{"_id":"624b48a7a23fdc7bf92c2123","slug":"ghaziabad-ghaziabad-city-news-gbd236395759","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पतालों का निशुल्क पंजीकरण खत्म, 100 से 3000 तक देना होगा शुल्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पतालों का निशुल्क पंजीकरण खत्म, 100 से 3000 तक देना होगा शुल्क
विज्ञापन
अस्पतालों का निशुल्क पंजीकरण खत्म, 100 से 3000 तक देना होगा शुल्क
गाजियाबाद। क्लीनिक और अस्पतालों का पंजीकरण अब निशुल्क नहीं होगा। इसके लिए शुल्क तक कर दिया गया है। इसी तरह पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए भी शुल्क देना होगा। शासन से इसके निर्देश स्वास्थ्य विभाग को मिले हैं। इसका असर जिले के 630 क्लीनिक और 342 अस्पतालों पर पड़ेगा। इन्हें 100 रुपये से लेकर 3000 तक शुल्क देना होगा। नवीनीकरण का शुल्क पंजीकरण से आधा होगा।
शासन ने नगरीय, ग्रामीण और मेट्रो शहरों के लिए अलग-अलग फीस तय की है। इसका पोर्टल शासन स्तर से शुरू नहीं होने कारण अभी तक पंजीकरण शुरू नहीं हो पाए है। पंजीकरण शुरू होने पर सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद फीस भी अदा करनी होगी। पंजीकरण प्रभारी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि अभी तक सभी पंजीकरण और नवीनीकरण निशुल्क होते थे। पंजीकरण जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।
इसके अध्यक्ष जिलाधिकारी और संयोजक मुख्य चिकित्साधिकारी को शासन ने नियुक्त किया है। उन्होंने बताया कि 50 और उससे ज्यादा बेड वाले अस्पतालों का पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए जिलाधिकारी के पास आवेदन किया जाएगा। 50 बेड से कम वाले अस्पताल, क्लीनिक का पंजीकरण स्वास्थ्य विभाग करेगा। सभी के लिए अग्निशमन और प्रदूषण विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होगा। शासन स्तर से इसके लिए पोर्टल को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
विज्ञापन
नगर निगम का शुल्क अलग से
अस्पतालों का पंजीकरण नगर निगम भी करता है। इसके लिए पहले से शुल्क तय है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ संजीव सिन्हा ने बताया कि नगर निगम का पंजीकरण शुल्क 20 बेड के नर्सिंग होम का दो हजार, 20 बेड से ऊपर वाले नर्सिंग होम का पांच हजार, निजी क्लीनिक पांच हजार, पैथालाजी सेंटर का एक हजार, एक्स-रे क्लीनिक दो हजार, डेंटल क्लीनिक का शुल्क चार हजार रुपये तय है।
निजी डॉक्टरों का मानसिक शोषण है - आईएमए
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग का कहना है कि नगर निगम पहले ही फीस लगा चुका है। अब स्वास्थ्य विभाग भी पंजीकरण की फीस लागू कर रहा है। इससे तो प्राइवेट डॉक्टरों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। महंगाई हर तरफ बढ़ चुकी है, लेकिन अभी तक किसी भी डॉक्टर ने फीस नहीं बढ़ाई है।
यह होगी फीस
मेट्रो क्षेत्र के अस्पताल
बेड क्षमता - अस्थाई - स्थाई
क्लीनिक - 200 - 1000
01 से 30बेड - 200 - 1000
30 से 100 बेड -400 - 2000
100 बेड से अधिक - 600 - 3000
जांच लैब छोटी - 400 - 2000
जांच लैब बड़ी - 600 - 3000
नगरीय क्षेत्र के अस्पताल
बेड क्षमता - अस्थाई - स्थाई
क्लीनिक - 100 - 500
30 बेड - 100 - 500
30 से 100 बेड -200 - 1000
100 बेड से अधिक - 300 - 1500
जांच लैब छोटी - 200 - 1000
जांच लैब बड़ी - 300 - 1500
ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल
बेड क्षमता - अस्थाई - स्थाई
क्लीनिक - 50 - 250
01 से 30बेड - 50 - 250
30 से 100 बेड -100 - 500
100 बेड से अधिक - 150 - 650
जांच लैब छोटी - 100 - 500
जांच लैब बड़ी - 150 - 650
विज्ञापन
गाजियाबाद। क्लीनिक और अस्पतालों का पंजीकरण अब निशुल्क नहीं होगा। इसके लिए शुल्क तक कर दिया गया है। इसी तरह पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए भी शुल्क देना होगा। शासन से इसके निर्देश स्वास्थ्य विभाग को मिले हैं। इसका असर जिले के 630 क्लीनिक और 342 अस्पतालों पर पड़ेगा। इन्हें 100 रुपये से लेकर 3000 तक शुल्क देना होगा। नवीनीकरण का शुल्क पंजीकरण से आधा होगा।
शासन ने नगरीय, ग्रामीण और मेट्रो शहरों के लिए अलग-अलग फीस तय की है। इसका पोर्टल शासन स्तर से शुरू नहीं होने कारण अभी तक पंजीकरण शुरू नहीं हो पाए है। पंजीकरण शुरू होने पर सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद फीस भी अदा करनी होगी। पंजीकरण प्रभारी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि अभी तक सभी पंजीकरण और नवीनीकरण निशुल्क होते थे। पंजीकरण जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।
विज्ञापन
इसके अध्यक्ष जिलाधिकारी और संयोजक मुख्य चिकित्साधिकारी को शासन ने नियुक्त किया है। उन्होंने बताया कि 50 और उससे ज्यादा बेड वाले अस्पतालों का पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए जिलाधिकारी के पास आवेदन किया जाएगा। 50 बेड से कम वाले अस्पताल, क्लीनिक का पंजीकरण स्वास्थ्य विभाग करेगा। सभी के लिए अग्निशमन और प्रदूषण विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होगा। शासन स्तर से इसके लिए पोर्टल को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
विज्ञापन
नगर निगम का शुल्क अलग से
अस्पतालों का पंजीकरण नगर निगम भी करता है। इसके लिए पहले से शुल्क तय है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ संजीव सिन्हा ने बताया कि नगर निगम का पंजीकरण शुल्क 20 बेड के नर्सिंग होम का दो हजार, 20 बेड से ऊपर वाले नर्सिंग होम का पांच हजार, निजी क्लीनिक पांच हजार, पैथालाजी सेंटर का एक हजार, एक्स-रे क्लीनिक दो हजार, डेंटल क्लीनिक का शुल्क चार हजार रुपये तय है।
निजी डॉक्टरों का मानसिक शोषण है - आईएमए
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग का कहना है कि नगर निगम पहले ही फीस लगा चुका है। अब स्वास्थ्य विभाग भी पंजीकरण की फीस लागू कर रहा है। इससे तो प्राइवेट डॉक्टरों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। महंगाई हर तरफ बढ़ चुकी है, लेकिन अभी तक किसी भी डॉक्टर ने फीस नहीं बढ़ाई है।
यह होगी फीस
मेट्रो क्षेत्र के अस्पताल
बेड क्षमता - अस्थाई - स्थाई
क्लीनिक - 200 - 1000
01 से 30बेड - 200 - 1000
30 से 100 बेड -400 - 2000
100 बेड से अधिक - 600 - 3000
जांच लैब छोटी - 400 - 2000
जांच लैब बड़ी - 600 - 3000
नगरीय क्षेत्र के अस्पताल
बेड क्षमता - अस्थाई - स्थाई
क्लीनिक - 100 - 500
30 बेड - 100 - 500
30 से 100 बेड -200 - 1000
100 बेड से अधिक - 300 - 1500
जांच लैब छोटी - 200 - 1000
जांच लैब बड़ी - 300 - 1500
ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल
बेड क्षमता - अस्थाई - स्थाई
क्लीनिक - 50 - 250
01 से 30बेड - 50 - 250
30 से 100 बेड -100 - 500
100 बेड से अधिक - 150 - 650
जांच लैब छोटी - 100 - 500
जांच लैब बड़ी - 150 - 650