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निठारी कांड में बयान से मुकरने पर मृतका का पिता दोषी
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निठारी कांड में बयान से मुकरने पर मृतका का पिता दोषी
गाजियाबाद। निठारी कांड में पहली रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में बयान से मुकरने वाले मृतका के पिता को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोषी माना है। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। उसकी सजा पर फैसला 31 मई को होगा। युवती से दुष्कर्म और हत्या के मामले में मोनिंदर पंढेर बरी हो चुका है, जबकि सुरेंद्र कोली को सीबीआई कोर्ट सजा-ए-मौत की सजा सुना चुकी है।
अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि मृतका के पिता ने छह जुलाई 2007 को सीबीआई कोर्ट में बयान दिया गया था कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने मेरे सामने सभी हत्या का जुर्म कबूल किया था। मेरे सामने ही पंढेर और सुरेंद्र कोली ने हत्या में इस्तेमाल आरी बरामद कराई थी। बाद में नंदलाल ने अपने बयान बदल दिए और कहा पंढेर ने ना तो मेरे सामने आरी बरामद कर आई और ना ही हत्या का जुर्म कबूल किया था। पहले वाला बयान अपने अधिवक्ता खालिद खान के कहने पर दिया था। इसके बाद तत्कालीन विशेष न्यायाधीश सीबीआई रमा जैन ने परिवाद दर्ज करा दिया था। हाई कोर्ट इलाहाबाद में इस मामले को तीन महीने में निपटाने का निर्णय दिया था। नौ मई को बहस पूरी हो गई थी। मृतका के पिता ने रिवीजन की अर्जी जिला जज की अदालत में लगाई थी। जिला जज जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अर्जी खारिज करते हुए 24 मई को निर्णय के लिए तिथि नियत कर दी थी। शुक्रवार को एसीजेएम कोर्ट संख्या-3 रवि शंकर गुप्ता ने मृतका के पिता को दोषी माना।
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गाजियाबाद। निठारी कांड में पहली रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में बयान से मुकरने वाले मृतका के पिता को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोषी माना है। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। उसकी सजा पर फैसला 31 मई को होगा। युवती से दुष्कर्म और हत्या के मामले में मोनिंदर पंढेर बरी हो चुका है, जबकि सुरेंद्र कोली को सीबीआई कोर्ट सजा-ए-मौत की सजा सुना चुकी है।
अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि मृतका के पिता ने छह जुलाई 2007 को सीबीआई कोर्ट में बयान दिया गया था कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने मेरे सामने सभी हत्या का जुर्म कबूल किया था। मेरे सामने ही पंढेर और सुरेंद्र कोली ने हत्या में इस्तेमाल आरी बरामद कराई थी। बाद में नंदलाल ने अपने बयान बदल दिए और कहा पंढेर ने ना तो मेरे सामने आरी बरामद कर आई और ना ही हत्या का जुर्म कबूल किया था। पहले वाला बयान अपने अधिवक्ता खालिद खान के कहने पर दिया था। इसके बाद तत्कालीन विशेष न्यायाधीश सीबीआई रमा जैन ने परिवाद दर्ज करा दिया था। हाई कोर्ट इलाहाबाद में इस मामले को तीन महीने में निपटाने का निर्णय दिया था। नौ मई को बहस पूरी हो गई थी। मृतका के पिता ने रिवीजन की अर्जी जिला जज की अदालत में लगाई थी। जिला जज जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अर्जी खारिज करते हुए 24 मई को निर्णय के लिए तिथि नियत कर दी थी। शुक्रवार को एसीजेएम कोर्ट संख्या-3 रवि शंकर गुप्ता ने मृतका के पिता को दोषी माना।
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