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आर्थिक मदद के लिए 15 घंटे तक मजदूरों ने नहीं उठने दिए शव
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आर्थिक मदद के लिए 15 घंटे तक मजदूरों ने नहीं उठने दिए शव
गाजियाबाद। विजयनगर में नाला निर्माण के दौरान दीवार गिरने से हुई मजदूरों की मौत के बाद उनके शवों को बुधवार तड़के ही एमएमजी अस्पताल के शव गृह में रखा गया। पीड़ितों परिवारों को आर्थिक मदद ना मिलने के कारण 15 घंटे तक मृतकों के सगे-संबंधी और रिश्तेदारों ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए नहीं जाने दिया। इसी दौरान पुलिस मृतकों के रिश्तेदारों पर पंचनामा की प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बनाते रहे लेकिन मजदूर ठेकेदार के मौके पर नहीं आने व आर्थिक मदद ना मिलने की कारण नाराज हुए। इस दौरान पुलिस और मजदूरों की बीच नोंकझोंक हुई। शाम करीब साढ़े पांच बजे आर्थिक मदद मिलने के बाद मृतक के शवों पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।
बुधवार सुबह करीब 8 बजे अस्पताल में मृतकों के सगे-संबंधियों की भीड़ जुट गई जहां पुलिस मौके पर पंचनामा भरने पहुंची। शाम तक पोस्टमार्टम नहीं होने और बिना कोल्ड प्लेटफार्म के शव रखने रहने से शव फूलने लगे और मुंह से छाग आ गए। गुस्साए मजदूर सरकारी अस्पताल में कोल्ड प्लेटफार्म की व्यवस्था ना होने पर भी नाराज हुए। पुलिस का कहना है कि शाम को शवों को हिंडन मोर्चरी ले जाने के बाद प्रशासन के आदेश पर देर रात पोस्टमार्टम कराया गया।
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- मौके पर नहीं पहुंचे कंपनी के ठेकेदार
बुधवार सुबह से पीड़ित मजदूर अस्पताल में एकजुट थे जहां वह कंपनी के ठेकेदार शशीकांत त्यागी को मौके पर बुलाने के लिए फोन मिलाते रहे। आरोप है कि ठेकेदार बार-बार कुछ देर में आने की बात कहता रहा। दोपहर बाद ठेकेदार ने अपने कर्मचारियों को मौके पर भेजकर मजदूरों को आर्थिक मदद देने का संदेश भेजा लेकिन मजदूर नहीं माने। इसके बाद वह कुछ लोगों से अस्पताल के बाहर किसी अलग स्थान पर मिला और मदद का आश्वासन दिया।
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गाजियाबाद। विजयनगर में नाला निर्माण के दौरान दीवार गिरने से हुई मजदूरों की मौत के बाद उनके शवों को बुधवार तड़के ही एमएमजी अस्पताल के शव गृह में रखा गया। पीड़ितों परिवारों को आर्थिक मदद ना मिलने के कारण 15 घंटे तक मृतकों के सगे-संबंधी और रिश्तेदारों ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए नहीं जाने दिया। इसी दौरान पुलिस मृतकों के रिश्तेदारों पर पंचनामा की प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बनाते रहे लेकिन मजदूर ठेकेदार के मौके पर नहीं आने व आर्थिक मदद ना मिलने की कारण नाराज हुए। इस दौरान पुलिस और मजदूरों की बीच नोंकझोंक हुई। शाम करीब साढ़े पांच बजे आर्थिक मदद मिलने के बाद मृतक के शवों पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।
बुधवार सुबह करीब 8 बजे अस्पताल में मृतकों के सगे-संबंधियों की भीड़ जुट गई जहां पुलिस मौके पर पंचनामा भरने पहुंची। शाम तक पोस्टमार्टम नहीं होने और बिना कोल्ड प्लेटफार्म के शव रखने रहने से शव फूलने लगे और मुंह से छाग आ गए। गुस्साए मजदूर सरकारी अस्पताल में कोल्ड प्लेटफार्म की व्यवस्था ना होने पर भी नाराज हुए। पुलिस का कहना है कि शाम को शवों को हिंडन मोर्चरी ले जाने के बाद प्रशासन के आदेश पर देर रात पोस्टमार्टम कराया गया।
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- मौके पर नहीं पहुंचे कंपनी के ठेकेदार
बुधवार सुबह से पीड़ित मजदूर अस्पताल में एकजुट थे जहां वह कंपनी के ठेकेदार शशीकांत त्यागी को मौके पर बुलाने के लिए फोन मिलाते रहे। आरोप है कि ठेकेदार बार-बार कुछ देर में आने की बात कहता रहा। दोपहर बाद ठेकेदार ने अपने कर्मचारियों को मौके पर भेजकर मजदूरों को आर्थिक मदद देने का संदेश भेजा लेकिन मजदूर नहीं माने। इसके बाद वह कुछ लोगों से अस्पताल के बाहर किसी अलग स्थान पर मिला और मदद का आश्वासन दिया।
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