST
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मिठाई के लिए वनस्पति घी और पाउडर से बनाया जा रहा मावा
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गाजियाबाद। त्योहारों के इस सीजन में मिठाइयां खाएं, लेकिन संभलकर। मावे की बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए वनस्पति घी और मिल्क पाउडर को मिलाकर इसे तैयार किया जा रहा है। पाउडर से बने इस मावे में वसा की मात्रा को बढ़ाने के लिए रिफाइंड तेल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अप्रैल से अब तक लिए गए मावे के 100 से ज्यादा सैंपल लेकर जांच कराई गई, इनमें से 60 फीसदी नमूने फेल पाए गए।
मोदीनगर के कलछीना और आसपास के क्षेत्र में संचालित भट्ठियों पर मावा तैयार कर न सिर्फ गाजियाबाद बल्कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी सप्लाई किया जा रहा है। गांवों में भट्ठियां लगीं होने से खरीदारों को शुद्धता के भ्रम में फंसाने में यह लोग आसानी से सफल हो जाते हैं। बुधवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने कलछीना में छापामारी की तो वनस्पति घी और पाउडर से बनाए जा रहे इस खेल का पर्दाफाश हुआ। अधिकारियों ने पाउडर से बनाया गया 400 किलोग्राम मावा नष्ट कराकर उसे बाजार में पहुंचने से रोक लिया। ऐसा खेल मोदीनगर के भोजपुर क्षेत्र में और लोनी में भी चल रहा है। यहां से इस मिलावटी और सेहत के लिए नुकसानदायक मावे को बाजारों में खपाया जा रहा है। ऐसे में दीपावली पर मिठाइयों का स्वाद लेना है तो बिना मावे वाली मिठाइयों का चयन करना बेहतर हो सकता है।
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कई अन्य पदार्थ भी मिलाते हैं मावे में
मावे में न सिर्फ मिल्क पाउडर और वनस्पति घी, बल्कि स्टार्च, आलू, टेलकम पाउडर और चॉक भी मिलाई जाती है। इससे मावे पर चमक और बढ़ जाती है और बाजार में वह अच्छे दामों पर बिक जाता है, लेकिन यह मावा सेहत के लिए और भी ज्यादा खतरनाक है।
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यह हो सकती है समस्याएं
सीनियर फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन का कहना है कि मिलावटी मावा या मिठाइयां खाने से पेट की बीमारियां हो सकती हैं। उल्टी, दस्त, फूड प्वाइजनिंग की समस्या हो सकती है। इसके अलावा लिवर और किडनी पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

कलछीना में वनस्पति घी और मिल्क पाउडर से मावा बनता हुआ मिला था। इसकी वजह से उसे नष्ट करा दिया गया। छह महीने में जांच के लिए भेजे गए मावे के नमूनों में से करीब 60 फीसदी फेल मिले हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थों को बाजार में पहुंचने के लिए भट्ठियों पर जाकर भी जांच की जा रही है।
- विनीत कुमार, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
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