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Ghaziabad News: सेवानिवृत्त बुजुर्ग को 21 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 81 लाख रुपये की ठगी
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गाजियाबाद। सीबीआई की कार्रवाई का डर दिखाकर साइबर ठगों ने 70 वर्षीय बुजुर्ग को 21 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रख 81 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी बुजुर्ग को हर दिन वीडियो कॉल पर ट्रांजेक्शन करवाने के बाद एक दिन की राहत दिया करते थे। इस प्रकार से उन्होंने इन दिनों में 14 बार में उनसे यह रकम अलग-अलग खातों में डलवाई। ठगी का अहसास होने पीड़ित ने इस मामले में साइबर पुलिस से शिकायत की। जहां सोमवार को मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि लाजपत नगर निवासी राजीब नियोगी की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। 10 से अधिक खातों में रुपये डलवाए गए हैं। यह ट्रांजेक्शन नेटबैंकिंग के माध्यम से की गई है। सभी खातों की जानकारी निकाली जा रही है। एडीसीपी ने बताया कि राजीव नियोगी (70) सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हैं। उनके मुताबिक उन्हें एक अगस्त 2026 में एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का प्रयोग कर कई खाते खोले गए हैं। ये खाते सीबीआई और ईडी के रेडार पर हैं। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट है। आरोपियों उन्हें ईडी और सीबीआई के वारंट भी भेजे। इस दौरान उन्हें बुजुर्ग होने की बात कर मामले को साहिबाबाद ट्रांसफर करने के लिए कहा तो आरोपियों ने उनके साथ परिवार को भी हिरासत में लेने की धमकी दी।
इस बीच खुद को सीबीआई का सर्विलांस अधिकारी बताने वाले राजेश कुमार ने उन्हें व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल की। जहां उनके आधार और पैन कार्ड की जानकारी ली और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाए। ठगों ने रुपये लौटाने की धमकी दी। डरकर नियोगी ने पहली बार एक अगस्त को 10 लाख रुपये जांच के नाम पर ठगों के बताए खाते में डाल दिए। इसके बाद 21 अगस्त तक उन्होंने अलग-अलग खातों में रुपये डाले। आरोपी उन्हें हर कुछ दिन में वीडियो कॉल पर लेकर धमकाते थे। उन्होंने इसके बीच सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और एसबीआई के खातों में कुल 81,37,118 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि लाजपत नगर निवासी राजीब नियोगी की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। 10 से अधिक खातों में रुपये डलवाए गए हैं। यह ट्रांजेक्शन नेटबैंकिंग के माध्यम से की गई है। सभी खातों की जानकारी निकाली जा रही है। एडीसीपी ने बताया कि राजीव नियोगी (70) सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हैं। उनके मुताबिक उन्हें एक अगस्त 2026 में एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का प्रयोग कर कई खाते खोले गए हैं। ये खाते सीबीआई और ईडी के रेडार पर हैं। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट है। आरोपियों उन्हें ईडी और सीबीआई के वारंट भी भेजे। इस दौरान उन्हें बुजुर्ग होने की बात कर मामले को साहिबाबाद ट्रांसफर करने के लिए कहा तो आरोपियों ने उनके साथ परिवार को भी हिरासत में लेने की धमकी दी।
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इस बीच खुद को सीबीआई का सर्विलांस अधिकारी बताने वाले राजेश कुमार ने उन्हें व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल की। जहां उनके आधार और पैन कार्ड की जानकारी ली और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाए। ठगों ने रुपये लौटाने की धमकी दी। डरकर नियोगी ने पहली बार एक अगस्त को 10 लाख रुपये जांच के नाम पर ठगों के बताए खाते में डाल दिए। इसके बाद 21 अगस्त तक उन्होंने अलग-अलग खातों में रुपये डाले। आरोपी उन्हें हर कुछ दिन में वीडियो कॉल पर लेकर धमकाते थे। उन्होंने इसके बीच सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और एसबीआई के खातों में कुल 81,37,118 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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