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जिले में 3.84 लाख लोगों का फूल रहा है दम
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जिले में 3.84 लाख लोगों का फूल रहा दम
गाजियाबाद। जिले में 3.84 लाख लोगों का सांस लेने में दम फूल रहा है। इसका कारण है कि घर से लेकर बाहर तक फैला प्रदूषण। लंबे समय तक धूल और प्रदूषण के कणों के संपर्क में रहने के कारण पांच साल के बच्चे से लेकर 90 साल तक के बुजुर्ग अस्थमा की चपेट में हैं। बच्चों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है। लोगों को अस्थमा के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
आईएमए अध्यक्ष व चेस्ट फिजिशियन डॉ. आरके गर्ग का कहना है कि इसमें सूजन की वजह से सास की नली बहुत ही संवेदनशील हो जाती है, इसलिए अस्थायी तौर पे ये थोड़ी सिकुड़ जाती है। यह कभी भी हो सकता है। कभी-कभी ये नली बलगम की वजह से जाम हो सकती है। प्रदूषण के कारण जिले में पांच साल में 50 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं।
जिले में आठ फीसदी लोग अस्थमा की चपेट में
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व क्रिटिकल केयर सोसायटी के चेयरमैन डॉ. आशीष अग्रवाल का कहना है कि एक निजी दवाई कंपनी द्वारा सर्वे कराया था, इसमें आठ फीसदी लोगों में अस्थमा पाया गया था। उन्होंने बताया कि हाल ही में बल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट द्वारा दिल्ली और एनसीआर के ग्रामीण और शहरी इलाके में 5900 लोगों का सर्वे कराया था। इसमें 11.03 फीसदी लोगों में अस्थमा की बीमारी पाई गई।
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युवा अवस्था में सुधार
मनिपाल अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट के डॉ. का कहना है कि अस्थमा दीर्घकालिक रोग हो सकता है। अगर युवावस्था में हुआ हो। जहां तक बच्चों की बात है, उनमें कभी-कभी खत्म भी हो जाता है या किशोरावस्था के दौरान इसमें सुधार आ सकता है। लक्षणों को इलाज के जरिये आम तौर पे नियंत्रित किया जा सकता है और ज्यादातर लोगों की जिंदगी सामान्य और कामकाजी होगी। बहरहाल वे लोग जिनके लक्षण काफी गंभीर हैं उन्हें लगातार समस्याएं आ सकती है।
अस्थमा के लक्षण
सांस की घरघराहट
सांस लेते हुए सीटी जैसी आवाज आना।
सांस फू लना, छाती में जकड़न
इस तरह से मिलता है आराम
- नियमित तौर पर योग करें।
- धुएं और प्रदूषण से दूरी बनाए रखें।
- दमा के ज्यादातर इलाज इनहेलर के उपयोग पर आधारित है।
- एलर्जी के कारण की पहचान करें और उससे दूरी बनाएं।
- इनहेलर के प्रयोग से रोज सांस की नली में मौजूद सूजन कम करने के लिए किया जाता है। दमे के लक्षणों को पनपने से रोकता है।
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गाजियाबाद। जिले में 3.84 लाख लोगों का सांस लेने में दम फूल रहा है। इसका कारण है कि घर से लेकर बाहर तक फैला प्रदूषण। लंबे समय तक धूल और प्रदूषण के कणों के संपर्क में रहने के कारण पांच साल के बच्चे से लेकर 90 साल तक के बुजुर्ग अस्थमा की चपेट में हैं। बच्चों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है। लोगों को अस्थमा के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
आईएमए अध्यक्ष व चेस्ट फिजिशियन डॉ. आरके गर्ग का कहना है कि इसमें सूजन की वजह से सास की नली बहुत ही संवेदनशील हो जाती है, इसलिए अस्थायी तौर पे ये थोड़ी सिकुड़ जाती है। यह कभी भी हो सकता है। कभी-कभी ये नली बलगम की वजह से जाम हो सकती है। प्रदूषण के कारण जिले में पांच साल में 50 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं।
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जिले में आठ फीसदी लोग अस्थमा की चपेट में
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व क्रिटिकल केयर सोसायटी के चेयरमैन डॉ. आशीष अग्रवाल का कहना है कि एक निजी दवाई कंपनी द्वारा सर्वे कराया था, इसमें आठ फीसदी लोगों में अस्थमा पाया गया था। उन्होंने बताया कि हाल ही में बल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट द्वारा दिल्ली और एनसीआर के ग्रामीण और शहरी इलाके में 5900 लोगों का सर्वे कराया था। इसमें 11.03 फीसदी लोगों में अस्थमा की बीमारी पाई गई।
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युवा अवस्था में सुधार
मनिपाल अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट के डॉ. का कहना है कि अस्थमा दीर्घकालिक रोग हो सकता है। अगर युवावस्था में हुआ हो। जहां तक बच्चों की बात है, उनमें कभी-कभी खत्म भी हो जाता है या किशोरावस्था के दौरान इसमें सुधार आ सकता है। लक्षणों को इलाज के जरिये आम तौर पे नियंत्रित किया जा सकता है और ज्यादातर लोगों की जिंदगी सामान्य और कामकाजी होगी। बहरहाल वे लोग जिनके लक्षण काफी गंभीर हैं उन्हें लगातार समस्याएं आ सकती है।
अस्थमा के लक्षण
सांस की घरघराहट
सांस लेते हुए सीटी जैसी आवाज आना।
सांस फू लना, छाती में जकड़न
इस तरह से मिलता है आराम
- नियमित तौर पर योग करें।
- धुएं और प्रदूषण से दूरी बनाए रखें।
- दमा के ज्यादातर इलाज इनहेलर के उपयोग पर आधारित है।
- एलर्जी के कारण की पहचान करें और उससे दूरी बनाएं।
- इनहेलर के प्रयोग से रोज सांस की नली में मौजूद सूजन कम करने के लिए किया जाता है। दमे के लक्षणों को पनपने से रोकता है।