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खाद्य उत्पादों के वजन में डंडी मार रही हैं कंपनियां
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खाद्य उत्पादों के वजन में डंडी मार रही हैं कंपनियां
पादों में जमकर घटतौली कर रही हैं। बाट माप विभाग के आंकड़े बताते हैं कि आटा से लेकर सॉस तक में अंकित वजन से कम वजन कंपनियां ग्राहकों को दे रही हैं। साल 2021 से लेकर 2022 अप्रैल तक विभाग ने 837 पैकेज्ड उत्पादों की जांच की। इनमें से 40 फीसदी उत्पादों पर अंकित वजन से कम वजन पाया गया। घटतौली करने वालों से विभाग ने दो करोड़ 69 लाख रुपये का शुल्क जमा कराया है।
बाट माप विभाग तीन तरह से उत्पादों की जांच करता है। इसमें पैकेज कमोडिटी में उत्पाद के अंकित मूल्य के बराबर वजन की जांच की जाती है। इसके अलावा तराजू, बाट का प्रमाणपत्र और मोहर की जांच व तीसरे तरीके में घटतौली की जांच की जाती है। गाजियाबाद, मोहननगर और मोदीनगर संभाग की पकड़ में आए मामलों में सबसे अधिक पैकेज कमोडिटी के थे। बाट, मोहर और प्रमाण पत्र के 638 मामलों में शमन शुल्क का नोटिस जारी किया गया। वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र चौरसिया ने बताया कि उपभोक्ता कभी भी पैकेज्ड उत्पादों की घटतौली पाए जाने पर विभाग को सूचित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में निरीक्षण कर नोटिस भेजा जाएगा।
राशन में घटतौली के 36 मामलों में कार्रवाई
सरकारी राशन की दुकानों में घटतौली की सूचनाओं के चलते तीनों संभाग द्वारा साल भर में 846 बार निरीक्षण किया गया। गाजियाबाद केंद्र से 352, मोहननगर से 380 और मोदीनगर केंद्र से 114 बार निरीक्षण किया गया। इस दौरान 36 मामले पकड़े गए, जिनमें से तीन मामले घटतौली के थे। वहीं 33 मामलों में तराजू का नवीनीकरण नहीं किया गया था। विभाग द्वारा 80 हजार रुपये का शुल्क वसूल किया गया।
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सिर्फ शुल्क वसूल सकता है विभाग
बाट एवं माप विभाग को सरकार द्वारा वैज्ञानिक दर्जा दिया गया है लेकिन विभाग कार्रवाई के नाम पर बस शुल्क वसूल कर सकता है। ऐसे में बड़ी नामी कंपनियां और दुकानदार अपनी मनमानी करते हैं।
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पादों में जमकर घटतौली कर रही हैं। बाट माप विभाग के आंकड़े बताते हैं कि आटा से लेकर सॉस तक में अंकित वजन से कम वजन कंपनियां ग्राहकों को दे रही हैं। साल 2021 से लेकर 2022 अप्रैल तक विभाग ने 837 पैकेज्ड उत्पादों की जांच की। इनमें से 40 फीसदी उत्पादों पर अंकित वजन से कम वजन पाया गया। घटतौली करने वालों से विभाग ने दो करोड़ 69 लाख रुपये का शुल्क जमा कराया है।
बाट माप विभाग तीन तरह से उत्पादों की जांच करता है। इसमें पैकेज कमोडिटी में उत्पाद के अंकित मूल्य के बराबर वजन की जांच की जाती है। इसके अलावा तराजू, बाट का प्रमाणपत्र और मोहर की जांच व तीसरे तरीके में घटतौली की जांच की जाती है। गाजियाबाद, मोहननगर और मोदीनगर संभाग की पकड़ में आए मामलों में सबसे अधिक पैकेज कमोडिटी के थे। बाट, मोहर और प्रमाण पत्र के 638 मामलों में शमन शुल्क का नोटिस जारी किया गया। वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र चौरसिया ने बताया कि उपभोक्ता कभी भी पैकेज्ड उत्पादों की घटतौली पाए जाने पर विभाग को सूचित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में निरीक्षण कर नोटिस भेजा जाएगा।
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राशन में घटतौली के 36 मामलों में कार्रवाई
सरकारी राशन की दुकानों में घटतौली की सूचनाओं के चलते तीनों संभाग द्वारा साल भर में 846 बार निरीक्षण किया गया। गाजियाबाद केंद्र से 352, मोहननगर से 380 और मोदीनगर केंद्र से 114 बार निरीक्षण किया गया। इस दौरान 36 मामले पकड़े गए, जिनमें से तीन मामले घटतौली के थे। वहीं 33 मामलों में तराजू का नवीनीकरण नहीं किया गया था। विभाग द्वारा 80 हजार रुपये का शुल्क वसूल किया गया।
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सिर्फ शुल्क वसूल सकता है विभाग
बाट एवं माप विभाग को सरकार द्वारा वैज्ञानिक दर्जा दिया गया है लेकिन विभाग कार्रवाई के नाम पर बस शुल्क वसूल कर सकता है। ऐसे में बड़ी नामी कंपनियां और दुकानदार अपनी मनमानी करते हैं।