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मुश्किलों से जूझकर सफलता की पहली सीढ़ी की पार
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मुश्किलों से जूझकर सफलता की पहली सीढ़ी की पार
गाजियाबाद। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में टॉपर्स की सूची में नाम बनाने वाले अधिकांश मेधावियों ने मुश्किलों और खराब पारिवारिक स्थिति से जूझकर सफलता प्राप्त की हैं। हाईस्कूल में टॉप तीन में जगह बनाने वाली सेकेंड टॉपर अनामिका व खुशी के साथ थर्ड टॉपर मिल्ली के पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए परिवार ने जहां कई मुश्किल झेली। दूसरी ओर परिवार को गर्व का अहसास दिलाने के उद्देश्य से मेधावी विद्यार्थी मुकाम हासिल करने में जुटे हुए हैं।
हाईस्कूल सेकेंड टॉपर: खुशी
मजदूर पिता के सपने को पूरा करने में जुटी खुशी
मुरादनगर के महाजनान कॉलोनी में रहने वाली खुशी ने परिवार की आर्थिक दिक्कतों को झेलते हुए मुकाम हासिल किया है। खुशी के पिता खराद की मशीन पर मजदूरी कर घर चलाते हैं। परिवार में बेटी खुशी के साथ पत्नी गीता, बेटी काजल और बेटा दीपांश हैं। माता-पिता का सपना है कि खुशी सरकारी शिक्षक बनें, जिससे वह अपने भाई-बहनों को आगे की शिक्षा दिला सकें। खुशी ने बताया कि रोजाना छह घंटे पढ़ती थी। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी। पढ़ाई से जुड़ी कोई समस्या होने पर यूट्यूब पर देखकर समझा। इतना ही नहीं सप्ताह में एक दिन अपनी सहेलियों के साथ खुद का टेस्ट लेती थी। खुशी को पढ़ने, साइकिल चलाने, नृत्य व गाने का शौक है। खुशी ने सफलता के लिए बताया कि सेल्फ स्टडी करनी चाहिए, अधिक न पढ़कर रोजाना मन से छह से सात घंटे पढ़ें, कमजोर विषय पर अधिक ध्यान देें। हर सप्ताह खुद का टेस्ट लें।
हाईस्कूल सेकेंड टॉपर: अनामिका
एक कमरे में रहता है परिवार, पिता करते हैं मजदूरी
हाईस्कूल में सेकेंड टॉपर अनामिका ने आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की है। नंदग्राम में चार बहनों, एक भाई के साथ माता-पिता एक कमरे में रहते हैं। उनके पिता विक्रमादित्य सिसौदिया दिहाड़ी मजदूर और मां ममता गृहणी हैं। अनामिका के घर में काई मेज कुर्सी नहीं हैं। ऐसे में वह जमीन पर बैठकर दो रात तक पढ़ाई करती हैं। कई घंटे बिजली कटौती होेने पर पढ़ाई के लिए सिर्फ मोमबत्ती की रोशनी सहारा है। वह स्कूल से आने के बाद घर के काम में हाथ बंटाती हैं। पढ़ाई का मुख्य समय सब के सोने के बाद होता है। कोविड केदौरान ऑनलाइन क्लास बंद होने उन्होंने स्कूल के शिक्षकों व अन्य लोगों से फोन पर मदद लेकर संशय दूर किए। अनामिका का सपना आईएएस बन माता-पिता का नाम रोशन करना है।
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हाईस्कूल थर्ड टॉपर: मिल्ली
मां की जिद से मिल्ली को मिला शिक्षा का हक
आठवीं पास मां सुमन की जिद से हाईस्कूल थर्ड टॉपर मिल्ली को शिक्षा का हक मिल सका। मिल्ली के पिता राजेश कुमार अशिक्षित हैं। वह घर में ही राखी बनाकर दिल्ली सदरबाजार में बेचने के साथ घर चलाने के लिए मजदूरी भी करते हैं। मिल्ली के अलावा तीन भाई बहन सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। आर्थिक तंगी के कारण एक समय पिता ने बेटी की पढ़ाई को बंद करने का फैसला लिया था। ऐसे में मां की जिद के आगे पिता को फैसला बदलना पड़ा। मिल्ली घर में राखी बनाने में मदद करने के साथ घर के कामों में भी अपनी मां का हाथ बंटाती हैं। कोविड में स्कूल बंद होने के बाद उन्होंने बगैर ट्यूशन के घर पर पढ़ाई को जारी रखा। मिली रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ती हैं। मिल्ली की मां का सपना बेटी को आईएएस अफसर बनते हुए देखना है।
इंटर सेकेंड टॉपर: काजल बघेल
डॉक्टर बनना है काजल का सपना
खोड़ा के वंदना एंक्लेव में किराए के मकान में रहने वाली काजल बघेल का सपना डॉक्टर बनने का है। काजल ने रोजाना आठ घंटे पढ़ाई केसाथ सोशल मीडिया से पूरी तरह किनारा किया। मोबाइल का इस्तेमाल केवल पढ़ाई संबंधी दिक्कतों के समाधान पाने के लिए किया। उनके पिता मुनीश बघेल नोएडा की डीएस ग्रुप कंपनी में एडमिन विभाग में कार्यरत हैं। काजल ने सभी विषयों में वरीयता के साथ जीव विज्ञान में 100 अंक प्राप्त किए। काजल ने रिवीजन को सफलता का आधार बताया। विज्ञान वर्ग के तीनों विषयों का क्रैश कोर्स भी किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षक व माता पिता को दिया। छोटे भाई प्रियांशु बघेल ने हाईस्कूल में 84.66 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल टॉप किया है।
इंटर थर्ड टॉपर: सुहानी
सोशल मीडिया को बनाया हथियार, डॉक्टर बनने की ख्वाहिश
लोनी के शिव विहार पावी कॉलोनी निवासी सुहानी ने इंटर 88 फीसदी अंक प्राप्त कर जनपद में तीसरा स्थान पाया। एक ओर जहां पढ़ाई में व्यवधान मानकर विद्यार्थी सोशल मीडिया से किनारा कर रहे हैं लेकिन सुहानी ने सोशल मीडिया को ही पढ़ाई के लिए हथियार बनाया। यू-ट्यूब वीडियो की मदद से विभिन्न टॉपिक की पढ़ाई की। कहीं दिक्कत आने पर शिक्षकों के अलावा बड़े भाई विवेक, संदीप, अंकित के साथ बहन कंचन ने मदद की। उनके पिता हरिशंकर पंडित हैं। मां संजना देवी गृहणी हैं। सुहानी का सपना डॉक्टर बनने का है। उन्होंने स्कूल शिक्षकों, परिवार को प्रोत्साहन और नियमित स्कूल जाने को सफलता का आधार बनाया।
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गाजियाबाद। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में टॉपर्स की सूची में नाम बनाने वाले अधिकांश मेधावियों ने मुश्किलों और खराब पारिवारिक स्थिति से जूझकर सफलता प्राप्त की हैं। हाईस्कूल में टॉप तीन में जगह बनाने वाली सेकेंड टॉपर अनामिका व खुशी के साथ थर्ड टॉपर मिल्ली के पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए परिवार ने जहां कई मुश्किल झेली। दूसरी ओर परिवार को गर्व का अहसास दिलाने के उद्देश्य से मेधावी विद्यार्थी मुकाम हासिल करने में जुटे हुए हैं।
हाईस्कूल सेकेंड टॉपर: खुशी
मजदूर पिता के सपने को पूरा करने में जुटी खुशी
मुरादनगर के महाजनान कॉलोनी में रहने वाली खुशी ने परिवार की आर्थिक दिक्कतों को झेलते हुए मुकाम हासिल किया है। खुशी के पिता खराद की मशीन पर मजदूरी कर घर चलाते हैं। परिवार में बेटी खुशी के साथ पत्नी गीता, बेटी काजल और बेटा दीपांश हैं। माता-पिता का सपना है कि खुशी सरकारी शिक्षक बनें, जिससे वह अपने भाई-बहनों को आगे की शिक्षा दिला सकें। खुशी ने बताया कि रोजाना छह घंटे पढ़ती थी। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी। पढ़ाई से जुड़ी कोई समस्या होने पर यूट्यूब पर देखकर समझा। इतना ही नहीं सप्ताह में एक दिन अपनी सहेलियों के साथ खुद का टेस्ट लेती थी। खुशी को पढ़ने, साइकिल चलाने, नृत्य व गाने का शौक है। खुशी ने सफलता के लिए बताया कि सेल्फ स्टडी करनी चाहिए, अधिक न पढ़कर रोजाना मन से छह से सात घंटे पढ़ें, कमजोर विषय पर अधिक ध्यान देें। हर सप्ताह खुद का टेस्ट लें।
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हाईस्कूल सेकेंड टॉपर: अनामिका
एक कमरे में रहता है परिवार, पिता करते हैं मजदूरी
हाईस्कूल में सेकेंड टॉपर अनामिका ने आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की है। नंदग्राम में चार बहनों, एक भाई के साथ माता-पिता एक कमरे में रहते हैं। उनके पिता विक्रमादित्य सिसौदिया दिहाड़ी मजदूर और मां ममता गृहणी हैं। अनामिका के घर में काई मेज कुर्सी नहीं हैं। ऐसे में वह जमीन पर बैठकर दो रात तक पढ़ाई करती हैं। कई घंटे बिजली कटौती होेने पर पढ़ाई के लिए सिर्फ मोमबत्ती की रोशनी सहारा है। वह स्कूल से आने के बाद घर के काम में हाथ बंटाती हैं। पढ़ाई का मुख्य समय सब के सोने के बाद होता है। कोविड केदौरान ऑनलाइन क्लास बंद होने उन्होंने स्कूल के शिक्षकों व अन्य लोगों से फोन पर मदद लेकर संशय दूर किए। अनामिका का सपना आईएएस बन माता-पिता का नाम रोशन करना है।
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हाईस्कूल थर्ड टॉपर: मिल्ली
मां की जिद से मिल्ली को मिला शिक्षा का हक
आठवीं पास मां सुमन की जिद से हाईस्कूल थर्ड टॉपर मिल्ली को शिक्षा का हक मिल सका। मिल्ली के पिता राजेश कुमार अशिक्षित हैं। वह घर में ही राखी बनाकर दिल्ली सदरबाजार में बेचने के साथ घर चलाने के लिए मजदूरी भी करते हैं। मिल्ली के अलावा तीन भाई बहन सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। आर्थिक तंगी के कारण एक समय पिता ने बेटी की पढ़ाई को बंद करने का फैसला लिया था। ऐसे में मां की जिद के आगे पिता को फैसला बदलना पड़ा। मिल्ली घर में राखी बनाने में मदद करने के साथ घर के कामों में भी अपनी मां का हाथ बंटाती हैं। कोविड में स्कूल बंद होने के बाद उन्होंने बगैर ट्यूशन के घर पर पढ़ाई को जारी रखा। मिली रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ती हैं। मिल्ली की मां का सपना बेटी को आईएएस अफसर बनते हुए देखना है।
इंटर सेकेंड टॉपर: काजल बघेल
डॉक्टर बनना है काजल का सपना
खोड़ा के वंदना एंक्लेव में किराए के मकान में रहने वाली काजल बघेल का सपना डॉक्टर बनने का है। काजल ने रोजाना आठ घंटे पढ़ाई केसाथ सोशल मीडिया से पूरी तरह किनारा किया। मोबाइल का इस्तेमाल केवल पढ़ाई संबंधी दिक्कतों के समाधान पाने के लिए किया। उनके पिता मुनीश बघेल नोएडा की डीएस ग्रुप कंपनी में एडमिन विभाग में कार्यरत हैं। काजल ने सभी विषयों में वरीयता के साथ जीव विज्ञान में 100 अंक प्राप्त किए। काजल ने रिवीजन को सफलता का आधार बताया। विज्ञान वर्ग के तीनों विषयों का क्रैश कोर्स भी किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षक व माता पिता को दिया। छोटे भाई प्रियांशु बघेल ने हाईस्कूल में 84.66 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल टॉप किया है।
इंटर थर्ड टॉपर: सुहानी
सोशल मीडिया को बनाया हथियार, डॉक्टर बनने की ख्वाहिश
लोनी के शिव विहार पावी कॉलोनी निवासी सुहानी ने इंटर 88 फीसदी अंक प्राप्त कर जनपद में तीसरा स्थान पाया। एक ओर जहां पढ़ाई में व्यवधान मानकर विद्यार्थी सोशल मीडिया से किनारा कर रहे हैं लेकिन सुहानी ने सोशल मीडिया को ही पढ़ाई के लिए हथियार बनाया। यू-ट्यूब वीडियो की मदद से विभिन्न टॉपिक की पढ़ाई की। कहीं दिक्कत आने पर शिक्षकों के अलावा बड़े भाई विवेक, संदीप, अंकित के साथ बहन कंचन ने मदद की। उनके पिता हरिशंकर पंडित हैं। मां संजना देवी गृहणी हैं। सुहानी का सपना डॉक्टर बनने का है। उन्होंने स्कूल शिक्षकों, परिवार को प्रोत्साहन और नियमित स्कूल जाने को सफलता का आधार बनाया।