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आरटीआई में दी भ्रामक जानकारी, तीन मामलों में लगा 75 हजार जुर्माना
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आरटीआई में दी भ्रामक जानकारी, तीन मामलों में लगा 75 हजार जुर्माना
गाजियाबाद। बेसिक शिक्षा अधिकारी के बाद गलत और भ्रामक जानकारी देने पर राज्य सूचना आयोग ने जीडीए के जनसूचना अधिकारी पर तीन मामलों में 75 हजार का जुर्माना लगाया है। तीन मामलों में जनसूचना अधिकारी को अपने वेतन से 25-25 हजार जुर्माना भरना होगा। राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने जुर्माने के आदेश जारी किए हैं।
वसुंधरा निवासी बीडी जोशी ने बताया कि जीडीए में उन्होंने रजिस्ट्री के लिए आवेदन किया था। रजिस्ट्री संबंधी दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए प्राधिकरण अधिकारियों ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया। फिर मामले में हाईकोर्ट का रुख करने के बाद अदालत ने प्रमुख सचिव को जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रमुख सचिव ने रजिस्ट्री संबंधी सभी दस्तावेजों की राइटिंग विशेषज्ञ से जांच कराने के आदेश प्राधिकरण अधिकारियों को दिए।
राइटिंग विशेषज्ञ की जांच में सभी दस्तावेज सही पाए गए। फिर उन्होंने विभिन्न दस्तावेज की जांच के तरीके और अन्य सवालों को लेकर आरटीआई दायर की। आरटीआई का जवाब नहंीं देने पर राज्य सूचना आयोग में अपील की गई। फिर भी दस्तावेज जमा नहीं करवाने पर जुर्माना लगाया गया है।
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जीडीए सचिव बृजेश कुमार का कहना है कि राज्य सूचना आयोग की ओर से जारी आदेश संज्ञान में नहीं है। ऐसे किसी भी आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।
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गाजियाबाद। बेसिक शिक्षा अधिकारी के बाद गलत और भ्रामक जानकारी देने पर राज्य सूचना आयोग ने जीडीए के जनसूचना अधिकारी पर तीन मामलों में 75 हजार का जुर्माना लगाया है। तीन मामलों में जनसूचना अधिकारी को अपने वेतन से 25-25 हजार जुर्माना भरना होगा। राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने जुर्माने के आदेश जारी किए हैं।
वसुंधरा निवासी बीडी जोशी ने बताया कि जीडीए में उन्होंने रजिस्ट्री के लिए आवेदन किया था। रजिस्ट्री संबंधी दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए प्राधिकरण अधिकारियों ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया। फिर मामले में हाईकोर्ट का रुख करने के बाद अदालत ने प्रमुख सचिव को जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रमुख सचिव ने रजिस्ट्री संबंधी सभी दस्तावेजों की राइटिंग विशेषज्ञ से जांच कराने के आदेश प्राधिकरण अधिकारियों को दिए।
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राइटिंग विशेषज्ञ की जांच में सभी दस्तावेज सही पाए गए। फिर उन्होंने विभिन्न दस्तावेज की जांच के तरीके और अन्य सवालों को लेकर आरटीआई दायर की। आरटीआई का जवाब नहंीं देने पर राज्य सूचना आयोग में अपील की गई। फिर भी दस्तावेज जमा नहीं करवाने पर जुर्माना लगाया गया है।
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जीडीए सचिव बृजेश कुमार का कहना है कि राज्य सूचना आयोग की ओर से जारी आदेश संज्ञान में नहीं है। ऐसे किसी भी आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।