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Ghaziabad News: फर्माें ने डाटा छुपाया, राज्यकर विभाग ने 18 हजार व्यापारियों को भेजा नोटिस
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खास खबर
गाजियाबाद। वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) को खत्म कर जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू किए जाने के बाद 2017-18 में किए गए लेनदेन पर व्यापारियों को अब छह साल बाद नोटिस भेजे जा रहे हैं। इस अवधि में व्यापारियों की ओर से दाखिल की गई जीएसटी रिटर्न में दिए गए टू ए के आंकड़ों में कई गड़बड़ियां सामने आने पर राज्यकर विभाग की ओर से गाजियाबाद में 18 हजार से ज्यादा व्यापारियों को नोटिस भेजे गए हैं। अब व्यापारियों को इन नोटिस का ऑनलाइन जवाब दाखिल करने के साथ ही सुबूत के तौर पर दस्तावेज भी राज्यकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे।
राज्यकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 गोविंद बुधियाल का कहना है कि जीएसटी काउंसिल की ओर से दिए गए फर्माें के ब्योरे के आधार पर लखनऊ स्थित मुख्यालय से यह नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी फर्माें को नोटिस जारी किए गए हैं जिनकी ओर से दाखिल की गई जीएसटी रिटर्न में फार्म टू ए के आंकड़ों और दस्तावेजों में अंतर पाया गया है। जीएसटी का सॉफ्टवेयर ऐसी फर्माें को खुद-ब-खुद चिह्नित कर लेता है। इसके आधार पर संदिग्ध लेनदेन करने वाली इन फर्माें के संचालकों को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने के लिए कहा गया है।
नोटिस की अवधि में जवाब दाखिल करने के साथ-साथ फर्म संचालकों को जीएसटी रिटर्न में आ रहे अंतर की वजह भी बतानी होगी। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के जोन-एक में करीब 42 हजार और जोन-दो में 10 हजार से ज्यादा व्यापारी पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 18 हजार व्यापारियों को ऑनलाइन नोटिस भेजे गए हैं। उनका कहना है कि नोटिस की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी। जिन फर्माें की जीएसटी रिटर्न के आंकड़ों का मिलान नहीं हो पाएगा, ऐसी अन्य फर्माें को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
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अभी सिर्फ 2017-18 में पंजीकृत फर्म हैं रडार पर
राज्यकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 2017-18 में जीएसटी लागू किया गया था। अधिकांश उन फर्माें को नोटिस जारी किया जा रहा है जो इस अवधि में पंजीकृत हुई थीं। इस अवधि में दाखिल की गई जीएसटी रिटर्न के आंकड़ों में ही गड़बड़ी पाई गई है। जीएसटी एक्ट की धारा-61 के तहत यह नोटिस जारी किए गए हैं।
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व्यापारी बोले, यह अन्याय है
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री तिलकराज अरोड़ा का कहना है कि बड़े पैमाने पर भेजे जा रहे नोटिस व्यापारियों के साथ अन्याय है। 2017-18 में राज्यकर विभाग ने कुछ फार्म अनिवार्य कर दिए थे, जिसमें फार्म 2 ए भी शामिल था। टैक्स की नई पद्धति लागू होने के कारण व्यापारियों को इसकी सही जानकारी नहीं थी। इसी की वजह से तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वादा किया था कि रिटर्न में छोटे-मोटे अंतर पर व्यापारियों पर कार्रवाई नहीं होगी। उनका कहना है कि ऐसी ही कार्रवाई पर कानपुर में व्यापार बंधु की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था। वहां अधिकारियों ने एक हजार रुपये तक के अंतर पर कार्रवाई न करने की छूट दे दी है। गाजियाबाद में यह छूट लागू नहीं की गई है। इस संबंध में राज्यकर आयुक्त को पत्र भेजकर विरोध करेंगे। पूरे राज्य में एक जैसे नियम होने चाहिए।
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गाजियाबाद। वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) को खत्म कर जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू किए जाने के बाद 2017-18 में किए गए लेनदेन पर व्यापारियों को अब छह साल बाद नोटिस भेजे जा रहे हैं। इस अवधि में व्यापारियों की ओर से दाखिल की गई जीएसटी रिटर्न में दिए गए टू ए के आंकड़ों में कई गड़बड़ियां सामने आने पर राज्यकर विभाग की ओर से गाजियाबाद में 18 हजार से ज्यादा व्यापारियों को नोटिस भेजे गए हैं। अब व्यापारियों को इन नोटिस का ऑनलाइन जवाब दाखिल करने के साथ ही सुबूत के तौर पर दस्तावेज भी राज्यकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे।
राज्यकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 गोविंद बुधियाल का कहना है कि जीएसटी काउंसिल की ओर से दिए गए फर्माें के ब्योरे के आधार पर लखनऊ स्थित मुख्यालय से यह नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी फर्माें को नोटिस जारी किए गए हैं जिनकी ओर से दाखिल की गई जीएसटी रिटर्न में फार्म टू ए के आंकड़ों और दस्तावेजों में अंतर पाया गया है। जीएसटी का सॉफ्टवेयर ऐसी फर्माें को खुद-ब-खुद चिह्नित कर लेता है। इसके आधार पर संदिग्ध लेनदेन करने वाली इन फर्माें के संचालकों को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने के लिए कहा गया है।
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नोटिस की अवधि में जवाब दाखिल करने के साथ-साथ फर्म संचालकों को जीएसटी रिटर्न में आ रहे अंतर की वजह भी बतानी होगी। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के जोन-एक में करीब 42 हजार और जोन-दो में 10 हजार से ज्यादा व्यापारी पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 18 हजार व्यापारियों को ऑनलाइन नोटिस भेजे गए हैं। उनका कहना है कि नोटिस की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी। जिन फर्माें की जीएसटी रिटर्न के आंकड़ों का मिलान नहीं हो पाएगा, ऐसी अन्य फर्माें को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
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अभी सिर्फ 2017-18 में पंजीकृत फर्म हैं रडार पर
राज्यकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 2017-18 में जीएसटी लागू किया गया था। अधिकांश उन फर्माें को नोटिस जारी किया जा रहा है जो इस अवधि में पंजीकृत हुई थीं। इस अवधि में दाखिल की गई जीएसटी रिटर्न के आंकड़ों में ही गड़बड़ी पाई गई है। जीएसटी एक्ट की धारा-61 के तहत यह नोटिस जारी किए गए हैं।
व्यापारी बोले, यह अन्याय है
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री तिलकराज अरोड़ा का कहना है कि बड़े पैमाने पर भेजे जा रहे नोटिस व्यापारियों के साथ अन्याय है। 2017-18 में राज्यकर विभाग ने कुछ फार्म अनिवार्य कर दिए थे, जिसमें फार्म 2 ए भी शामिल था। टैक्स की नई पद्धति लागू होने के कारण व्यापारियों को इसकी सही जानकारी नहीं थी। इसी की वजह से तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वादा किया था कि रिटर्न में छोटे-मोटे अंतर पर व्यापारियों पर कार्रवाई नहीं होगी। उनका कहना है कि ऐसी ही कार्रवाई पर कानपुर में व्यापार बंधु की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था। वहां अधिकारियों ने एक हजार रुपये तक के अंतर पर कार्रवाई न करने की छूट दे दी है। गाजियाबाद में यह छूट लागू नहीं की गई है। इस संबंध में राज्यकर आयुक्त को पत्र भेजकर विरोध करेंगे। पूरे राज्य में एक जैसे नियम होने चाहिए।