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प्रशासन बोला-सेहत के लिए खतरनाक हैं लंगर, खाली करो सड़क
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प्रशासन बोला-सेहत के लिए खतरनाक हैं लंगर, खाली करो सड़क
गाजियाबाद। प्रशासन ने यूपी गेट पर धरना दे रहे किसानों को धरना स्थल खाली करने के लिए धारा-133 का नोटिस दिया है, उसमें कई तरह के तर्क रखे गए हैं। कहा गया है कि सड़क पर चल रहे लंगर खतरनाक हैं। धरने से शोर हो रहा है, जिससे आम जनमानस की सेहत को नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों के विरोध को भी नोटिस का आधार बनाया गया है। प्रशासन ने पांच को नोटिस जारी किया है। इसमें भारतीय संयुक्त किसान मोर्चा, नरेश टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, राकेश टिकैत राष्ट्रीय प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन, राजेंद्र सिंह बिर्क एवं जगतार सिंह बाजवा का नाम शामिल है। इस मामले में जवाब देने के लिए एक फरवरी की तारीख लगाई है।
अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय के न्यायालय द्वारा धरनारत किसानों को दो महीने बाद आम रास्ते पर गंदगी फैलाने, लंगर में खाना बनने से आग लगने का खतरा और ध्वनि प्रदूषण, सड़क पर कब्जा कर न्यूसेंस फैलाने के आरोप में धारा 133 का नोटिस जारी किया है। अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि यूपी गेट गाजीपुर बार्डर स्थित एनएच-24 थाना कौशांबी हाईवे पर 26 नवंबर 2020 से लगातार सड़क पर अपने समर्थकों के साथ बैठकर सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध कर न्यूसेंस फैलाने का कार्य किया गया है। जिससे गाजियाबाद से नई दिल्ली जाने वाले जनमानस को अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग अवरुद्ध होने से अस्वस्थ व्यक्ति और मरीजों को इलाज आदि में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे जनहानि का खतरा है। दूसरे नंबर पर कहा गया है कि आपके द्वारा सड़क पर किए जा रहे धरना से सड़क के आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे जनसामान्य के स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। तीसरे बिंदु पर लंगर का प्रयोग करने में आग लगने का खतरा बताया गया है। चौथे में कहा गया है कि मुख्य मार्ग पर किए जा रहे धरने पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग से आसपास के अस्पतालों में भर्ती मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे जनहानि हो रही है। वहीं पांचवें बिंदु में कोरोना प्रोटोकाल के उल्लंघन का आरोप लगाया है। कहा गया है कि इससे कोरोना संक्रमण फैलने का जनमानस को खतरा है। छठे बिंदु में भीड़ के एकत्र होने की वजह से कानून व्यवस्था के जटिल स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसलिए निर्देश जारी किया जा रहा है कि सार्वजनिक स्थल को खाली कर दें, अन्यथा प्रशासन वैधानिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
आज जिला जज की अदालत में दाखिल करेंगे निगरानी
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नाहर सिंह यादव ने कहा कि प्रशासन द्वारा 28 जनवरी को धरना स्थल पर धारा 133 व 144 के तहत किसानों और आम जनमानस के शांतिपूर्वक आंदोलन को गाजीपुर बार्डर से रात के अंधेरे में जबरदस्ती हटाने की कोशिश की गई है। इसकी गाजियाबाद के अधिवक्ता कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। नाहर सिंह ने कहा कि किसानों की तरफ से आज तीस जनवरी को जिला न्यायालय में प्रशासन के आदेशों के विरुद्ध निगरानी दाखिल की जाएगी।
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गाजियाबाद। प्रशासन ने यूपी गेट पर धरना दे रहे किसानों को धरना स्थल खाली करने के लिए धारा-133 का नोटिस दिया है, उसमें कई तरह के तर्क रखे गए हैं। कहा गया है कि सड़क पर चल रहे लंगर खतरनाक हैं। धरने से शोर हो रहा है, जिससे आम जनमानस की सेहत को नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों के विरोध को भी नोटिस का आधार बनाया गया है। प्रशासन ने पांच को नोटिस जारी किया है। इसमें भारतीय संयुक्त किसान मोर्चा, नरेश टिकैत राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, राकेश टिकैत राष्ट्रीय प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन, राजेंद्र सिंह बिर्क एवं जगतार सिंह बाजवा का नाम शामिल है। इस मामले में जवाब देने के लिए एक फरवरी की तारीख लगाई है।
अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय के न्यायालय द्वारा धरनारत किसानों को दो महीने बाद आम रास्ते पर गंदगी फैलाने, लंगर में खाना बनने से आग लगने का खतरा और ध्वनि प्रदूषण, सड़क पर कब्जा कर न्यूसेंस फैलाने के आरोप में धारा 133 का नोटिस जारी किया है। अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि यूपी गेट गाजीपुर बार्डर स्थित एनएच-24 थाना कौशांबी हाईवे पर 26 नवंबर 2020 से लगातार सड़क पर अपने समर्थकों के साथ बैठकर सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध कर न्यूसेंस फैलाने का कार्य किया गया है। जिससे गाजियाबाद से नई दिल्ली जाने वाले जनमानस को अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग अवरुद्ध होने से अस्वस्थ व्यक्ति और मरीजों को इलाज आदि में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे जनहानि का खतरा है। दूसरे नंबर पर कहा गया है कि आपके द्वारा सड़क पर किए जा रहे धरना से सड़क के आसपास गंदगी फैल रही है, जिससे जनसामान्य के स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। तीसरे बिंदु पर लंगर का प्रयोग करने में आग लगने का खतरा बताया गया है। चौथे में कहा गया है कि मुख्य मार्ग पर किए जा रहे धरने पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग से आसपास के अस्पतालों में भर्ती मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे जनहानि हो रही है। वहीं पांचवें बिंदु में कोरोना प्रोटोकाल के उल्लंघन का आरोप लगाया है। कहा गया है कि इससे कोरोना संक्रमण फैलने का जनमानस को खतरा है। छठे बिंदु में भीड़ के एकत्र होने की वजह से कानून व्यवस्था के जटिल स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसलिए निर्देश जारी किया जा रहा है कि सार्वजनिक स्थल को खाली कर दें, अन्यथा प्रशासन वैधानिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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आज जिला जज की अदालत में दाखिल करेंगे निगरानी
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नाहर सिंह यादव ने कहा कि प्रशासन द्वारा 28 जनवरी को धरना स्थल पर धारा 133 व 144 के तहत किसानों और आम जनमानस के शांतिपूर्वक आंदोलन को गाजीपुर बार्डर से रात के अंधेरे में जबरदस्ती हटाने की कोशिश की गई है। इसकी गाजियाबाद के अधिवक्ता कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। नाहर सिंह ने कहा कि किसानों की तरफ से आज तीस जनवरी को जिला न्यायालय में प्रशासन के आदेशों के विरुद्ध निगरानी दाखिल की जाएगी।
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