{"_id":"62893dbf5d19de07fa21d91d","slug":"ghaziabad-ghaziabad-news-gbd238790987","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव से पहले100 वार्डों में 60 करोड़ के विकास कार्य कराएगा नगर निगम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनाव से पहले100 वार्डों में 60 करोड़ के विकास कार्य कराएगा नगर निगम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनाव से पहले100 वार्डों में 60 करोड़ के विकास कार्य कराएगा नगर निगम
गाजियाबाद। निकाय चुनाव से पहले नगर निगम शहर के 100 वार्डों में 60 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराएगा। प्रत्येक वार्ड में 60-60 लाख रुपये खर्च होंगे। पार्षदों के प्रस्ताव पर यह विकास कार्य नवंबर तक पूरे करा लिए जाएंगे। बीते वित्तीय वर्ष के बकाया कार्यों को भी इस साल पूरा कराया जाएगा। नगर निगम ने आर्थिक संकट की वजह से इस साल वार्ड कोटे की रकम में 40 करोड़ की कटौती की है।
नगर निगम ने बीते साल 100 वार्ड में 100 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराने का निर्णय लिया था लेकिन फंड के संकट की वजह से 20 करोड़ के काम भी नहीं करा पाया। अधिकांश वार्ड में महज 10-15 लाख के विकास कार्य ही हुए हैं। शनिवार को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में बजट पर मुहर लगने के बाद सभी पार्षदों ने वार्डों के लिए एक-एक करोड़ का कोटा तय करने की मांग की। इस पर महापौर आशा शर्मा ने 60-60 लाख के विकास कार्य कराने पर हामी भर दी। नगर निगम के आगामी चुनाव को देखते हुए इन विकास कार्यों को अक्तूबर-नवंबर तक पूरा कराने का निर्णय लिया गया।
गृहकर व किराए के प्रस्तावों पर मेयर-पार्षदों ने नगरायुक्त को दिया चकमा
- निगम पार्षद रणनीति के तहत शाम तक बजट पर ही करते रहे चर्चा
- प्रस्ताव पास हुआ न निरस्त, शासन को भी रिपोर्ट नहीं भेज पाएंगे नगरायुक्त
गाजियाबाद। सर्किल रेट के आधार पर गृहकर लागू करने और दुकानों का किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर मेयर और पार्षदों ने मिलकर नगरायुक्त को चकमा दे दिया। रणनीति के तहत निगम पार्षद शाम छह बजे तक बजट पर ही चर्चा करते रहे। गृहकर और किराए के प्रस्तावों पर चर्चा ही नहीं हो सकी।
विज्ञापन
नगर आयुक्त इन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सोमवार को फिर बैठक बुलाना चाहते थे लेकिन सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू होगा। इसके चलते नगर निगम की बोर्ड बैठक नहीं हो पाएगी। निगम अधिकारियों ने बैठक के पहले सत्र में बजट पर चर्चा और लंच के बाद दूसरे सत्र में टैक्स और किराए समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी। पार्षदों ने पहले चरण में एजेंडे पर चर्चा करने की बजाय वार्डों की समस्याएं उठा दीं। लंच तक बजट पर चर्चा ही शुरू नहीं हुई। नगर निगम पार्षदों ने इस प्रस्ताव को न तो पास किया और न ही निरस्त किया। पार्षद इसे निरस्त करते तो नगर आयुक्त सीधे इसे शासन को भेज देते और शासन इस पर एकतरफा निर्णय लेकर टैक्स बढ़ा सकता था। ऐसे में पार्षदों ने इस प्रस्ताव को बीच में लटका दिया।
विज्ञापन
गाजियाबाद। निकाय चुनाव से पहले नगर निगम शहर के 100 वार्डों में 60 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराएगा। प्रत्येक वार्ड में 60-60 लाख रुपये खर्च होंगे। पार्षदों के प्रस्ताव पर यह विकास कार्य नवंबर तक पूरे करा लिए जाएंगे। बीते वित्तीय वर्ष के बकाया कार्यों को भी इस साल पूरा कराया जाएगा। नगर निगम ने आर्थिक संकट की वजह से इस साल वार्ड कोटे की रकम में 40 करोड़ की कटौती की है।
नगर निगम ने बीते साल 100 वार्ड में 100 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराने का निर्णय लिया था लेकिन फंड के संकट की वजह से 20 करोड़ के काम भी नहीं करा पाया। अधिकांश वार्ड में महज 10-15 लाख के विकास कार्य ही हुए हैं। शनिवार को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में बजट पर मुहर लगने के बाद सभी पार्षदों ने वार्डों के लिए एक-एक करोड़ का कोटा तय करने की मांग की। इस पर महापौर आशा शर्मा ने 60-60 लाख के विकास कार्य कराने पर हामी भर दी। नगर निगम के आगामी चुनाव को देखते हुए इन विकास कार्यों को अक्तूबर-नवंबर तक पूरा कराने का निर्णय लिया गया।
विज्ञापन
गृहकर व किराए के प्रस्तावों पर मेयर-पार्षदों ने नगरायुक्त को दिया चकमा
- निगम पार्षद रणनीति के तहत शाम तक बजट पर ही करते रहे चर्चा
- प्रस्ताव पास हुआ न निरस्त, शासन को भी रिपोर्ट नहीं भेज पाएंगे नगरायुक्त
गाजियाबाद। सर्किल रेट के आधार पर गृहकर लागू करने और दुकानों का किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर मेयर और पार्षदों ने मिलकर नगरायुक्त को चकमा दे दिया। रणनीति के तहत निगम पार्षद शाम छह बजे तक बजट पर ही चर्चा करते रहे। गृहकर और किराए के प्रस्तावों पर चर्चा ही नहीं हो सकी।
विज्ञापन
नगर आयुक्त इन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सोमवार को फिर बैठक बुलाना चाहते थे लेकिन सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू होगा। इसके चलते नगर निगम की बोर्ड बैठक नहीं हो पाएगी। निगम अधिकारियों ने बैठक के पहले सत्र में बजट पर चर्चा और लंच के बाद दूसरे सत्र में टैक्स और किराए समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी। पार्षदों ने पहले चरण में एजेंडे पर चर्चा करने की बजाय वार्डों की समस्याएं उठा दीं। लंच तक बजट पर चर्चा ही शुरू नहीं हुई। नगर निगम पार्षदों ने इस प्रस्ताव को न तो पास किया और न ही निरस्त किया। पार्षद इसे निरस्त करते तो नगर आयुक्त सीधे इसे शासन को भेज देते और शासन इस पर एकतरफा निर्णय लेकर टैक्स बढ़ा सकता था। ऐसे में पार्षदों ने इस प्रस्ताव को बीच में लटका दिया।