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फ्लैट का नंबर बदलकर बैंक से लिया लोन, फिर बेच दिया
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फ्लैट का नंबर बदलकर बैंक से लिया लोन, फिर बेच दिया
गाजियाबाद। रेड एप्पल, मंजू जे इंफ्रास्ट्रक्चर समेत 50 कंपनी बनाकर 100 करोड़ की धोखाधड़ी में एक और तरीके से फर्जीवाड़ा कर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने बिके हुए फ्लैट का नंबर बदलकर उसकी असल कीमत से ज्यादा का बैंक लोन लेकर किसी और को फिर से बेच दिया। पीड़ित को इसकी जानकारी दो साल बाद बैंक से नोटिस आने पर हुई। मामले में पीड़ित ने मसूरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
मसूरी थाना के शताब्दीपुरम निवासी मनीष कुमार सैनी का कहना है कि उनके पिता ने प्रदीप चौधरी से शताब्दीपुरम में 2018 में 19 लाख रुपये का एक फ्लैट खरीदा था। 2018 से ही वह फ्लैट के मालिक हैं। हालांकि इस फ्लैट को प्रदीप चौधरी ने उन्हें बेचने से पहले 2012 में मंजू जे इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिकारी एसके गौड़ से खरीदा था। प्रदीप चौधरी मंजू जे इंफ्रास्ट्रेक्चर कंपनी के निदेशकों के यहां चालक था। सभी ने सांठगांठ कर किसी और के फ्लैट का नंबर बदलकर उस फ्लैट की कीमत से ज्यादा एसबीआई से लोन ले लिया जो जमा नहीं किया गया। फ्लैट खरीदने के दो साल बाद 2020 में जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से बैंक अधिकारी फ्लैट पर कब्जा लेने आए तो उन्हें फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी होने की जानकारी हुई। पहले ही 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में 23 आरोपियों के खिलाफ पहले ही 51 मामले दर्ज हो चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही इस फर्जीवाड़े में शामिल बैंक अधिकारियों को भी चिन्हित किया जा रहा है। एसआईटी गठित कर कार्रवाई तेज की जाएगी।
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गाजियाबाद। रेड एप्पल, मंजू जे इंफ्रास्ट्रक्चर समेत 50 कंपनी बनाकर 100 करोड़ की धोखाधड़ी में एक और तरीके से फर्जीवाड़ा कर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने बिके हुए फ्लैट का नंबर बदलकर उसकी असल कीमत से ज्यादा का बैंक लोन लेकर किसी और को फिर से बेच दिया। पीड़ित को इसकी जानकारी दो साल बाद बैंक से नोटिस आने पर हुई। मामले में पीड़ित ने मसूरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
मसूरी थाना के शताब्दीपुरम निवासी मनीष कुमार सैनी का कहना है कि उनके पिता ने प्रदीप चौधरी से शताब्दीपुरम में 2018 में 19 लाख रुपये का एक फ्लैट खरीदा था। 2018 से ही वह फ्लैट के मालिक हैं। हालांकि इस फ्लैट को प्रदीप चौधरी ने उन्हें बेचने से पहले 2012 में मंजू जे इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिकारी एसके गौड़ से खरीदा था। प्रदीप चौधरी मंजू जे इंफ्रास्ट्रेक्चर कंपनी के निदेशकों के यहां चालक था। सभी ने सांठगांठ कर किसी और के फ्लैट का नंबर बदलकर उस फ्लैट की कीमत से ज्यादा एसबीआई से लोन ले लिया जो जमा नहीं किया गया। फ्लैट खरीदने के दो साल बाद 2020 में जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से बैंक अधिकारी फ्लैट पर कब्जा लेने आए तो उन्हें फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी होने की जानकारी हुई। पहले ही 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में 23 आरोपियों के खिलाफ पहले ही 51 मामले दर्ज हो चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही इस फर्जीवाड़े में शामिल बैंक अधिकारियों को भी चिन्हित किया जा रहा है। एसआईटी गठित कर कार्रवाई तेज की जाएगी।
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