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एमएमजी अस्पताल ः 30 मिनट में पर्चा, एक घंटे में मिलता है इलाज
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एमएमजी अस्पताल : 30 मिनट में पर्चा, एक घंटे में मिलता है इलाज
गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में सामान्य बीमारी के इलाज में भी तीन से चार दिन लग जाते हैं। अगर मरीज सर्दी-जुकाम से पीड़ित है तो भी उसे पर्चा बनवाने से लेकर दवाई लेने तक दो घंटे से अधिक समय लग जाता है। अगर किसी मरीज को खून की जांच कराने के बाद डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाकर दवाई लेने की जरूरत पड़ती है तो उसे पांच जगह लाइन में लगना पड़ता है। इस समय एक दिन में ढाई से तीन हजार मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
पर्चा बनवाने से शुरू होती है लाइन
काउंटर पर एक दिन में 1800 से 2000 पंजीकरण एक दिन में होता है। पंजीकरण कराने के लिए सिर्फ दो काउंटर होने से पर्चा बनवाने के लिए महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लाइन लगने से कई बार रास्ता भी जाम हो जाता है। इसके अलावा मरीजों को धूप में खड़े होकर पर्चा बनवाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए अलग से पंजीकरण काउंटर बना है।
डॉक्टर के पास भी होती है धक्का-मुक्की
मौसम में बदलाव होने से इस समय सर्दी-जुकाम, बुखार और पेट दर्द के सबसे अधिक मामले आ रहे हैं। सबसे लंबी लाइन फिजिशियन की ओपीडी के बाहर लगती है। पर्चा बनवाने के बाद मरीजों को फिजिशियन की ओपीडी में घंटों लाइन में लगना पड़ता है। शनिवार को दो बजे के बाद दवाई काउंटर बंद होने के बाद 15 मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
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खून जांच कराने के लिए दो बार लगानी पड़ती है लाइन
खून की जांच कराने के लिए लैब में दो जगह लाइन में लगना पड़ता है। पहली लाइन लगती है खून जांच के लिए ऑनलाइन नंबर लेने के लिए, जबकि दूसरी लाइन में खड़ा होना पड़ता है खून का नमूना देने के लिए। सैंपल देने के बाद दूसरे या तीसरे दिन बाद जांच रिपोर्ट मिल पाती है।
दवाई लेने के लिए भी काउंटर पर करना पड़ता है इंतजार
रिपोर्ट दिखाने के बाद छठीं बार डॉक्टर के पास फिर से लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद दवाई लेने के लिए काउंटर पर खड़े होकर दवाई के लिए इंतजार करना पड़ता है।
बोले मरीज
मुझे चार दिन से बुखार हो रहा है। आधे घंटे से लाइन में लगी हूं, पता नहीं डॉक्टर के पास पहुंच पाऊंगी या उठ जाएंगे। - काजल, लाल कुंआ
मैं पर्चा बनवाने के लिए शुक्रवार को 1.30 बजे आई थी तो काउंटर बंद था। आज भी एक बज गया है, लेकिन अभी तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंच पाई। - रेनू, शास्त्रीनगर
मेरा पर्चा बृहस्पतिवार को बना था, अभी तक दवाई नहीं मिल पाई है। डॉक्टर को दिखाने और खून जांच कराने में दो दिन लग गए। अब दवाई की लाइन में लगी हूं। - गुलजार, विजय नगर
मेरे सिर और कंधे में दर्द होता है। पहले इस्लाम नगर में डॉक्टर को दिखाया था। आराम नहीं मिला तो शुक्रवार को अस्पताल आई थी, लेकिन जांच नहीं हो पाई। आज खून का सैंपल देने के लिए लाइन में लगी हूं। - सुहाना, इस्लाम नगर
कोट
मौसम में बदलाव होने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। भीड़ अधिक होने से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है, लेकिन किसी भी मरीज को वापस नहीं किया जाता है। - डॉ. मनोज चतुर्वेदी, सीएमएस
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में सामान्य बीमारी के इलाज में भी तीन से चार दिन लग जाते हैं। अगर मरीज सर्दी-जुकाम से पीड़ित है तो भी उसे पर्चा बनवाने से लेकर दवाई लेने तक दो घंटे से अधिक समय लग जाता है। अगर किसी मरीज को खून की जांच कराने के बाद डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाकर दवाई लेने की जरूरत पड़ती है तो उसे पांच जगह लाइन में लगना पड़ता है। इस समय एक दिन में ढाई से तीन हजार मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
पर्चा बनवाने से शुरू होती है लाइन
काउंटर पर एक दिन में 1800 से 2000 पंजीकरण एक दिन में होता है। पंजीकरण कराने के लिए सिर्फ दो काउंटर होने से पर्चा बनवाने के लिए महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लाइन लगने से कई बार रास्ता भी जाम हो जाता है। इसके अलावा मरीजों को धूप में खड़े होकर पर्चा बनवाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए अलग से पंजीकरण काउंटर बना है।
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डॉक्टर के पास भी होती है धक्का-मुक्की
मौसम में बदलाव होने से इस समय सर्दी-जुकाम, बुखार और पेट दर्द के सबसे अधिक मामले आ रहे हैं। सबसे लंबी लाइन फिजिशियन की ओपीडी के बाहर लगती है। पर्चा बनवाने के बाद मरीजों को फिजिशियन की ओपीडी में घंटों लाइन में लगना पड़ता है। शनिवार को दो बजे के बाद दवाई काउंटर बंद होने के बाद 15 मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
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खून जांच कराने के लिए दो बार लगानी पड़ती है लाइन
खून की जांच कराने के लिए लैब में दो जगह लाइन में लगना पड़ता है। पहली लाइन लगती है खून जांच के लिए ऑनलाइन नंबर लेने के लिए, जबकि दूसरी लाइन में खड़ा होना पड़ता है खून का नमूना देने के लिए। सैंपल देने के बाद दूसरे या तीसरे दिन बाद जांच रिपोर्ट मिल पाती है।
दवाई लेने के लिए भी काउंटर पर करना पड़ता है इंतजार
रिपोर्ट दिखाने के बाद छठीं बार डॉक्टर के पास फिर से लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद दवाई लेने के लिए काउंटर पर खड़े होकर दवाई के लिए इंतजार करना पड़ता है।
बोले मरीज
मुझे चार दिन से बुखार हो रहा है। आधे घंटे से लाइन में लगी हूं, पता नहीं डॉक्टर के पास पहुंच पाऊंगी या उठ जाएंगे। - काजल, लाल कुंआ
मैं पर्चा बनवाने के लिए शुक्रवार को 1.30 बजे आई थी तो काउंटर बंद था। आज भी एक बज गया है, लेकिन अभी तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंच पाई। - रेनू, शास्त्रीनगर
मेरा पर्चा बृहस्पतिवार को बना था, अभी तक दवाई नहीं मिल पाई है। डॉक्टर को दिखाने और खून जांच कराने में दो दिन लग गए। अब दवाई की लाइन में लगी हूं। - गुलजार, विजय नगर
मेरे सिर और कंधे में दर्द होता है। पहले इस्लाम नगर में डॉक्टर को दिखाया था। आराम नहीं मिला तो शुक्रवार को अस्पताल आई थी, लेकिन जांच नहीं हो पाई। आज खून का सैंपल देने के लिए लाइन में लगी हूं। - सुहाना, इस्लाम नगर
कोट
मौसम में बदलाव होने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। भीड़ अधिक होने से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है, लेकिन किसी भी मरीज को वापस नहीं किया जाता है। - डॉ. मनोज चतुर्वेदी, सीएमएस