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अक्तूबर 2023 में दुहाई से मेरठ दक्षिण तक दौड़ेगी रैपिड रेल
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अक्तूबर 2023 में दुहाई से मेरठ दक्षिण तक दौड़ेगी रैपिड रेल
गाजियाबाद। दुहाई डिपो में पहुंचे रैपिड रेल के मॉडल कोच में हवाई जहाज और शताब्दी ट्रेन सरीखी सुविधाओं की पहली झलक देखने को मिली। रैपिड रेल में यात्रियों को मेट्रो से अधिक सुविधाएं मिलेंगी, जो सफर सुविधाजनक बनाएंगी। साहिबाबाद से दुहाई तक पहले प्राथमिकता वाले खंड पर रैपिड रेल मार्च 2023 में दौड़ने लगेगी। पहले खंड में निर्माण संबंधी 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। फिर दुहाई से मेरठ दक्षिण तक 20 किमी लंबे कॉरिडोर पर अक्तूबर 2023 में ट्रेन का संचालन शुरू होगा।
आपात स्थिति में एंबुलेंस का काम भी करेगी रैपिड
आपात चिकित्सा की स्थिति मे रैपिड रेल का इस्तेमाल ग्रीन कॉरिडोर की तरह हो सकेगा। एनसीआरटीसी ने इसी को देखते हुए कोच में स्ट्रेचर ले जाने के लिए विशेष स्थान निर्धारित किया है। चिकित्सा इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को मेरठ से दिल्ली तक 55 मिनट में पहुंचाया जा सकेगा। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बाद से दिल्ली-मेरठ की दूरी घटी है। लेकिन मेरठ के अंदरूनी क्षेत्रों से वाया सड़क मार्ग से दिल्ली के किसी अस्पताल तक पहुंचने में दो से ढाई घंटा लग सकता है।
मई में आएगी पहली छह कोच की रेल, जुलाई से ट्रायल
एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने गुजरात के सावली स्थित प्लांट में छह कोच की पहली रैपिड रेल सेट का निर्माण आखिरी चरण में है। छह कोच की पहली ट्रेन मई माह में दुहाई डिपो में पहुंचेगी। फिर करीब एक से डेढ़ माह तक ट्रेन के तकनीकी परीक्षण के बाद जुलाई से ट्रायल रन की शुरुआत होगी। पहले खंड पर ट्रायल रन दिसंबर 2022 तक चलेगा। पहले 17 किमी लंबे प्राथमिकता खंड में निर्माण संबंधी 90 फीसदी काम पूरा होने की बात कही।
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हर छह माह में 20 किमी का सेक्शन खुलेगा
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड कॉरिडोर 82 किमी लंबा है। एनसीआरटीसी प्रबंधन निदेशक ने प्राथमिकता खंड के बाद बाकी सेक्शन के खोले जाने की विस्तृत रूपरेखा सामने रखी। मार्च 2023 में पहले खंड के बाद हर छह माह में 20 किमी का कॉरिडोर खोला जाएगा। पहले खंड के बाद दूसरा सेक्शन दुहाई से मेरठ दक्षिण का खुलेगा। फिर साहिबाबाद से दिल्ली और आखिर में मेरठ दक्षिण से मेरठ के मोदीपुरम का सेक्शन शुरू होगा।
हर ट्रेन में चार स्टैंडर्ड, एक प्रीमियम व एक महिला कोच
रैपिड कॉरिडोर पर रेल संचालन की शुरुआत छह कोच की ट्रेन से होगी। छह कोच की ट्रेन में चार कोच स्टैंडर्ड श्रेणी, एक कोच महिला और एक कोच प्रीमियम क्लास का होगा। स्टैंडर्ड कोच में एक ओर तीन दरवाजे तो प्रीमियम कोच में दो दरवाजे होंगे। प्रीमियम कोच का किराया स्टैंडर्ड से अधिक होगा। किराए को अंतिम रूप देने के लिए एनसीआरटीसी स्तर पर मंथन जारी है।
तीन से 10 मिनट के अंतराल में मिलेगी रेल
रैपिड कोरिडोर का यात्रियों को रेल के लिए अधिक इंतजार नहीं करना होगा। शुरूआत में यात्रियों को 10 से 15 मिनट और भीड़ बढ़ने की दशा में तीन मिनट के अंदर रेल मिलेगी। हर कोच में 60 सीटें होंगी। साथ ही यात्रियों के खड़े होने के लिए कोच में अतिरिक्त जगह की व्यवस्था की गई है।
रैपिड रेल के कोच में होगी यह सुविधाएं
- कोच में यात्रियों के खड़े होने व सामान रखने पर्याप्त जगह होगी
- हर सीट पर मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट और वाईफाई की सुविधा
- दिव्यांगों के लिए दरवाजों के पास व्हील चेयर की जगह व स्ट्रेचर ले जाने का प्रावधान
- कोट को टांगने केलिए होंगे हुक, मैगजीन होल्डर भी होगा
- बाहर रोशनी के अनुसार केबिन में खुद नियंत्रित होगी प्रकाश की व्यवस्था
- ब्रेकिंग सिस्टम के जरिए पैदा होने वाली ऊर्जा का होगा इस्तेमाल
- ट्रेन में स्वचालित संचालन प्रणाली का होगा इस्तेमाल
- प्रीमियम कोच में सीट को फैलाने (रिक्लाइन) की सुविधा, सीटों में भी होंगे हैंडल
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गाजियाबाद। दुहाई डिपो में पहुंचे रैपिड रेल के मॉडल कोच में हवाई जहाज और शताब्दी ट्रेन सरीखी सुविधाओं की पहली झलक देखने को मिली। रैपिड रेल में यात्रियों को मेट्रो से अधिक सुविधाएं मिलेंगी, जो सफर सुविधाजनक बनाएंगी। साहिबाबाद से दुहाई तक पहले प्राथमिकता वाले खंड पर रैपिड रेल मार्च 2023 में दौड़ने लगेगी। पहले खंड में निर्माण संबंधी 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। फिर दुहाई से मेरठ दक्षिण तक 20 किमी लंबे कॉरिडोर पर अक्तूबर 2023 में ट्रेन का संचालन शुरू होगा।
आपात स्थिति में एंबुलेंस का काम भी करेगी रैपिड
आपात चिकित्सा की स्थिति मे रैपिड रेल का इस्तेमाल ग्रीन कॉरिडोर की तरह हो सकेगा। एनसीआरटीसी ने इसी को देखते हुए कोच में स्ट्रेचर ले जाने के लिए विशेष स्थान निर्धारित किया है। चिकित्सा इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को मेरठ से दिल्ली तक 55 मिनट में पहुंचाया जा सकेगा। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बाद से दिल्ली-मेरठ की दूरी घटी है। लेकिन मेरठ के अंदरूनी क्षेत्रों से वाया सड़क मार्ग से दिल्ली के किसी अस्पताल तक पहुंचने में दो से ढाई घंटा लग सकता है।
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मई में आएगी पहली छह कोच की रेल, जुलाई से ट्रायल
एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने गुजरात के सावली स्थित प्लांट में छह कोच की पहली रैपिड रेल सेट का निर्माण आखिरी चरण में है। छह कोच की पहली ट्रेन मई माह में दुहाई डिपो में पहुंचेगी। फिर करीब एक से डेढ़ माह तक ट्रेन के तकनीकी परीक्षण के बाद जुलाई से ट्रायल रन की शुरुआत होगी। पहले खंड पर ट्रायल रन दिसंबर 2022 तक चलेगा। पहले 17 किमी लंबे प्राथमिकता खंड में निर्माण संबंधी 90 फीसदी काम पूरा होने की बात कही।
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हर छह माह में 20 किमी का सेक्शन खुलेगा
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड कॉरिडोर 82 किमी लंबा है। एनसीआरटीसी प्रबंधन निदेशक ने प्राथमिकता खंड के बाद बाकी सेक्शन के खोले जाने की विस्तृत रूपरेखा सामने रखी। मार्च 2023 में पहले खंड के बाद हर छह माह में 20 किमी का कॉरिडोर खोला जाएगा। पहले खंड के बाद दूसरा सेक्शन दुहाई से मेरठ दक्षिण का खुलेगा। फिर साहिबाबाद से दिल्ली और आखिर में मेरठ दक्षिण से मेरठ के मोदीपुरम का सेक्शन शुरू होगा।
हर ट्रेन में चार स्टैंडर्ड, एक प्रीमियम व एक महिला कोच
रैपिड कॉरिडोर पर रेल संचालन की शुरुआत छह कोच की ट्रेन से होगी। छह कोच की ट्रेन में चार कोच स्टैंडर्ड श्रेणी, एक कोच महिला और एक कोच प्रीमियम क्लास का होगा। स्टैंडर्ड कोच में एक ओर तीन दरवाजे तो प्रीमियम कोच में दो दरवाजे होंगे। प्रीमियम कोच का किराया स्टैंडर्ड से अधिक होगा। किराए को अंतिम रूप देने के लिए एनसीआरटीसी स्तर पर मंथन जारी है।
तीन से 10 मिनट के अंतराल में मिलेगी रेल
रैपिड कोरिडोर का यात्रियों को रेल के लिए अधिक इंतजार नहीं करना होगा। शुरूआत में यात्रियों को 10 से 15 मिनट और भीड़ बढ़ने की दशा में तीन मिनट के अंदर रेल मिलेगी। हर कोच में 60 सीटें होंगी। साथ ही यात्रियों के खड़े होने के लिए कोच में अतिरिक्त जगह की व्यवस्था की गई है।
रैपिड रेल के कोच में होगी यह सुविधाएं
- कोच में यात्रियों के खड़े होने व सामान रखने पर्याप्त जगह होगी
- हर सीट पर मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट और वाईफाई की सुविधा
- दिव्यांगों के लिए दरवाजों के पास व्हील चेयर की जगह व स्ट्रेचर ले जाने का प्रावधान
- कोट को टांगने केलिए होंगे हुक, मैगजीन होल्डर भी होगा
- बाहर रोशनी के अनुसार केबिन में खुद नियंत्रित होगी प्रकाश की व्यवस्था
- ब्रेकिंग सिस्टम के जरिए पैदा होने वाली ऊर्जा का होगा इस्तेमाल
- ट्रेन में स्वचालित संचालन प्रणाली का होगा इस्तेमाल
- प्रीमियम कोच में सीट को फैलाने (रिक्लाइन) की सुविधा, सीटों में भी होंगे हैंडल