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200 करोड़ के घोटाले के 40 मामलों में आरोप पत्र दाखिल

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 31 Aug 2022 01:12 AM IST
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200 करोड़ के घोटाले के 40 मामलों में आरोप पत्र दाखिल
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गाजियाबाद। 200 करोड़ के घोटाले में दर्ज 111 एफआईआर में से 40 मुकदमों में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिए हैं। इनमें पुलिस ने बिल्डर द्वारा किए गए फर्जीवाड़े को दिखाया है। बिल्डर पर जीडीए और बैंक अधिकारियों से साठगांठ करके इमारत बनाने और लोगों को फ्लैट देने के नाम पर रकम ऐंठने का आरोप है। साथ ही उसने फर्जी तरीके से बैंकों से एक फ्लैट पर दो-दो बार ऋण ले लिया है। इतना ही नहीं बिल्डर ने एक फ्लैट को दो-दो लोगों को बेचकर भी रकम ऐंठी है। दूसरी ओर पुलिस मामले में अब अभी तक जीडीए और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत का पता नहीं लगा पाई है।
पुलिस की जांच में यह तो साफ हो गया कि बिल्डर राजकुमार जैन ने अपने परिवार के साथ मिलकर धोखाधड़ी की साजिश काफी पहले रच ली थी। वह इसी आधार पर काम करता रहा और लोगों को अपने जाल में फंसाता रहा। उसने फ्लैट बेचने के नाम पर 900 लोगों को ठगा। इनमें से अभी 111 लोगों ने मुकदमा दर्ज करा दिया। एसपी क्राइम डॉ. दीक्षा शर्मा का कहना है कि बैंक अधिकारियों के दस्तावेज की जांच की गई। इस आधार पर यह सामने आया कि बैंक अधिकारियों ने नियम अनुसार ऋण स्वीकृत किया, लेकिन बिल्डर ने लोगों से पहले ही ऋण स्वीकृति के लिए सभी दस्तावेजों पर पहले ही हस्ताक्षर करा लिए और अपने खातों में रुपये मंगवा लिए। बिल्डर ने पहले प्रोजेक्ट के लिए ऋण स्वीकृत कराया और उसके बाद लोगों को फ्लैट खरीदवाने के नाम पर ऋण स्वीकृत करवाता रहा। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। साथ ही बैंक व जीडीए के अफसरों की मिलीभगत की भी गहनता से जांच में टीमें लगी हैं।
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नौ आरोपियों को किया जा चुका गिरफ्तार
पुलिस मामले में राजकुमार जैन, नमन जैन, अक्षय जैन, अनुशा जैन, इंदु जैन, ऋषभ जैन, प्रतीक जैन समेत अन्य दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को आरोप को चार्जशीट में शामिल किया है।
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जीडीए और बैंक अफसर एक दूसरे की बता रहे कमी
घोटाले में पीड़ितों द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में जीडीए और बैंक अफसरों की भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों पर लगाए गए आरोपों की जांच की तो जीडीए अपने बचाव में नक्शा पास करने का हवाला दे रहे हैं जबकि बैंक अफसर नक्शा स्वीकृति के आधार पर ऋण देने की बात कह रहे हैं। इससे साफ है कि दोनों एक दूसरे पर इसका जिम्मा ठहरा रहे हैं। इसके लिए पुलिस ईओडब्लू को मामले की जांच सौंपने की तैयारी में है।

अधिकांश केस में बैंक और सात में जीडीए के अफसर शामिल
111 में से अधिकांश केस में बैंक अफसरों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। ये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और इलाहाबाद बैंक के अफसर हैं। पुलिस अभी तक ऋण पास करने वाले अफसरों के नाम और पता मालूम नहीं कर पाई है। वहीं इनमें से सात मामलों में जीडीए के अफसरों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस इनका भी पता नहीं लगा पाई।
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