{"_id":"60aaa9f58ebc3e9ad03d5d20","slug":"ghaziabad-ghaziabad-city-news-gbd219176285","type":"story","status":"publish","title_hn":"नामी कंपनियों के एमडी बनकर रुपये ट्रांसफर कराने वाले दो गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नामी कंपनियों के एमडी बनकर रुपये ट्रांसफर कराने वाले दो गिरफ्तार
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नामी कंपनियों के एमडी बनकर रुपये ट्रांसफर कराने वाले दो गिरफ्तार
गाजियाबाद। नामी कंपनियों के एमडी और मैनेजर बनकर बैंकों से रुपये ट्रांसफर कराने वाले दो ठगों को साइबर सेल और कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बनारस स्थित गोयनका मोटर्स के नाम पर बैंक मैनेजर से 8.75 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। बनारस पुलिस ने एनसीआर पोर्टल के माध्यम से स्थानीय पुलिस से मदद मांगी थी। उसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने आरोपियों से नौ चेकबुक, आठ एटीएम कार्ड, दो मोबाइल फोन और कार बरामद किए हैं। मुख्य आरोपी लोनी से हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
क्षेत्राधिकारी कविनगर एवं साइबर सेल नोडल अभय कुमार मिश्र बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान लोनी निवासी अरुण कुमार फौजी उर्फ रवि और उस्मानपुुर दिल्ली निवासी तरुण शर्मा उर्फ गुड्डू के रूप में हुई है। अरुण घटना का मुख्य आरोपी है। बताया कि आरोपियों ने बनारस स्थित गोयनका मोटर्स के नाम पर बैंक मैनेजर से 8.75 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। जिसकी शिकायत बनारस के थाने में दर्ज है। बनारस पुलिस ने एनसीआर पोर्टल के माध्यम से स्थानीय पुलिस से मदद मांगी थी। जिसके आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में लोनी थानाक्षेत्र में हुई हत्या के मामले में अरुण और उसका दोस्त विनय यादव जेल गए थे। जेल से आने के बाद दोनों ने ठगी का धंधा शुरू कर दिया था। ठगी गई रकम के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया था। जिसके बाद से अरुण और विनय अलग अलग गैंग बनाकर ठगी धंधा करने लगे थे। बीते साल दिसंबर माह में साइबर सेल की टीम ने नगर कोतवाली पुलिस के साथ मिलकर अरुण के साथी विनय और उसके गैंग के 9 लोगों को ठगी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
जेल में रहने के दौरान अरुण और विनय यादव की मुलाकात चर्चित वीरेन्द्र साहू नामक ठग से हुई थी। साहू ने ही उन दोनों को ठगी की विद्या का ज्ञान दिया था। पूछताछ में अरुण ने वीरेन्द्र साहू को अपना गुरु बताया है। पुलिस का कहना है कि जेल से आने के बाद अरुण और विनय एक साथ ठगी का धंधा करते थे। विवाद होने पर दोनों अलग हो गए थे। वहीं, पकड़ा गया तरुण शर्मा रकम ट्रांसफर कराने के लिए खातों की व्यवस्था करता है। साथ ही
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- नामी कंपनियों से मिलती जुलती बनाते हैं मेल आईडी
सीओ ने बताया कि अरुण पैसे वाले लोगों और कार डीलरों को ट्रेस करता था। बताया कि संबंधित कंपनी से मिलती जुलती मेल आईडी बनाता था, जिससे बैंक के अधिकारियों को इस बारे में पता न चल सके। स्पेलिंग में ही कुछ अंतर होता था, जिससे बैंक के अधिकारी समझ ही नहीं
पाते थे और रुपये ट्रांसफर कर देते थे।
- फर्जी आधार कार्ड पर खरीदते थे सिम
आरोपी फर्जी आधार कार्ड पर सिम खरीदते थे। उस सिम से कार डीलर को कॉल करके कार बुक कराने की बात कहकर डीलर का खाता नंबर, बैंक की डिटेल और आईएफएससी कोड जान लेता था। इसके बाद वह अपनी नई सिम में डीलर के नंबर को ट्रू कॉलर पर उसी के नाम और फोटो के साथ सेव कर लेता था। डीलर का नंबर ट्रू कॉलर पर सेव करने के बाद अरुण बैंक मैनेजर को
कॉल करता था। कुछ दिनों की कॉल पर बातचीत के बाद वह बैंक मैनेजर का भरोसा जीत लेता था। उसके बाद रुपये ट्रांसफर करा लेते थे। इसी तरह आरोपियों ने बनारस के गोयनका मोटर्स से ठगी की थी।
- पुलिस अन्य मामलों के बारे में कर रही जानकारी
सीओ ने बताया कि आरोपियों से अन्य इस तरह की घटनाओं के बारे में जानकारी की जा रही है, जिससे पता चल सके अब तक कितनी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया है। साथ ही इन घटनाओं में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। कितने लोग काम कर रहे हैं। गैंग के कुछ लोगों को छिपाकर रखते हैं, जिससे जेल से आने के बाद फिर से ठगी कर सकें। विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
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गाजियाबाद। नामी कंपनियों के एमडी और मैनेजर बनकर बैंकों से रुपये ट्रांसफर कराने वाले दो ठगों को साइबर सेल और कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बनारस स्थित गोयनका मोटर्स के नाम पर बैंक मैनेजर से 8.75 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। बनारस पुलिस ने एनसीआर पोर्टल के माध्यम से स्थानीय पुलिस से मदद मांगी थी। उसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने आरोपियों से नौ चेकबुक, आठ एटीएम कार्ड, दो मोबाइल फोन और कार बरामद किए हैं। मुख्य आरोपी लोनी से हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
क्षेत्राधिकारी कविनगर एवं साइबर सेल नोडल अभय कुमार मिश्र बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान लोनी निवासी अरुण कुमार फौजी उर्फ रवि और उस्मानपुुर दिल्ली निवासी तरुण शर्मा उर्फ गुड्डू के रूप में हुई है। अरुण घटना का मुख्य आरोपी है। बताया कि आरोपियों ने बनारस स्थित गोयनका मोटर्स के नाम पर बैंक मैनेजर से 8.75 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। जिसकी शिकायत बनारस के थाने में दर्ज है। बनारस पुलिस ने एनसीआर पोर्टल के माध्यम से स्थानीय पुलिस से मदद मांगी थी। जिसके आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में लोनी थानाक्षेत्र में हुई हत्या के मामले में अरुण और उसका दोस्त विनय यादव जेल गए थे। जेल से आने के बाद दोनों ने ठगी का धंधा शुरू कर दिया था। ठगी गई रकम के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया था। जिसके बाद से अरुण और विनय अलग अलग गैंग बनाकर ठगी धंधा करने लगे थे। बीते साल दिसंबर माह में साइबर सेल की टीम ने नगर कोतवाली पुलिस के साथ मिलकर अरुण के साथी विनय और उसके गैंग के 9 लोगों को ठगी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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जेल में रहने के दौरान अरुण और विनय यादव की मुलाकात चर्चित वीरेन्द्र साहू नामक ठग से हुई थी। साहू ने ही उन दोनों को ठगी की विद्या का ज्ञान दिया था। पूछताछ में अरुण ने वीरेन्द्र साहू को अपना गुरु बताया है। पुलिस का कहना है कि जेल से आने के बाद अरुण और विनय एक साथ ठगी का धंधा करते थे। विवाद होने पर दोनों अलग हो गए थे। वहीं, पकड़ा गया तरुण शर्मा रकम ट्रांसफर कराने के लिए खातों की व्यवस्था करता है। साथ ही
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- नामी कंपनियों से मिलती जुलती बनाते हैं मेल आईडी
सीओ ने बताया कि अरुण पैसे वाले लोगों और कार डीलरों को ट्रेस करता था। बताया कि संबंधित कंपनी से मिलती जुलती मेल आईडी बनाता था, जिससे बैंक के अधिकारियों को इस बारे में पता न चल सके। स्पेलिंग में ही कुछ अंतर होता था, जिससे बैंक के अधिकारी समझ ही नहीं
पाते थे और रुपये ट्रांसफर कर देते थे।
- फर्जी आधार कार्ड पर खरीदते थे सिम
आरोपी फर्जी आधार कार्ड पर सिम खरीदते थे। उस सिम से कार डीलर को कॉल करके कार बुक कराने की बात कहकर डीलर का खाता नंबर, बैंक की डिटेल और आईएफएससी कोड जान लेता था। इसके बाद वह अपनी नई सिम में डीलर के नंबर को ट्रू कॉलर पर उसी के नाम और फोटो के साथ सेव कर लेता था। डीलर का नंबर ट्रू कॉलर पर सेव करने के बाद अरुण बैंक मैनेजर को
कॉल करता था। कुछ दिनों की कॉल पर बातचीत के बाद वह बैंक मैनेजर का भरोसा जीत लेता था। उसके बाद रुपये ट्रांसफर करा लेते थे। इसी तरह आरोपियों ने बनारस के गोयनका मोटर्स से ठगी की थी।
- पुलिस अन्य मामलों के बारे में कर रही जानकारी
सीओ ने बताया कि आरोपियों से अन्य इस तरह की घटनाओं के बारे में जानकारी की जा रही है, जिससे पता चल सके अब तक कितनी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया है। साथ ही इन घटनाओं में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। कितने लोग काम कर रहे हैं। गैंग के कुछ लोगों को छिपाकर रखते हैं, जिससे जेल से आने के बाद फिर से ठगी कर सकें। विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जा रही है।