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गाजियाबाद: समूह बीमा का पैसा दिलाने का झांसा देकर ठगने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़
Sat, 28 Aug 2021 10:25 PM IST
प्राची प्रियम
माई सिटी रिपोर्टर, साहिबाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, साहिबाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 28 Aug 2021 10:25 PM IST
सार
पुलिस ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा 2012 से चल रहा था। अब तक 10 हजार लोगों से करोड़ों रुपये ठग चुके हैं आरोपी। वे सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकार बनाते थे।
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विस्तार
इंदिरापुरम पुलिस और साइबर सेल गाजियाबाद की टीम ने सरकारी विभागों से रिटायर्ड अधिकारियों व कर्मचारियों से समूह बीमा का रुपया दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉलसेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत तीन को गिरफ्तार कर 14 मोबाइल, 33 विभिन्न खातों के एटीएम कार्ड, एक कार, पैनकार्ड, आधार कार्ड, चेकबुक, पासबुक और डाटा शीट बरामद की है। गिरोह 2012 से सक्रिय है और दस हजार से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।
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एसपी सिटी सेकेंड ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि वैशाली स्थित रामप्रस्था ग्रीन सोसायटी में नीरज शर्मा परिवार के साथ रहते हैं। वह ओएनजीसी से रिटायर्ड हैं। इंदिरापुरम थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके पास एक नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ईपीएफओ आफिस का कर्मचारी बताते हुए उनके लिए एक समूह पॉलिसी का रुपये दिलाने का झांसा दिया।
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इसके बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 23 बार में करीब 11 लाख रुपये ठग लिए। उन्होंने मामले में इंदिरापुरम पुलिस को शातिर ठगों का नंबर उपलब्ध कराया था। इसके आधार पर साइबर सेल गाजियाबाद और इंदिरापुरम पुलिस ने ठगी के कॉलसेंटर का भंडाफोड़ कर सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी नोएडा के गौड़ ग्रीन सिटी में फ्लैट में कॉलसेंटर चला रहे थे।
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एसपी सिटी ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी घनश्याम निवासी नोएडा सेक्टर 49, राहुल निवासी रबूपुरा नोएडा हाल पता खोड़ा, और धर्मेंद्र निवासी नोएडा सेक्टर 20 हैं। गिरोह के सरगना धनश्याम और राहुल हैं। राहुल बीकॉम पास है और घनश्याम 12वीं पास है। 2012 से इस ठगी के कॉलसेंटर को चला रहे हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह दस हजार से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं। हैदराबाद से 2015 में दस लाख रुपये की ठगी में घनश्याम जेल जा चुका है।
ऐसे करते हैं ठगी
सीओ इंदिरापुरम एवं साइबर सेल अभय कुमार मिश्र ने बताया कि आरोपी सरकारी विभाग से रिटायर्ड कर्मचारियों और अधिकारियों से ईपीएफ के तहत समूह बीमा पूरा होने पर रुपये दिलाने का झांसा देते थे। इसके साथ ही कई डिटेल भी ले लेते थे। प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 50 हजार रुपये से लेकर जितने रुपये वसूल पाता थे अपने खाते में डलवा लेते थे।
सीओ ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि मुंबई के एक रिटायर्ड अधिकारी के खाते से शातिरों ने डेढ़ करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके लिए वहां की साइबर सेल की टीम से संपर्क कर जानकारी जुटाई जा रही है। सबसे अधिक ठगी महाराष्ट्र और गुजरात के लोगों से की गई है। पुलिस सभी का डाटा निकलवा रही है। सिम और डाटा उपलब्ध कराने का काम सुमित और अंकित का था। जो फरार हैं।
ऑनलाइन खरीदते थे डेटा, 10 हजार रुपये में लेते थे खाता
एसआई साइबर सेल सुमित कुमार ने बताया कि शातिर एक कॉल पर सर्विस उपलब्ध कराने वाली कंपनी से डाटा देने वाले वेंडरों से संपर्क करते थे। उनसे डेटा खरीदते थे। 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों के नाम नंबर निकालकर फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए सिम कार्ड से कॉल कर उनसे संपर्क करते थे।
इसके बाद कॉल सेंटर की महिला उनसे संपर्क कर झांसे में लेती थी। वहीं सुमित कुमार ने यह भी बताया कि आरोपी झुग्गियों और गरीब लोगों को दस हजार रुपये देकर उनसे दस्तावेज लेकर बैंकों में खाते खुलवा लेते थे। खाते का एटीएम कार्ड, पास बुक और चेक बुक अपने पास रखते थे। ठगी के रुपये को इन्हीं खातों में ट्रांसफर कराते थे।
इसके बाद कॉल सेंटर की महिला उनसे संपर्क कर झांसे में लेती थी। वहीं सुमित कुमार ने यह भी बताया कि आरोपी झुग्गियों और गरीब लोगों को दस हजार रुपये देकर उनसे दस्तावेज लेकर बैंकों में खाते खुलवा लेते थे। खाते का एटीएम कार्ड, पास बुक और चेक बुक अपने पास रखते थे। ठगी के रुपये को इन्हीं खातों में ट्रांसफर कराते थे।