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पंजीकरण कराए बिना किराये पर दी संपत्ति, 70 भवन मालिकों पर दर्ज होगा केस
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पंजीकरण कराए बिना किराये पर दी संपत्ति, 70 भवन मालिकों पर दर्ज होगा केस
गाजियाबाद। व्यावसायिक संपत्तियों को किरायानामा पंजीकृत कराए बिना किराये पर देना भारी पड़ सकता है। स्टांप विभाग ने नियमों को दरकिनार कर किराये पर दी गई संपत्तियों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। 38 दिन में स्टांप विभाग ने मेरठ रोड और आसपास के 104 ऐसे ही भवनों को चिह्नित कर मालिकों को नोटिस जारी किया है। इनमें से 70 भवन मालिकों पर स्टांप विभाग में केस दर्ज किया जाएगा।
मेरठ रोड पर ऑटोमोबाइल और घरेलू सामान के रिटेल शोरूम किराये पर संचालित हैं। इनके लिए संपत्ति मालिक हर महीने लाखों रुपये किराया वसूल रहे हैं। स्टांप विभाग के नियमों के मुताबिक ऐसी संपत्तियों का किरायानामा पंजीकृत कराया जाना अनिवार्य है। किराये के रूप में सालाना मिलने वाली रकम पर चार फीसदी स्टांप शुल्क पंजीकरण के दौरान जमा कराना होता है। स्टांप विभाग ने सर्वे कराया तो खुलासा हुआ कि बिना पंजीकरण कराए संपत्तियों को किराये पर दी गई हैं। स्टांप विभाग ने अगस्त माह में 70 और सितंबर में अब तक 34 संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। स्टांप विभाग के सहायक महानिरीक्षक केके मिश्रा ने बताया कि 104 संपत्ति मालिकों में से 30 से नोटिस का जवाब देकर पंजीकरण कराने के लिए समय मांगा है। 70 लोगों का अभी तक जवाब भी नहीं मिला है। इनके खिलाफ स्टांप वाद दायर कर कार्रवाई की जाएगी।
चार करोड़ रुपये का घाटा पहुंचाया
एआईजी स्टांप केके मिश्रा ने बताया कि संपत्तियों का किरायानामा पंजीकरण न कराए जाने की वजह से स्टांप विभाग को करीब चार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि जिन संपत्ति मालिकों के खिलाफ वाद दायर किया जाएगा, उन पर जुर्माने का भी प्रावधान है।
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गाजियाबाद। व्यावसायिक संपत्तियों को किरायानामा पंजीकृत कराए बिना किराये पर देना भारी पड़ सकता है। स्टांप विभाग ने नियमों को दरकिनार कर किराये पर दी गई संपत्तियों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। 38 दिन में स्टांप विभाग ने मेरठ रोड और आसपास के 104 ऐसे ही भवनों को चिह्नित कर मालिकों को नोटिस जारी किया है। इनमें से 70 भवन मालिकों पर स्टांप विभाग में केस दर्ज किया जाएगा।
मेरठ रोड पर ऑटोमोबाइल और घरेलू सामान के रिटेल शोरूम किराये पर संचालित हैं। इनके लिए संपत्ति मालिक हर महीने लाखों रुपये किराया वसूल रहे हैं। स्टांप विभाग के नियमों के मुताबिक ऐसी संपत्तियों का किरायानामा पंजीकृत कराया जाना अनिवार्य है। किराये के रूप में सालाना मिलने वाली रकम पर चार फीसदी स्टांप शुल्क पंजीकरण के दौरान जमा कराना होता है। स्टांप विभाग ने सर्वे कराया तो खुलासा हुआ कि बिना पंजीकरण कराए संपत्तियों को किराये पर दी गई हैं। स्टांप विभाग ने अगस्त माह में 70 और सितंबर में अब तक 34 संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। स्टांप विभाग के सहायक महानिरीक्षक केके मिश्रा ने बताया कि 104 संपत्ति मालिकों में से 30 से नोटिस का जवाब देकर पंजीकरण कराने के लिए समय मांगा है। 70 लोगों का अभी तक जवाब भी नहीं मिला है। इनके खिलाफ स्टांप वाद दायर कर कार्रवाई की जाएगी।
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चार करोड़ रुपये का घाटा पहुंचाया
एआईजी स्टांप केके मिश्रा ने बताया कि संपत्तियों का किरायानामा पंजीकरण न कराए जाने की वजह से स्टांप विभाग को करीब चार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि जिन संपत्ति मालिकों के खिलाफ वाद दायर किया जाएगा, उन पर जुर्माने का भी प्रावधान है।
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