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टीएसटीपी अब वबाग कंपनी बनाएगी, दूसरी फर्म की चुनौती को हाईकोर्ट ने किया खारिज
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टीएसटीपी अब वबाग कंपनी बनाएगी, दूसरी फर्म की चुनौती को हाईकोर्ट ने किया खारिज
गाजियाबाद। टर्शियरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (टीएसटीपी) अब चेन्नई की कंपनी वीए टेक वबाग बनाएगी। नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुई एक अन्य कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से दाखिल की गई याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। त्रिवेणी इंजीनियरिंग के मैनेजमेंट ने उनकी कंपनी की तकनीकी निविदा को गलत तरीके से फेल किए जाने का आरोप लगाया था।
इस टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियां वीए टेक वबाग, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और इन्वायरो कंट्रोल एसोसिएट्स प्रा.लि. ने भाग लिया था। टू बिड सिस्टम के जरिए निविदा प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पहले तीनों कंपनी की तकनीकी निविदा को खोला गया। नगर निगम की ओर से तय शर्तों को पूरा न करने पर महाप्रबंधक जल ने त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लि. को डिस्क्वालीफाई कर दिया था। इसके बाद टेंडर में सबसे न्यूनतम रेट पर काम करने का ऑफर देने वाली कंपनी वीए टेक वबाग को कांट्रेक्ट देकर कार्यादेश भी जारी कर दिया गया है। यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था। इस मामले में नगर निगम की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने चुनौती के बिंदुओं को निराधार पाया और याचिका को खारिज कर दिया।
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गाजियाबाद। टर्शियरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (टीएसटीपी) अब चेन्नई की कंपनी वीए टेक वबाग बनाएगी। नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुई एक अन्य कंपनी त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से दाखिल की गई याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। त्रिवेणी इंजीनियरिंग के मैनेजमेंट ने उनकी कंपनी की तकनीकी निविदा को गलत तरीके से फेल किए जाने का आरोप लगाया था।
इस टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियां वीए टेक वबाग, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और इन्वायरो कंट्रोल एसोसिएट्स प्रा.लि. ने भाग लिया था। टू बिड सिस्टम के जरिए निविदा प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पहले तीनों कंपनी की तकनीकी निविदा को खोला गया। नगर निगम की ओर से तय शर्तों को पूरा न करने पर महाप्रबंधक जल ने त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लि. को डिस्क्वालीफाई कर दिया था। इसके बाद टेंडर में सबसे न्यूनतम रेट पर काम करने का ऑफर देने वाली कंपनी वीए टेक वबाग को कांट्रेक्ट देकर कार्यादेश भी जारी कर दिया गया है। यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था। इस मामले में नगर निगम की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने चुनौती के बिंदुओं को निराधार पाया और याचिका को खारिज कर दिया।
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