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कोरोना मरीजों से मनमानी वसूली की अब होगी जांच
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कोरोना मरीजों से मनमानी वसूली की अब होगी जांच
गाजियाबाद। कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों से इलाज के नाम पर हुई लूट पर अब प्रशासन और जनप्रतिनिधि जागे हैं। करीब 40 दिन के बाद अब इलाज के नाम पर ज्यादा वसूली और कालाबाजारी की जांच कराने का प्रशासन को ध्यान आया है। रेमडेसिविर की कालाबाजारी के बाद अब भाजपा से जुड़े सांसद, मंत्री, विधायक और महानगर अध्यक्ष ने माना है कि संक्रमण के दौर में मरीजों से निजी अस्पतालों ने मनचाहे दाम वसूले। इलाज के नाम पर हुए इस पूरे खेल को लेकर जनता के मन में रोष है। मुख्यमंत्री के नाम लिखे पत्र में जांच करने की मांग की है। प्रशासन की तरफ से गठित जांच कमेटी में राजस्व विभाग के मजिस्ट्रेट, सीएमओ द्वारा नामित एक एसीएमओ, लेखा विभाग से लेखा एवं वित्त अधिकारी को शामिल किया गया है। प्रशासन ने भी माना है कि कोरोना इलाज को लेकर शासन की तरफ से कीमतें तय हैं, लेकिन अस्पतालों में अधिक वसूली की शिकायतें आ रही हैं। कुछ शिकायतें इस तरह की भी हैं कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के तीमारदार व परिजनों पर दबाव बनाकर अवैध रूप से धन वसूली की है।
जांच में भी खेल
प्रशासन ने मरीजों के बिलों से जुड़ी शिकायतों की जांच हेतु कमेटी तो गठित कर दी है लेकिन उस रूप में नहीं जैसा कि जनप्रतिनिधि चाहते थे। प्रशासन की जांच कमेटी सिर्फ शिकायतों पर जांच की बात कही गई है। जबकि जनप्रतिनिधि चाहते हैं कि 10 अप्रैल के बाद प्रतिदिन के हिसाब से हर निजी अस्पताल के उन 10 प्रतिशत बिलों की जांच हो जो एक दिन में सबसे अधिक मूल्य के काटे गए।
कमेटी करेगी रैंडम बिलों की जांच
गठित जांच कमेटी को शिकायत पर रैंडम बिलों की जांच करने का अधिकार होगा। इसके बाद कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट प्रशासन को देगी। अगर जांच में स्पष्ट होती है कि अस्पताल ने निर्धारित दरों से ज्यादा बिल वसूला है तो अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करते हुए कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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तो क्या मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बाद बैठी जांच
रविवार दिन में भाजपा की तरफ से महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के लेटरपैड पर मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखा गया, जिस पर राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग, साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा, विधान परिषद सदस्य दिनेश कुमार गोयल और मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी ने हस्ताक्षर किए। इसमें लिखा गया कि पिछले दिनों प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना इलाज के बिलों को लेकर काफी असंतोष की चर्चा जनता में है लेकिन अभी तक किसी भी अस्पताल से पूछताछ अथवा बिलों को प्रशासन द्वारा देख नहीं गया है। हम सभी का सुझाव है कि प्रत्येक अस्पताल के 10 अप्रैल 2021 के बाद के बिलों की जांच हो। जांच समिति में प्रशासनिक अधिकारी के साथ जन प्रतिनिधि भी शामिल हों और समिति समय सीमा में अपनी आख्या दे। ऐसे माना जा रहा है कि इस पत्र के बाद ही प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की गई। क्योंकि सीएम को लिखे पत्र की प्रति डीएम और सीएमओ को भी की गई। हालांकि प्रशासन की कमेटी में किसी जनप्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया, जिसकी मांग की गई थी।
शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच कमेटी गठित की गई है, जो तीमारदार और अस्पताल प्रबंधन से भी पूछताछ करेगी। शासन से इलाज की दरें निर्धारित हैं, अगर उससे ज्यादा वसूली किए जाने की पुष्टि होती है तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी
हमारी मांग सभी अस्पतालों में बिलों की जांच कराने की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में भी स्पष्ट मांग की है कि प्रत्येक अस्पताल द्वारा प्रतिदिन सबसे अधिक कीमत के काटे गए 5-10 प्रतिशत बिलों की जांच हो। अब अगर शिकायतें पर प्रशासन ऑडिट करेंगा तो काफी अस्पताल बच जाएंगे। - संजीव शर्मा, महानगर अध्यक्ष, भाजपा
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गाजियाबाद। कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों से इलाज के नाम पर हुई लूट पर अब प्रशासन और जनप्रतिनिधि जागे हैं। करीब 40 दिन के बाद अब इलाज के नाम पर ज्यादा वसूली और कालाबाजारी की जांच कराने का प्रशासन को ध्यान आया है। रेमडेसिविर की कालाबाजारी के बाद अब भाजपा से जुड़े सांसद, मंत्री, विधायक और महानगर अध्यक्ष ने माना है कि संक्रमण के दौर में मरीजों से निजी अस्पतालों ने मनचाहे दाम वसूले। इलाज के नाम पर हुए इस पूरे खेल को लेकर जनता के मन में रोष है। मुख्यमंत्री के नाम लिखे पत्र में जांच करने की मांग की है। प्रशासन की तरफ से गठित जांच कमेटी में राजस्व विभाग के मजिस्ट्रेट, सीएमओ द्वारा नामित एक एसीएमओ, लेखा विभाग से लेखा एवं वित्त अधिकारी को शामिल किया गया है। प्रशासन ने भी माना है कि कोरोना इलाज को लेकर शासन की तरफ से कीमतें तय हैं, लेकिन अस्पतालों में अधिक वसूली की शिकायतें आ रही हैं। कुछ शिकायतें इस तरह की भी हैं कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के तीमारदार व परिजनों पर दबाव बनाकर अवैध रूप से धन वसूली की है।
जांच में भी खेल
प्रशासन ने मरीजों के बिलों से जुड़ी शिकायतों की जांच हेतु कमेटी तो गठित कर दी है लेकिन उस रूप में नहीं जैसा कि जनप्रतिनिधि चाहते थे। प्रशासन की जांच कमेटी सिर्फ शिकायतों पर जांच की बात कही गई है। जबकि जनप्रतिनिधि चाहते हैं कि 10 अप्रैल के बाद प्रतिदिन के हिसाब से हर निजी अस्पताल के उन 10 प्रतिशत बिलों की जांच हो जो एक दिन में सबसे अधिक मूल्य के काटे गए।
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कमेटी करेगी रैंडम बिलों की जांच
गठित जांच कमेटी को शिकायत पर रैंडम बिलों की जांच करने का अधिकार होगा। इसके बाद कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट प्रशासन को देगी। अगर जांच में स्पष्ट होती है कि अस्पताल ने निर्धारित दरों से ज्यादा बिल वसूला है तो अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करते हुए कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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तो क्या मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बाद बैठी जांच
रविवार दिन में भाजपा की तरफ से महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा के लेटरपैड पर मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखा गया, जिस पर राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग, साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा, विधान परिषद सदस्य दिनेश कुमार गोयल और मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी ने हस्ताक्षर किए। इसमें लिखा गया कि पिछले दिनों प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना इलाज के बिलों को लेकर काफी असंतोष की चर्चा जनता में है लेकिन अभी तक किसी भी अस्पताल से पूछताछ अथवा बिलों को प्रशासन द्वारा देख नहीं गया है। हम सभी का सुझाव है कि प्रत्येक अस्पताल के 10 अप्रैल 2021 के बाद के बिलों की जांच हो। जांच समिति में प्रशासनिक अधिकारी के साथ जन प्रतिनिधि भी शामिल हों और समिति समय सीमा में अपनी आख्या दे। ऐसे माना जा रहा है कि इस पत्र के बाद ही प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की गई। क्योंकि सीएम को लिखे पत्र की प्रति डीएम और सीएमओ को भी की गई। हालांकि प्रशासन की कमेटी में किसी जनप्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया, जिसकी मांग की गई थी।
शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच कमेटी गठित की गई है, जो तीमारदार और अस्पताल प्रबंधन से भी पूछताछ करेगी। शासन से इलाज की दरें निर्धारित हैं, अगर उससे ज्यादा वसूली किए जाने की पुष्टि होती है तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी
हमारी मांग सभी अस्पतालों में बिलों की जांच कराने की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में भी स्पष्ट मांग की है कि प्रत्येक अस्पताल द्वारा प्रतिदिन सबसे अधिक कीमत के काटे गए 5-10 प्रतिशत बिलों की जांच हो। अब अगर शिकायतें पर प्रशासन ऑडिट करेंगा तो काफी अस्पताल बच जाएंगे। - संजीव शर्मा, महानगर अध्यक्ष, भाजपा