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बैंक के बंधक संपति बेच पांच करोड़ का फर्जीवाड़ा, दंपती गिरफ्तार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 12:55 AM IST
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ghaziabad crime news
बैंक के बंधक संपत्ति बेच पांच करोड़ का फर्जीवाड़ा, दंपती गिरफ्तार
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गाजियाबाद/मसूरी। बैंकों से साठगांठ कर पांच करोड़ से अधिक के धोखाधड़ी के आरोप में मसूरी पुलिस ने इंद्रजीत और उसकी पत्नी सुमन को गिरफ्तार किया है। मूलरूप से थाना जानी, मेरठ के गांव रघुनाथपुर निवासी इंद्रजीत वर्तमान में राजनगर एक्सटेंशन की केडब्ल्यू सृष्टि सोसायटी में रहता है। एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि आरोपी दंपती फर्जीवाड़ा करते थे। लोन के बदले बंधक संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेच देते थे। इसके बाद खरीदारों को भी उसी संपत्ति पर लोन दिला देते थे।
एसपी ग्रामीण ने बताया कि इंद्रजीत और उसकी पत्नी सुमन के खिलाफ मसूरी और कविनगर थाने में धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। मसूरी थाने में प्रथम तल नीतिखंड इंदिरापुरम निवासी संजू सिंह पत्नी ओमप्रकाश सिंह ने दर्ज कराया था। उनके मुताबिक उन्होंने जून 2018 में इंद्रजीत से मसूरी के आकाश नगर स्थित एक मकान दो करोड़ रुपए में खरीदा था। इंद्रजीत ने उन्हें सेक्टर-2 नोएडा स्थित एचएफएल बैंक मैं तैनात अपने सहायक प्रबंधक से मिलवाया और मकान पर एक करोड़ 47 लाख रुपए का लोन भी दिलवा दिया। नवंबर 2019 को मकान के बाहर पंजाब नेशनल बैंक का नोटिस देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि मकान पर उस पर तीन करोड़ 52 लाख रुपए का लोन बकाया था। यह लोन अहलावत ट्रेडर्स द्वारा लिया गया था, जो इंद्रजीत की पत्नी सुनीता के नाम से है। दूसरा मुकदमा गोविंदपुरम स्थित गोविंद विहार अपार्टमेंट के फ्लैटों के खरीदारों ने दिसंबर 2019 में कविनगर थाने में केस दर्ज कराया था। उनका कहना था कि उन्होंने इंद्रजीत से उक्त फ्लैट खरीदे थे। कुछ दिनों बाद पंजाब नेशनल बैंक की चंद्रनगर शाखा का नोटिस उनके फ्लैट की बिल्डिंग पर चस्पा मिला। उसमें इंद्रजीत की पत्नी सुनीता की मैसर्स अहलावत ट्रेडर्स कंपनी द्वारा जून 2016 में तीन करोड़ का लोन लेने का जिक्र था, जो ब्याज समेत 3 करोड़ 61 लाख रुपए का हो गया था। पीड़ितों का आरोप था कि उनके मालिकाना हक वाली संपति को इंद्रजीत ने बैंक में बंधक रखकर लोन ले लिया।
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पुलिस के रडार पर बैंक के अधिकारी-कर्मचारी
पुलिस का कहना है कि फर्जीवाड़े को बैंक कर्मियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। बैंक में बंधक संपत्ति पर दूसरे बैंक द्वारा लोन दिया जाना अपने आप में संदेहास्पद है। एसपी ग्रामीण का कहना है कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत की जांच की जा रही है। जो भी फर्जीवाड़े में शामिल होगा उसे मुकदमे में शामिल कर जेल भेजा जाएगा। मामले की गहनता से जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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