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एनएच-9 पर सीवर के लिए खोदे गड्ढे में गिरकर मजदूर की मौत
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वन मार्ट मॉल के मालिक के खिलाफ डीएम ने बैठाई जांच, नोटिस
गाजियाबाद। वसुंधरा सेक्टर-6 स्थित वन मार्ट मॉल के मालिक ने पहले प्लॉट पर लोन लेकर मॉल खड़ा कर दिया और फिर दुकानें बेचकर झूठी एनओसी दे दी।डीएम के आदेश पर मैसर्स वन सिटी ग्रुप के मालिक को सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने नोटिस जारी कर 14 अगस्त को पेश होने को कहा है। मॉल में दुकान संचालित कर रहे लोगों की तरफ से शिकायत किए जाने के बाद जांच बैठाई गई है। निबंधन विभाग का कहना है कि अगर इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिली तो विभागीय जांच शुरू कर दी जाएगी।
सहायक महानिरीक्षक निबंधन कृष्ण कुमार मिश्र का कहना है कि मॉल में दुकान खरीदने वाले लोगों को मैसर्स वन सिटी ग्रुप की तरफ से यह एनओसी दी गई कि संबंधित संपत्ति सभी प्रकार के कर्ज, देनदारियों व विवादों से मुक्त है। संपत्ति पर कर्ज का खुलासा उस वक्त हुआ जब एक दुकानदार ने लोन के लिए आवेदन किया। बैंक ने संबंधित संपत्ति की जांच करने के बाद बताया कि उस पर पहले से ही सात करोड़ 67 लाख रुपये का ऋण है। इसके साथ ही पूरे मॉल की जमीन पर भी लोन लिया गया है। इस मामले में डीएम से जांच कर आख्या प्रेषित करने का आदेश दिया। इसी क्रम में निबंधन विभाग ने भूपेंद्र नाथ एवं समस्त दुकानदारों को भी अवगत कराया है। साथ ही मॉल संचालक से सभी साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है। उधर, निबंधन विभाग ने बैंकों के माध्यम से ऐसी अन्य संपत्तियों का भी ब्यौरा मांगा है जिन पर एनओसी दे दी गई हो। विभाग का मानना है कि शहर में इस तरह का बड़ा खेल चल रहा है। पहले संपत्ति पर ऋण लेकर मॉल या फ्लैट तैयार किए गए। उसके बाद जब संबंधित संपत्ति का मालिक लोन लेने के लिए जाता है तो पता चलता है कि उनकी संपत्ति पर निर्माण ही लोन लेकर किया गया है।
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गाजियाबाद। वसुंधरा सेक्टर-6 स्थित वन मार्ट मॉल के मालिक ने पहले प्लॉट पर लोन लेकर मॉल खड़ा कर दिया और फिर दुकानें बेचकर झूठी एनओसी दे दी।डीएम के आदेश पर मैसर्स वन सिटी ग्रुप के मालिक को सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने नोटिस जारी कर 14 अगस्त को पेश होने को कहा है। मॉल में दुकान संचालित कर रहे लोगों की तरफ से शिकायत किए जाने के बाद जांच बैठाई गई है। निबंधन विभाग का कहना है कि अगर इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिली तो विभागीय जांच शुरू कर दी जाएगी।
सहायक महानिरीक्षक निबंधन कृष्ण कुमार मिश्र का कहना है कि मॉल में दुकान खरीदने वाले लोगों को मैसर्स वन सिटी ग्रुप की तरफ से यह एनओसी दी गई कि संबंधित संपत्ति सभी प्रकार के कर्ज, देनदारियों व विवादों से मुक्त है। संपत्ति पर कर्ज का खुलासा उस वक्त हुआ जब एक दुकानदार ने लोन के लिए आवेदन किया। बैंक ने संबंधित संपत्ति की जांच करने के बाद बताया कि उस पर पहले से ही सात करोड़ 67 लाख रुपये का ऋण है। इसके साथ ही पूरे मॉल की जमीन पर भी लोन लिया गया है। इस मामले में डीएम से जांच कर आख्या प्रेषित करने का आदेश दिया। इसी क्रम में निबंधन विभाग ने भूपेंद्र नाथ एवं समस्त दुकानदारों को भी अवगत कराया है। साथ ही मॉल संचालक से सभी साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है। उधर, निबंधन विभाग ने बैंकों के माध्यम से ऐसी अन्य संपत्तियों का भी ब्यौरा मांगा है जिन पर एनओसी दे दी गई हो। विभाग का मानना है कि शहर में इस तरह का बड़ा खेल चल रहा है। पहले संपत्ति पर ऋण लेकर मॉल या फ्लैट तैयार किए गए। उसके बाद जब संबंधित संपत्ति का मालिक लोन लेने के लिए जाता है तो पता चलता है कि उनकी संपत्ति पर निर्माण ही लोन लेकर किया गया है।
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