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Ghaziabad News: बचाओ-बचाओ चिल्लाते खामोश हो गईं पांच जिंदगियां

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jun 2024 04:40 AM IST
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Five lives became silent while shouting 'save us'
लोनी। बेहटा हाजीपुर गांव पार्किंग ठेकेदार सारिक के मकान में उनके परिवार के पांच लोगों की जिंदगी बचाओ-बचाओ चिल्लाते खामोश हो गई। आग की लपटों और धुएं के गुबार में सात लोग फंस गए थे। सातों जान बचाने के लिए छत की तरफ दौड़े लेकिन पांच का रास्ता धुएं ने रोक लिया। दो ही छत तक पहुंचे। उन्हें पड़ोसियों की मदद से बचा लिया। बाकी पांचों का दम घुट गया। इसके बाद पांचों बुरी तरह झुलस गए। उनके शव मकान की दीवार तोड़कर निकाले गए।
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मकान के अंदर सात लोगों में सारिक की पत्नी फरहीन (25), सात माह का बेटा सीज, बहन नाजरा (35), बहनोई सैफ (36) और भांजी इसरा (चार), भांजा अर्श (चार) और अविवाहित बहन उज्मा थे। रात आठ बजे पहली मंजिल पर आग लगी तो उन्हें इसका पता ही नहीं चला। आग जब दूसरी मंजिल पर पहुंची तो वे घबरा गए।
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उन्होंने बाहर निकलने का प्रयास किया लेकिन धुआं अंदर तक आ चुका था। ऐसे में छत की तरफ दौड़े लेकिन वहां भी धुआं भर चुका था। उज्मा ने बताया कि अर्श रहमान उनकी गोदी में था। वह उसे लेकर छत तक पहुंच गई। दोनों आग की लपटों से झुलस गए। उनकी चीख सुनकर आसपास के लोग छत पर आ गए।
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वे लोग सीढ़ी की मदद से उन्हें पहले अपने घर ले गए और फिर अस्पताल पहुंचा। आग में फंसे परिवार के बाकी लोग छत तक नहीं पहुंच सके। आसपास के लोगों ने बताया कि अंदर से कुछ देर तक चीख सुनाई दे रही थी। वे लोग बचाओ-बचाओ कह रहे थे। थोड़ी देर बाद आवाज आनी बंद हो गई। अगर दमकल समय से आ जाती तो शायद उनकी जान बच जाती। लोग बाल्टियों से पानी डाल रहे थे। आग विकराल थी। इतने से पानी से बुझ नहीं रही थी। दो दमकलों ने आग पर काबू पाया। इसके बाद भी धुएं की वजह से कोई अंदर नहीं जा रहा था। रात 12 बजे मकान की दीवार को तोड़कर शवों को बाहर निकाला जा सका।



बचाओ..बचाओ चिल्लाते निकली उज्मा
आग लगने के करीब आधे घंटे बाद सारिक की बहन उज्मा बाहर निकलीं। उनकी गोदी में बहन नाजरा का बेटा अर्श रहमान था। दोनों काफी झुलस चुके थे। इसके बावजूद उज्मा ने हिम्मत नहीं हारी। गोदाम से लेकर मकान की दूसरी मंजिल तक आग की विकराल लपटें थीं। धुआं सीढ़ियों तक भरा हुआ था। इस धुएं में कुछ नजर भी नहीं आ रहा था। लोग बाहर से पानी डाल रहे थे। ऐसे हालात के बीच उज्मा बचाओ..बचाओ चिल्लाते हुए छत तक पहुंच गईं।




दूध लेने के लिए गए थे सारिक
लौटे तो उजड़ चुकी थी दुनिया
सारिक रात आठ बजे दूध लेने के लिए घर से निकले थे। वह थोड़ी देर बाद ही लौट आए। लेकिन इसी बीच उनकी दुनिया उजड़ गई। वह लौटे तो आंखों से सामने जलता हुआ मकान था। अंदर से कुछ आवाज आ रही थी। शायद अंदर फंसे लोग बचाओ...बचाओ पुकार रहे हों, लेकिन बाहर के शोर की वजह से अंदर की आवाज साफ सुनाई नहीं दे रही थी। करीब तीन घंटे बाद आग बुझी। लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अंदर पत्नी, बेटे, बहन, बहनोई और भांजी के शव पड़े थे।
8
बजे लगी आग
11
पाया गया काबू
12
बजे निकाले शव
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