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हाईटेक 573 करोड़ का शुल्क माफ करके फंसे जीडीए के अधिकारी
सार
573 करोड़ का शुल्क माफ करके फंसे जीडीए के अधिकारीगाजियाबाद।विजिलेंस ने पूछा है कि भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क किसके आदेश पर माफ किया गया?हाईटेक टाउनशिप योजना वेव ग्रुप की है।2007-08 में टाउनशिप के लिए भू-उपयोग परिवर्तन को मंजूरी दी गई।3. 2010 के अप्रैल महीने में एक और शासनादेश आया।
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विस्तार
573 करोड़ का शुल्क माफ करके फंसे जीडीए के अधिकारी
गाजियाबाद। हाईटेक टाउनशिप में कृषि जमीन का भू-उपयोग आवासीय में परिवर्तन करने के मामले में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अफसरों की गर्दन फंस गई है। 2007-08 में तैनात रहे अफसरों ने भू-उपयोग परिवर्तन को मंजूरी दी लेकिन इसके बदले इसका शुल्क नहीं लिया। भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह शुल्क 573 करोड़ रुपये बताया गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन ने विजिलेंस जांच शुरु कराई है। इसकी जानकारी होते ही प्राधिकरण के कर्मचारी हाईटेक टाउनशिप से जुड़े दस्तावेज खंगालने में जुट गए हैं। विजिलेंस ने पूछा है कि भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क किसके आदेश पर माफ किया गया?
हाईटेक टाउनशिप योजना वेव ग्रुप की है। इसके तहत दो टाउनशिप विकसित की जा रही हैं। वेव सिटी और सन सिटी। इन योजनाओं के लिए ही भू-उपयोग परिवर्तन किया गया और इसका शुल्क नहीं लिया गया। 2017 में आई कैग की रिपोर्ट में साफ गया है कि शुल्क न लिए जाने से प्राधिकरण को साफ तौर पर 573 करोड़ का नुकसान हुआ। यह रिपोर्ट पांच साल तक शासन में दबी रही लेकिन इसी को आधार पर बनाकर कई लोग लगातार शिकायत करते रहे। इस पर शासन ने पिछले दिनों विजिलेंस जांच कराने का आदेश जारी कर दिया।
इस आदेश से वे सभी अफसर जांच के घेरे में आ गए जिन्होंने भू-उपयोग परिवर्तन करने से लेकर इसका शुल्क जमा न कराने तक की अनुमति दी। प्राधिकरण में उस समय तैनात रहे कर्मचारियों का कहना है कि तत्कालीन अफसरों ने शासन से भी पत्राचार किया था। वहां से कई निर्देश आए थे। इनका हवाला देकर ही भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नहीं लिया गया था। अब जांच का आदेश आते ही उन सभी पत्रों और उनसे जुड़े दस्तावेज को खंगाला जा रहा है।
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2005 की योजना, 2017 में ऑडिट और अब जांच
1. हाईटेक टाउनशिप योजना को शासन ने 2005 में मंजूरी दी। गाजियाबाद में एनएच-9 के बराबर में दो योजनाओं को मंजूरी मिली वेव सिटी और सन सिटी। योजना के लिए चिन्हित पूरी जमीन उस समय कृषि की थी।
2. 2006-2007 में शासन ने साफ किया कि भू उपयोग कृषि से आवासीय करने के लिए परिवर्तन शुल्क लिया जाएगा। यह 2005 में आए मास्टर प्लान-2021 के आधार पर होगा। 2007-08 में टाउनशिप के लिए भू-उपयोग परिवर्तन को मंजूरी दी गई।
3. 2010 के अप्रैल महीने में एक और शासनादेश आया। इसके तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क लेने की बाध्यता हटा दी गई। लेकिन, यह हाईटेक टाउनशिप पर लागू नहीं था क्योंकि इसे मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी।
4. 2017 मई में कैग ऑडिट में साफ कर दिया गया कि भू उपयोग परिवर्तन शुल्क लिया जाना चाहिए था। यह 573 करोड़ रुपये था। ऑडिट में यह भी बताया कि कृषि से आवासीय की गई भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां भी की जा रही हैं।
विजिलेंस ने पूछे सवाल
1. भू-उपयोग परिवर्तन किस आधार पर किया गया? इसके लिए जरूरी दस्तावेज क्या क्या थे? ये सभी उपलब्ध कराए जाएं।
2. भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क न लेने का आदेश किसने दिया? यह किस आधार पर दिया गया? क्या इसके लिए शासन से मंजूरी ली गई?
3. हाईटेक टाउनशिप विकसित करने के लिए शासन ने जो गाइडलाइन दी, उसका पालन किया गया या नहीं?
4. हाईटेक टाउनशिप के लिए भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान जीडीए में कौन-कौन अधिकारी तैनात रहे?
(इस तरह के कुल 39 सवाल विजिलेंस ने पूछे हैं, इनसे संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं)
अफसरों ने साधी चुप्पी
573 करोड़ के गोलमाल पर जीडीए के अफसरों ने चुप्पी साध ली है। उपाध्यक्ष आरके सिंह का कहना है कि उन्हें विजिलेंस जांच की जानकारी ही नहीं है। हो सकता है कि शासन स्तर से जांच हो रही है, इसलिए स्थानीय स्तर पर जानकारी न हो। अन्य अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में शासन से ही जानकारी की जा सकती है।
हम निमय से चलते हैं
भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क माफ किए जाने के सवाल पर वेव ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा कि ग्रुप नियम और कानून का पालन करता है। शासन और प्रशासन ने जो मानदंड तय किए हैं, उनके अनुसार ही टाउनशिप का काम किया जा रहा है।
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गाजियाबाद। हाईटेक टाउनशिप में कृषि जमीन का भू-उपयोग आवासीय में परिवर्तन करने के मामले में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अफसरों की गर्दन फंस गई है। 2007-08 में तैनात रहे अफसरों ने भू-उपयोग परिवर्तन को मंजूरी दी लेकिन इसके बदले इसका शुल्क नहीं लिया। भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह शुल्क 573 करोड़ रुपये बताया गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन ने विजिलेंस जांच शुरु कराई है। इसकी जानकारी होते ही प्राधिकरण के कर्मचारी हाईटेक टाउनशिप से जुड़े दस्तावेज खंगालने में जुट गए हैं। विजिलेंस ने पूछा है कि भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क किसके आदेश पर माफ किया गया?
हाईटेक टाउनशिप योजना वेव ग्रुप की है। इसके तहत दो टाउनशिप विकसित की जा रही हैं। वेव सिटी और सन सिटी। इन योजनाओं के लिए ही भू-उपयोग परिवर्तन किया गया और इसका शुल्क नहीं लिया गया। 2017 में आई कैग की रिपोर्ट में साफ गया है कि शुल्क न लिए जाने से प्राधिकरण को साफ तौर पर 573 करोड़ का नुकसान हुआ। यह रिपोर्ट पांच साल तक शासन में दबी रही लेकिन इसी को आधार पर बनाकर कई लोग लगातार शिकायत करते रहे। इस पर शासन ने पिछले दिनों विजिलेंस जांच कराने का आदेश जारी कर दिया।
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इस आदेश से वे सभी अफसर जांच के घेरे में आ गए जिन्होंने भू-उपयोग परिवर्तन करने से लेकर इसका शुल्क जमा न कराने तक की अनुमति दी। प्राधिकरण में उस समय तैनात रहे कर्मचारियों का कहना है कि तत्कालीन अफसरों ने शासन से भी पत्राचार किया था। वहां से कई निर्देश आए थे। इनका हवाला देकर ही भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नहीं लिया गया था। अब जांच का आदेश आते ही उन सभी पत्रों और उनसे जुड़े दस्तावेज को खंगाला जा रहा है।
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2005 की योजना, 2017 में ऑडिट और अब जांच
1. हाईटेक टाउनशिप योजना को शासन ने 2005 में मंजूरी दी। गाजियाबाद में एनएच-9 के बराबर में दो योजनाओं को मंजूरी मिली वेव सिटी और सन सिटी। योजना के लिए चिन्हित पूरी जमीन उस समय कृषि की थी।
2. 2006-2007 में शासन ने साफ किया कि भू उपयोग कृषि से आवासीय करने के लिए परिवर्तन शुल्क लिया जाएगा। यह 2005 में आए मास्टर प्लान-2021 के आधार पर होगा। 2007-08 में टाउनशिप के लिए भू-उपयोग परिवर्तन को मंजूरी दी गई।
3. 2010 के अप्रैल महीने में एक और शासनादेश आया। इसके तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क लेने की बाध्यता हटा दी गई। लेकिन, यह हाईटेक टाउनशिप पर लागू नहीं था क्योंकि इसे मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी।
4. 2017 मई में कैग ऑडिट में साफ कर दिया गया कि भू उपयोग परिवर्तन शुल्क लिया जाना चाहिए था। यह 573 करोड़ रुपये था। ऑडिट में यह भी बताया कि कृषि से आवासीय की गई भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां भी की जा रही हैं।
विजिलेंस ने पूछे सवाल
1. भू-उपयोग परिवर्तन किस आधार पर किया गया? इसके लिए जरूरी दस्तावेज क्या क्या थे? ये सभी उपलब्ध कराए जाएं।
2. भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क न लेने का आदेश किसने दिया? यह किस आधार पर दिया गया? क्या इसके लिए शासन से मंजूरी ली गई?
3. हाईटेक टाउनशिप विकसित करने के लिए शासन ने जो गाइडलाइन दी, उसका पालन किया गया या नहीं?
4. हाईटेक टाउनशिप के लिए भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान जीडीए में कौन-कौन अधिकारी तैनात रहे?
(इस तरह के कुल 39 सवाल विजिलेंस ने पूछे हैं, इनसे संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं)
अफसरों ने साधी चुप्पी
573 करोड़ के गोलमाल पर जीडीए के अफसरों ने चुप्पी साध ली है। उपाध्यक्ष आरके सिंह का कहना है कि उन्हें विजिलेंस जांच की जानकारी ही नहीं है। हो सकता है कि शासन स्तर से जांच हो रही है, इसलिए स्थानीय स्तर पर जानकारी न हो। अन्य अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में शासन से ही जानकारी की जा सकती है।
हम निमय से चलते हैं
भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क माफ किए जाने के सवाल पर वेव ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा कि ग्रुप नियम और कानून का पालन करता है। शासन और प्रशासन ने जो मानदंड तय किए हैं, उनके अनुसार ही टाउनशिप का काम किया जा रहा है।