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Ghaziabad News: जीडीए की व्यावसायिक संपत्तियों के रेट बढ़ाने पर लगी मुहर
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गाजियाबाद। इंदिरापुरम, मधुबन-बापूधाम और इंद्रप्रस्थ समेत कई अन्य कॉलोनियों में जीडीए की व्यावसायिक संपत्ति खरीदना अब महंगा हो जाएगा। लोगों को प्रति वर्गमीटर 8700 रुपये का ज्यादा भुगतान करना होगा। दरअसल, प्रताप विहार और राजेंद्र नगर में पूर्व में बने ईडब्ल्यूएस भवनों पर अतिरिक्त खर्च हुए 27.21 करोड़ रुपये की रिकवरी के लिए यह निर्णय लिया गया है। जीडीए की ओर से सोमवार को यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा गया, जिस पर बोर्ड ने सहमति दे दी। वहीं, बोर्ड ने वेवसिटी की संशोधित डीपीआर और ले आउट प्लान को सशर्त मंजूरी दे दी है।
सोमवार शाम चार बजे मेरठ में मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. की अध्यक्षता में हुई जीडीए बोर्ड की बैठक में जीडीए अधिकारियों की ओर से 10 प्रस्ताव रखे गए थे। इसमें वर्ष 2010 में प्रताप विहार में 348 और राजेंद्र नगर में बनाए गए 560 ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण पर खर्च हुई 27.21 करोड़ की अतिरिक्त रकम से संबंधित प्रस्ताव सबसे प्रमुख था। दरअसल, शासन ने इन भवनों की कीमत आवंटी के लिए महज दो लाख रुपये निर्धारित की थी, जबकि इनकी लागत ज्यादा थी। इसकी वजह से जीडीए को अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ी थी, लेकिन रिकवरी नहीं हुई थी। इस पर ऑडिट आपत्ति लगने की वजह से जीडीए को इस रकम की रिकवरी का रास्ता बनाना पड़ा। इसके लिए जीडीए ने व्यावसायिक भूखंडों की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया। मंथन के बाद इसे स्वीकृति मिल गई। इसका असर जीडीए की 31500 वर्ग मीटर व्यावसायिक जमीन के खरीदारों पर पड़ेगा। इनका आरक्षित मूल्य अब 8700 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से बढ़ जाएगा।
इसके अलावा दूसरा बड़ा प्रस्ताव वेवसिटी की संशोधित डीपीआर और ले-आउट प्लान से जुड़ा है। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में वेवसिटी को दी गई छूट पर सीएजी ने ऑडिट के दौरान आपत्ति लगा दी थी। इसमें बताया गया था कि यह छूट दिए जाने से जीडीए को 401 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसकी वजह से जीडीए ने वेवसिटी की 4196.30 एकड़ की संशोधित डीपीआर और 3786.79 एकड़ के ले-आउट प्लान के प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। ऑडिट आपत्ति का निस्तारण न होने से अटके वेवसिटी के इस प्रस्ताव का मामला शासन तक पहुंचा तो बीते महीने अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी हाईपावर कमेटी ने इस पर मंथन किया। इसके बाद कमेटी ने उतनी रकम की जमीन बंधक रखने का फैसला किया, जितनी रकम की छूट वेवसिटी को मिली थी। अब मामला पीएसी (पब्लिक अकाउंट कमेटी) के पास पहुंच गया है। ऐसे में शासन के फैसले के आधार पर जीडीए अधिकारियों ने जमीन बंधक रखकर संशोधित डीपीआर और ले-आउट प्लान पास किए जाने का प्रस्ताव जीडीए बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया, बोर्ड ने इस पर सहमति दे दी है। ऐसे में अब वेवसिटी के दूसरे फेज में प्लॉट खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों को भी राहत मिल जाएगी। जीडीए बोर्ड की बैठक में उपाध्यक्ष इंद्र विक्रम सिंह, अपर सचिव सीपी त्रिपाठी, वित्त नियंत्रक एके वाजपेयी, विशेष कार्याधिकारी गुंजा सिंह, मुख्य अभियंता मानवेंद्र सिंह, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के चीफ कोआर्डिनेटर प्लानर एससी गौड, बोर्ड सदस्य पवन गोयल व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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संशोधित भवन उपविधि के अनुसार हो सकेंगे नक्शे पास
जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड बैठक में संशोधित भवन उपविधि को अंगीकृत किए जाने पर भी मुहर लग गई है। इसके बाद अब इस उपविधि में दिए गए प्रावधानों के अनुसार भवनों के नक्शे पास हो सकेंगे। इस उपविधि के अनुसार अब 300 वर्गमीटर से छोटे भूखंडों पर फ्लैट नहीं बन सकेंगे, हालांकि ऐसे भूखंड पर स्टिल्ट पार्किंग बनाने के लिए दो मीटर ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। ऐसे प्लॉट पर अब 10.50 मीटर की बजाय 12.50 मीटर ऊंचे भवन बनाए जा सकेंगे। 12 मीटर से ज्यादा चौड़ी सड़क पर मौजूद 300 वर्गमीटर या उससे ज्यादा बड़े प्लॉट पर स्टिल्ट पार्किंग के साथ चार फ्लोर बनाने की अनुमति मिलेगी।
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बजट भी किया गया पेश
जीडीए अधिकारियों ने बोर्ड बैठक वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट भी पेश किया। परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से स्वीकृत हो चुके इस बजट में 1294 करोड़ रुपये आय व 1226 करोड़ व्यय का लक्ष्य रखा है। प्राधिकरण की बैलेंस सीट की बैठक में पेश की गई। जीडीए ने इसमें दर्शाया है कि 2023-24 में 122 करोड़ का मुनाफा कमाया है। इनके अलावा शेल्टर फीस के खाते में जमा धनराशि दूसरे मद में प्रयोग करने, प्राधिकरण के प्रवर्तन कार्याें के लिए होमगार्ड तैनात किए जाने, प्राधिकरण के एक कर्मचारी व एक दिवंगत कर्मचारी की पत्नी के मेडिकल बिल का भुगतान करने के प्रस्ताव पर भी बोर्ड की मंजूरी मिल गई है।
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ठेका लेकर 15 दिन में अनुबंध न किया तो एक हजार रोजाना जुर्माना लगेगा
जीडीए ने ठेकेदारों पर भी सख्ती की है। अब जीडीए में काम करने वाले ठेकेदारों को टेंडर की रकम के बराबर हैसियत प्रमाण पत्र जमा कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही टेंडर मिलने पर 15 दिन में अनुबंध करना होगा। इस अवधि में अनुबंध न किए जाने पर ठेकेदार पर प्रतिदिन एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जीडीए बोर्ड से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब कार्याें की गुणवत्ता बढ़ेगी। ऐसे ठेकेदार बड़े काम नहीं ले सकेंगे जो उसे पूरा न कर सकें। वहीं, ठेकेदारों को 15 दिन में अनुबंध कराकर समय पर काम शुरू और पूरा करना होगा।
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सोमवार शाम चार बजे मेरठ में मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. की अध्यक्षता में हुई जीडीए बोर्ड की बैठक में जीडीए अधिकारियों की ओर से 10 प्रस्ताव रखे गए थे। इसमें वर्ष 2010 में प्रताप विहार में 348 और राजेंद्र नगर में बनाए गए 560 ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण पर खर्च हुई 27.21 करोड़ की अतिरिक्त रकम से संबंधित प्रस्ताव सबसे प्रमुख था। दरअसल, शासन ने इन भवनों की कीमत आवंटी के लिए महज दो लाख रुपये निर्धारित की थी, जबकि इनकी लागत ज्यादा थी। इसकी वजह से जीडीए को अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ी थी, लेकिन रिकवरी नहीं हुई थी। इस पर ऑडिट आपत्ति लगने की वजह से जीडीए को इस रकम की रिकवरी का रास्ता बनाना पड़ा। इसके लिए जीडीए ने व्यावसायिक भूखंडों की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया। मंथन के बाद इसे स्वीकृति मिल गई। इसका असर जीडीए की 31500 वर्ग मीटर व्यावसायिक जमीन के खरीदारों पर पड़ेगा। इनका आरक्षित मूल्य अब 8700 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से बढ़ जाएगा।
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इसके अलावा दूसरा बड़ा प्रस्ताव वेवसिटी की संशोधित डीपीआर और ले-आउट प्लान से जुड़ा है। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में वेवसिटी को दी गई छूट पर सीएजी ने ऑडिट के दौरान आपत्ति लगा दी थी। इसमें बताया गया था कि यह छूट दिए जाने से जीडीए को 401 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसकी वजह से जीडीए ने वेवसिटी की 4196.30 एकड़ की संशोधित डीपीआर और 3786.79 एकड़ के ले-आउट प्लान के प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। ऑडिट आपत्ति का निस्तारण न होने से अटके वेवसिटी के इस प्रस्ताव का मामला शासन तक पहुंचा तो बीते महीने अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी हाईपावर कमेटी ने इस पर मंथन किया। इसके बाद कमेटी ने उतनी रकम की जमीन बंधक रखने का फैसला किया, जितनी रकम की छूट वेवसिटी को मिली थी। अब मामला पीएसी (पब्लिक अकाउंट कमेटी) के पास पहुंच गया है। ऐसे में शासन के फैसले के आधार पर जीडीए अधिकारियों ने जमीन बंधक रखकर संशोधित डीपीआर और ले-आउट प्लान पास किए जाने का प्रस्ताव जीडीए बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया, बोर्ड ने इस पर सहमति दे दी है। ऐसे में अब वेवसिटी के दूसरे फेज में प्लॉट खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों को भी राहत मिल जाएगी। जीडीए बोर्ड की बैठक में उपाध्यक्ष इंद्र विक्रम सिंह, अपर सचिव सीपी त्रिपाठी, वित्त नियंत्रक एके वाजपेयी, विशेष कार्याधिकारी गुंजा सिंह, मुख्य अभियंता मानवेंद्र सिंह, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के चीफ कोआर्डिनेटर प्लानर एससी गौड, बोर्ड सदस्य पवन गोयल व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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संशोधित भवन उपविधि के अनुसार हो सकेंगे नक्शे पास
जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड बैठक में संशोधित भवन उपविधि को अंगीकृत किए जाने पर भी मुहर लग गई है। इसके बाद अब इस उपविधि में दिए गए प्रावधानों के अनुसार भवनों के नक्शे पास हो सकेंगे। इस उपविधि के अनुसार अब 300 वर्गमीटर से छोटे भूखंडों पर फ्लैट नहीं बन सकेंगे, हालांकि ऐसे भूखंड पर स्टिल्ट पार्किंग बनाने के लिए दो मीटर ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। ऐसे प्लॉट पर अब 10.50 मीटर की बजाय 12.50 मीटर ऊंचे भवन बनाए जा सकेंगे। 12 मीटर से ज्यादा चौड़ी सड़क पर मौजूद 300 वर्गमीटर या उससे ज्यादा बड़े प्लॉट पर स्टिल्ट पार्किंग के साथ चार फ्लोर बनाने की अनुमति मिलेगी।
बजट भी किया गया पेश
जीडीए अधिकारियों ने बोर्ड बैठक वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट भी पेश किया। परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से स्वीकृत हो चुके इस बजट में 1294 करोड़ रुपये आय व 1226 करोड़ व्यय का लक्ष्य रखा है। प्राधिकरण की बैलेंस सीट की बैठक में पेश की गई। जीडीए ने इसमें दर्शाया है कि 2023-24 में 122 करोड़ का मुनाफा कमाया है। इनके अलावा शेल्टर फीस के खाते में जमा धनराशि दूसरे मद में प्रयोग करने, प्राधिकरण के प्रवर्तन कार्याें के लिए होमगार्ड तैनात किए जाने, प्राधिकरण के एक कर्मचारी व एक दिवंगत कर्मचारी की पत्नी के मेडिकल बिल का भुगतान करने के प्रस्ताव पर भी बोर्ड की मंजूरी मिल गई है।
ठेका लेकर 15 दिन में अनुबंध न किया तो एक हजार रोजाना जुर्माना लगेगा
जीडीए ने ठेकेदारों पर भी सख्ती की है। अब जीडीए में काम करने वाले ठेकेदारों को टेंडर की रकम के बराबर हैसियत प्रमाण पत्र जमा कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही टेंडर मिलने पर 15 दिन में अनुबंध करना होगा। इस अवधि में अनुबंध न किए जाने पर ठेकेदार पर प्रतिदिन एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जीडीए बोर्ड से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब कार्याें की गुणवत्ता बढ़ेगी। ऐसे ठेकेदार बड़े काम नहीं ले सकेंगे जो उसे पूरा न कर सकें। वहीं, ठेकेदारों को 15 दिन में अनुबंध कराकर समय पर काम शुरू और पूरा करना होगा।